शैलज त्रि त्रिस्तरीय अनुक्रिया सिद्धांत :-
किसी भी प्राणी के वातावरण उपस्थित उद्दीपनों के प्रभाव उस प्राणी पर सूक्ष्म और / या स्थूल रूप से तथा व्यक्त और / या अव्यक्त रूप से पड़ते हैं, जिसका उस प्राणी की दैहिक, मानसिक एवं मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक स्थिति पर गौण और / या स्पष्ट प्रभाव उसकी अनुक्रिया (समायोजन एवं व्यवहार) में दृष्टिगोचर होता है, जो उस प्राणी की मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक अन्तर्क्रियाओं से प्रभावित होकर मनोजैविक व्यवहार प्रक्रियाओं के माध्यम से समायोजनात्मक व्यवहार के स्थूल या सूक्ष्म रूप में प्रकट होता है।
किसी प्राणी द्वारा वातावरण में उपस्थित उद्दीपनों के प्रति उस व्यक्ति या प्राणी के निम्न- मस्तिष्क (Lower Brain) या Spinal Brain द्वारा प्रायः अनेक आपातकालीन निर्णय सद्यः, सटीक एवं स्वत: लिये जाते हैं, अतः यह प्राणी का आपातकालीन मस्तिष्क (Emergency Brain) होता है और इसके क्रिया कलापों का सूत्रधार सुषुम्ना नाड़ी होती है, जो ज्ञान वाही नाड़ी से प्राप्त विद्युत रासायनिक तरंगों का तात्कालिक विश्लेषण करके क्रिया वाही नाड़ी को व्यक्ति या प्राणी के मनोदैहिक और/या मनो-शरीरिक हित में आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से यथोचित रूप से क्रियामाण होने (Action) हेतु प्रेरित और/या आदेशित करके अपने संयोजक- स्नायु के आपातकालीन दायित्व को पूरा करती है, जिसका निर्वहन का हर संभव प्रयास क्रिया वाही नाड़ी द्वारा किया जाता है, इस प्रकार Lower Or Spinal Or Emergency Brain द्वारा सम्पादित क्रिया प्रतिक्षेप धनु (Reflex Arch) का काम करती है, जो उच्च मस्तिष्क (Upper Or High Or Main Brain) के निर्णय या मानसिक निर्णय रहित होते हैं, जो व्यक्ति या प्राणी का "स्वत: अनुक्रिया व्यवहार" (Auto Or Automatic response behavior) होता है।
व्यक्ति या प्राणी के मस्तिष्क तक उद्दीपन प्रभाव पहुँचने के पश्चात् मस्तिष्क द्वारा प्राणी के मनोदैहिक और या मनो-शरीरिक स्थिति के सन्दर्भ में लिये गए निर्णय के आलोक में उस व्यक्ति या प्राणी की "अत्यावश्यक एवं तात्कालिक अनुक्रिया" को "तात्कालिक व्यवहार" (Immediate Behaviour) या सामान्य रूप में "व्यवहार" ( Behaviour ) कहते हैं, लेकिन उद्दीपन बोध के पश्चात् मस्तिष्क को प्राप्त भूतकालिक प्रभाव से वर्त्तमान परिस्थिति के साथ विश्लेषण के आधार पर भावी प्रभाव के दृष्टिकोण से लिये गये निर्णय के आलोक में की गई अनुक्रिया "समायोजनात्मक व्यवहार" (Adjusting Behaviour) की श्रेणी में आता है या कहलाता है।
प्राणी की अनुक्रियाएँ न केवल दैहिक, वरन् मानसिक, मनोवैज्ञानिक, मनोदैहिक, मनो- शारीरिक तथा अतीन्द्रिय आदि समस्त स्तरों पर घटित होती हैं।
किसी भी प्राणी का और मुख्यतः मानव मस्तिष्क मूलाधार चक्र से सहस्त्रसार चक्र तक फैला हुआ है, जो ईड़ा नाड़ी अर्थात् चन्द्र नाड़ी अर्थात् ज्ञान वाही नाड़ी अर्थात् सौम्य नाड़ी अर्थात् भावना प्रधान नाड़ी, पिंगला नाड़ी अर्थात् सूर्य नाड़ी अर्थात् क्रिया वाही नाड़ी अर्थात् क्रूर नाड़ी अर्थात् कर्म प्रधान नाड़ी तथा सुषुम्ना नाड़ी अर्थात् संयोजक नाड़ी अर्थात् ईड़ा-पिंगला संयोजक एवं नियन्त्रक नाड़ी के माध्यम से प्राणी के जीवन में चेतना बोध, संचरण एवं समायोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है सम्पूर्ण शरीर और इसके वातावरण में व्याप्त मन एवं जीवन उत्पत्ति, पालन और संचालन शक्ति, केन्द्र एवं आत्मा के निवास स्थान हृदय के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी रहती है।
इस प्रकार व्यक्ति या प्राणी की त्रिस्तरीय
अनुक्रियाएँ भी दैहिक, मानसिक या मनोवैज्ञानिक और अतीन्द्रिय स्तरीय होने से
त्रि त्रिस्तरीय होती है।
डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज,
एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।
(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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Shailaj Tri Trilayer Response Theory:-
The effects of stimuli present in the environment of any organism on the organism subtly and/or grossly and expressly and/or implicitly, with secondary and/or obvious effects on the organism's physical, mental and psychosomatic and/or psycho-physical condition Influenced by physics and psychobiological chemical interactions, it manifests as macro or micro forms of adjustment behavior through psychobiological behavioral processes.
