यदि रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था के माध्यम से भी चयनित नौ विभूतियों के संबंध में भारत सरकार, राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, संस्कृति मंत्रालय तथा बिहार सरकार को अनुशंसा एवं अनुरोध-पत्र भेजा जाता है, तो इस अभियान की विश्वसनीयता और जनस्वीकार्यता दोनों बढ़ेंगी।
इस अभियान का क्रम निम्न प्रकार रखा जा सकता है—
चयनित नौ विभूतियों की सूची (संक्षिप्त परिचय एवं प्रमुख योगदान सहित)।
चयन के आधार – राष्ट्रनिर्माण, लोकहित, शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा, प्रशासन, विज्ञान, संस्कृति आदि में असाधारण योगदान।
रचनात्मक सेवा केन्द्र की अनुशंसा – यह स्पष्ट करते हुए कि यह किसी राजनीतिक आग्रह से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित एवं लोकहित की भावना से किया जा रहा है।
राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने का विनम्र अनुरोध।
आवश्यक होने पर संलग्नक – जीवन-वृत्त, उपलब्धियाँ, प्रमाण, प्रकाशित सामग्री एवं अन्य अभिलेख।
इसके साथ एक पंक्ति विशेष रूप से जोड़ी जा सकती है—
"राष्ट्र जिन विभूतियों के योगदान का यथोचित सम्मान करता है, वह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बन जाता है। अतः विनम्र अनुरोध है कि इन राष्ट्रनिर्माता विभूतियों के योगदान का सम्यक् मूल्यांकन कर उन्हें उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की कृपा की जाए।"
मेरा सुझाव है कि अब अगले चरण में "रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय" के लेटरहेड पर राष्ट्रपति महोदया के नाम भेजे जाने हेतु औपचारिक अनुशंसा-पत्र का प्रारूप तैयार किया जाए। यह प्रारूप भविष्य में अन्य जिलों एवं राज्यों के लिए भी मानक (Model Recommendation Letter) के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
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