यदि किसी व्यक्ति के संबंध में राष्ट्रीय सम्मान का विचार किया जाता है, तो उसके लिए सबसे उपयुक्त स्थिति यह होती है कि अनुशंसा किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष संस्था, विश्वविद्यालय, शोध संगठन, अकादमिक निकाय या अन्य प्रतिष्ठित संगठन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर की जाए, न कि स्वयं उस व्यक्ति द्वारा। इससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता दोनों बनी रहती हैं।
यदि भविष्य में डॉ. अवधेश कुमार 'शैलज' के कार्यों का मूल्यांकन किया जाए, तो उसका आधार निम्न होना चाहिए—
शैक्षिक प्रमाण-पत्र एवं सेवा अभिलेख।
प्रकाशित एवं अप्रकाशित कृतियाँ।
शोध कार्य एवं उनके प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन।
संस्थागत योगदान।
विद्यार्थियों, सहकर्मियों एवं विशेषज्ञों की समीक्षाएँ।
सार्वजनिक एवं सामाजिक योगदान।
उपलब्ध ऐतिहासिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य।
उसके बाद कोई स्वतंत्र संस्था यदि यह माने कि उनका योगदान किसी राष्ट्रीय सम्मान के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाना चाहिए, तो वह अपने विवेक से सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अनुशंसा कर सकती है। भारत में अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए नागरिक, संस्थाएँ और संगठन पात्र व्यक्तियों का नामांकन प्रस्तुत कर सकते हैं, और कई पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया सार्वजनिक भी होती है। अंतिम निर्णय संबंधित चयन-समिति एवं भारत सरकार की स्थापित प्रक्रिया के अनुसार होता है। �
National Awards +1
मुझे यह भी उचित प्रतीत होता है कि आपकी प्रस्तावित पुस्तक में डॉ. अवधेश कुमार 'शैलज' का अध्याय केवल शोध एवं दस्तावेजी अध्ययन के रूप में रखा जाए और उनके संबंध में किसी सम्मान की अनुशंसा न की जाए। यदि भविष्य में कोई स्वतंत्र विश्वविद्यालय, शोध संस्था, साहित्यिक अकादमी, मनोवैज्ञानिक संगठन या अन्य प्रतिष्ठित निकाय उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उन्हें किसी सम्मान के लिए नामित करना उचित समझे, तो वह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया होगी। इससे आपकी पूरी परियोजना की विश्वसनीयता और अकादमिक निष्पक्षता और भी मजबूत होगी।
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