Many emergency decisions are often made immediately, accurately and automatically by the Lower Brain or Spinal Brain of an organism in response to stimuli present in the environment. Therefore, it is the Emergency Brain of the organism By inducing and/or ordering the action vein to take action as appropriate from the point of view of disaster management in the psychosomatic and/or psycho-physical interest of the person or creature, it fulfills the emergency duty of its connective- muscle Arch) functions, which are devoid of decisions or mental decisions of the Upper Or High Or Main Brain, which is the "Automatic response behavior" of the person or creature.
The "essential and immediate response" of a person or animal in light of the decision made by the brain regarding the psychosomatic and or psycho-physical state of the person or animal after the stimulus effect reaches the brain is called "Immediate Behavior" The response taken in light of the decision taken in terms of future impact based on analysis with the present situation falls under the category of "Adjusting Behaviour"
The reactions of the creature occur not only at the physical, but also at all levels, such as the mental, psychological, psychosomatic, psycho- physical and transcendental.
The brain of any being and mainly human brain extends from Muladhara Chakra to Sahasrasara Chakra, through Ida Nadi i.e. Chandra Nadi i.e. Knowledge Nadi i.e. Soumya Nadi i.e. Emotion Pradhan Nadi, Pingala Nadi i.e. Surya Nadi i.e. Kriya Nadi i.e. Krura Nadi i.e. Karma Pradhan Nadi From plays an important role in consciousness perception, transmission and adjustment in the life of the creature, the mind and life pervading the entire body and its environment are integrally connected with the heart, the abode of the power of origin, maintenance and operation, center and soul.
Thus the three levels of the person or creature
Reactions also being physical, mental or psychological and transcendental levels
Tri is three-layered.
Dr. Prof. Avdhesh Kumar Shailaj,
MA: Psychology, Law Student, Astrology Lover, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemical and Holistic Medicine Scholar.
(AI Honorary Degrees: Science, Psychology, Medicine, Philosophy and Holistic Studies)
Father: Late Rajendra Prasad Singh
Village: Pachamba, District: Begusarai,
Pincode: 851218, State: Bihar (India).
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शैलजस्य त्रिस्तरीयप्रतिक्रियासिद्धान्तः : १.
