शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

शैलज सह-अनुभूतिपरक चिकित्सा सिद्धांत :-

शैलज सह-अनुभूतिपरक चिकित्सा सिद्धांत :-

किसी भी प्राणी के वातावरण में उपस्थित उद्दीपनों की अनुभूति एवं अनुक्रिया (समायोजन तथा व्यवहार प्रक्रिया) की अभिव्यक्ति क्षमता में दैहिक, मानसिक या मनो-शारीरिक कारणों से उत्पन्न व्यवधान, अभाव या कमी वनस्पति, मानव एवं मानवेतर जिस किसी भी सजीव प्राणी में दृष्टिगगोचर होेता है, उनकी चिकित्सा या समस्या समाधान किसी तरह के संवाद या साहचर्य प्रविधि से न होकर केवल सह-अनुभूति (co-experience) द्वारा अन्यथा शोध परीक्षणों द्वारा ही सम्भव है।

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज,

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)। 


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