आपके द्वारा निर्धारित सिद्धांत—सभी जाति, धर्म, वर्ग, भाषा एवं क्षेत्रों का संतुलित एवं समावेशी प्रतिनिधित्व तथा तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं स्रोत-आधारित मूल्यांकन—इस परियोजना की आधारशिला होने चाहिए।
मैं प्रत्येक व्यक्तित्व का निम्नलिखित मानक प्रारूप में विवरण तैयार करूँगा:
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन प्रपत्र
1. नाम
2. जन्म–मृत्यु
3. जन्मस्थान
4. कार्यक्षेत्र
5. संक्षिप्त जीवन परिचय
6. प्रमुख उपलब्धियाँ
7. राष्ट्रहित में योगदान
संविधान एवं लोकतंत्र
स्वतंत्रता आन्दोलन
राष्ट्रीय एकता
शिक्षा
विज्ञान
प्रशासन
अर्थव्यवस्था
संस्कृति
सामाजिक सुधार
अन्य
8. लोकहित में योगदान
शिक्षा
स्वास्थ्य
समाजसेवा
ग्रामीण विकास
महिला एवं बाल विकास
पिछड़े वर्गों का उत्थान
पर्यावरण
अन्य
9. प्रमुख कृतियाँ
(पुस्तकें, शोध, संस्थाएँ, योजनाएँ, आंदोलन, नीतियाँ आदि)
10. प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय
राज्यस्तरीय
विश्वविद्यालयीय
अन्य
11. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
भारत रत्न
पद्म विभूषण
पद्म भूषण
पद्मश्री
अन्य
यदि कोई राष्ट्रीय नागरिक सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है, तो उसका तथ्यात्मक उल्लेख।
12. राष्ट्रीय सम्मान हेतु मूल्यांकन
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पात्रता का विश्लेषण।
समर्थन में उपलब्ध प्रमाण।
सीमाएँ अथवा उपलब्ध अभिलेखों का उल्लेख।
13. अनुशंसित राष्ट्रीय सम्मान
(केवल तथ्यात्मक एवं दस्तावेजी आधार उपलब्ध होने पर)
14. प्रमाण एवं संदर्भ
सरकारी अभिलेख
संसद/विधानसभा अभिलेख
विश्वविद्यालयीय दस्तावेज
प्रकाशित पुस्तकें
शोधपत्र
समाचारपत्र
आत्मकथा/जीवनी
अन्य विश्वसनीय स्रोत
15. छायाचित्र
(यदि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एवं प्रामाणिक हो)
16. परिशिष्ट
कालक्रम (Timeline)
महत्वपूर्ण उद्धरण
दुर्लभ दस्तावेज
सम्मान सूची
संबंधित संस्थाएँ
प्रस्तावित कार्य-क्रम (प्रथम चरण)
बेगूसराय से प्रारम्भ करते हुए निम्नलिखित व्यक्तित्वों का विस्तृत शोध-दस्तावेज तैयार किया जाएगा—
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
वासुदेव सिंह
प्रो. के. के. मंडल
डॉ. रामवचन राय
महेन्द्र नारायण शर्मा
डॉ. अवधेश कुमार शैलज
परियोजना का द्वितीय चरण
इसके बाद बिहार के प्रत्येक जिले से विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि व्यक्तित्वों का चयन किया जाएगा, ताकि—
सभी जातियों का प्रतिनिधित्व हो।
सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व हो।
महिलाओं एवं पुरुषों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा एवं सामान्य वर्ग सहित सभी सामाजिक वर्गों का समावेश हो।
सभी प्रमुख भाषाई एवं सांस्कृतिक समुदायों का प्रतिनिधित्व हो।
ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, साहित्य, कला, संगीत, रंगमंच, पत्रकारिता, न्याय, प्रशासन, सेना, कृषि, उद्योग, खेल, समाजसेवा, योग, आध्यात्म, पर्यावरण, अनुसंधान तथा लोकपरम्परा जैसे सभी क्षेत्रों को सम्मिलित किया जाए।
इस परियोजना का उद्देश्य किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में मत देना नहीं होगा, बल्कि दस्तावेज़ों, अभिलेखों एवं प्रमाणों के आधार पर निष्पक्ष मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। जहाँ पर्याप्त तथ्य उपलब्ध नहीं होंगे, वहाँ स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि अधिक शोध एवं दस्तावेज़ीकरण अपेक्षित है।
इस प्रकार यह दस्तावेज़ भविष्य में शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों तथा राष्ट्रीय सम्मानों के अध्ययन के लिए एक प्रामाणिक संदर्भ-ग्रंथ के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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