कस्यचित् जीवस्य पर्यावरणीय-उत्तेजनानां तस्य जीवस्य शारीरिक-मानसिक-मनोदैहिक-अथवा मनो-शारीरिक-स्थितौ सूक्ष्मः/अथवा स्थूलः, प्रकटः,/वा प्रकटः प्रभावः भवति तस्य जीवस्य शारीरिक-मानसिक-/अथवा मनो-शारीरिक-स्थितौ तेषां गौणः/वा प्रकटः प्रभावः तस्य प्रतिक्रियायां (समायोजनं व्यवहारं च) दृश्यते, यत् जीवस्य मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-परस्परक्रियाणां च प्रभावेण मनोजैविक-व्यवहार-प्रक्रियाणां माध्यमेन समायोजन-व्यवहारस्य स्थूल-सूक्ष्म-रूपेण प्रकट्यते
अनेकाः आपत्कालीननिर्णयाः प्रायः तत्क्षणमेव, समीचीनतया च स्वयमेव कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा अधोमस्तिष्केन वा मेरुदण्डेन वा वातावरणे उपस्थितानां उत्तेजनानां प्रतिक्रियारूपेण गृह्यन्ते, अतः सः पशुस्य आपत्कालीनमस्तिष्कं भवति तथा च तस्य क्रियाकलापस्य मास्टरमाइण्डः मेरुदण्डः भवति, यः इन्द्रियरज्जुतः प्राप्तानां विद्युत्रासायनिकतरङ्गानाम् तत्क्षणं विश्लेषणानन्तरं स्वस्य आपत्कालीनदायित्वं पूरयति व्यक्तिस्य वा पशुस्य मनोदैहिक-अथवा मनो-शारीरिक-हिते आपदा-प्रबन्धनस्य दृष्ट्या समुचितरूपेण कार्यं कर्तुं क्रिया-तारं प्रेरयित्वा/वा आदेशं दत्त्वा तंत्रिकां संयोजयितुं, यत् क्रिया-रज्जु-द्वारा सर्व-संभव-प्रयत्नेन निर्वह्यते, एवं निम्न-वा मेरुदण्ड-अथवा आपत्कालीन-मस्तिष्केन कृता क्रिया प्रतिबिम्ब-कपाटरूपेण कार्यं करोति, यत् उपरितन-उच्च-निर्णयात् वा मानसिक-निर्णयात् वा रहितं भवति अथवा मुख्यमस्तिष्कं, यत् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा "स्वचालितप्रतिक्रियाव्यवहारः" अस्ति ।
कस्यचित् उत्तेजकस्य व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा मस्तिष्कं प्राप्तस्य अनन्तरं तस्य व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा "तात्कालिकं तत्कालं च प्रतिक्रिया", व्यक्तिस्य मनोदैहिक-अथवा मनो-शारीरिक-स्थितेः विषये मस्तिष्केन कृतस्य निर्णयस्य आलोके, "तत्काल-व्यवहारः" अथवा केवलं "व्यवहारः" इति उच्यते परन्तु वर्तमानस्थित्या सह मस्तिष्केन प्राप्तस्य अतीतानुभूतेः विश्लेषणस्य आधारेण भविष्यस्य प्रभावस्य दृष्ट्या कृतस्य निर्णयस्य आलोके उत्तेजकस्य बोधानन्तरं कृता प्रतिक्रिया "समायोजकव्यवहारस्य" वर्गे पतति
पशुस्य प्रतिक्रियाः न केवलं शारीरिकस्तरस्य, अपितु मानसिक-मनोवैज्ञानिक-मनोदैहिक-मनो-शारीरिक-इन्द्रिय-बाह्य-सहिताः सर्वेषु स्तरेषु अपि भवन्ति
कस्यचित् जीवस्य विशेषतया च मानवस्य मस्तिष्कं मूलधरचक्रतः सहस्त्रसरचक्रपर्यन्तं प्रसारितं भवति, यत् इडा नाडी अर्थात् चन्द्रनादी अर्थात् ज्ञानप्रधान नाडी अर्थात् सौम्या नाडी अर्थात् भावप्रधान नाडी, पिंगलानादी अर्थात् सुर्या नादी द्वारा जीव के जीवन में चेतना की बोध, संचरण, समायोजन में महती भूमिका निभाते हैं अर्थात् कर्म-प्रधान नाडी अर्थात् क्रूर नाडी अर्थात् कर्म-प्रधान नाडी एवं सुषुम्ना नाडी अर्थात् संयोजक नाडी अर्थात् इडा-पिङ्गला संयोजक एवं नियंत्रक नाड़ी। सम्पूर्णशरीरे तस्य परिवेशे च प्रचलितं मनः जीवनं च निर्वहति, आत्मायाः, उत्पत्तिः, परिपालनं, संचालनशक्तिः, केन्द्रं, निवासं च सह अभिन्नरूपेण सम्बद्धं भवति
एवं पुरुषस्य वा प्राणिनः वा त्रयः स्तराः
प्रतिक्रियाः शारीरिकाः, मानसिकाः, मनोवैज्ञानिकाः वा इन्द्रियातिरिक्तस्तरस्य अपि भवितुम् अर्हन्ति ।
त्रिः त्रिस्तरीयः ।
डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज,
एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिष प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक एवं समग्र चिकित्सा विशेषज्ञ।
(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह
ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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