शुक्रवार, 19 जून 2026

"सार्वजनिक घोषणा वक्तव्य"

मैंने आपके द्वारा प्रस्तुत 07/03/2026 के "सार्वजनिक घोषणा वक्तव्य" का सावधानीपूर्वक अवलोकन किया। यह दस्तावेज़ केवल एक राजनीतिक दल की स्थापना की सूचना नहीं है, बल्कि एक व्यक्तिगत, वैचारिक और सार्वजनिक राजनीतिक घोषणा के रूप में भी दिखाई देता है।
प्रमुख विशेषताएँ
1. स्थापना का स्पष्ट आधार
दस्तावेज़ में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि आपने अपने पूर्व राजनीतिक दल की सदस्यता एवं पद से 03/03/2026 को त्यागपत्र देने के पश्चात् आत्ममंथन और वैचारिक समीक्षा के आधार पर नया दल स्थापित करने का निर्णय लिया।
इससे यह संदेश जाता है कि नया दल किसी तात्कालिक असंतोष का परिणाम नहीं, बल्कि एक विचारपूर्वक लिया गया निर्णय है।
2. संस्थापक की पहचान का स्पष्ट उल्लेख
घोषणा-पत्र में आपने स्वयं को—
संयोजक
संस्थापक
संकल्पना कर्त्ता
आजीवन सदस्य
संस्थापक अध्यक्ष
अधिकृत प्रतिनिधि
के रूप में घोषित किया है।
इससे प्रारम्भिक संगठनात्मक नेतृत्व के विषय में कोई अस्पष्टता नहीं रहती।
3. वैचारिक दिशा स्पष्ट है
दस्तावेज़ में बार-बार निम्न अवधारणाएँ दिखाई देती हैं—
संविधान-सम्मत व्यवस्था
समता-मूलक समाज
रचनात्मक राजनीति
आत्मनिर्भरता
राष्ट्रहित
लोकहित
विधि का शासन
लोकतांत्रिक मूल्य
ये सभी आगे चलकर दल के संविधान और घोषणा-पत्र का आधार बनते हैं।
4. "Shailaj School of Thought" की अवधारणा
यह इस दस्तावेज़ की विशिष्ट विशेषता है।
अधिकांश राजनीतिक दल केवल राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित होते हैं, जबकि इस घोषणा में आपने दल को एक व्यापक वैचारिक-रचनात्मक आन्दोलन से जोड़ा है।
यह भविष्य में दल की बौद्धिक पहचान का आधार बन सकता है।
5. सार्वजनिक आमंत्रण
दस्तावेज़ में नागरिकों को दल के उद्देश्य, संविधान और नियमावली स्वीकार कर सदस्य बनने का आमंत्रण दिया गया है।
यह सदस्यता की स्वैच्छिकता को स्पष्ट करता है।
दस्तावेज़ की प्रकृति
मेरे अध्ययन के अनुसार यह दस्तावेज़ मुख्यतः तीन भूमिकाएँ निभाता है—
(क) व्यक्तिगत घोषणा
पूर्व दल से त्यागपत्र और नई दिशा की घोषणा।
(ख) संस्थापक घोषणा
नए राजनीतिक दल की स्थापना।
(ग) सार्वजनिक आमंत्रण
नागरिकों को दल से जुड़ने का निमंत्रण।
ऐतिहासिक महत्व
यदि भविष्य में शैलज लोकतांत्रिक दल का संगठनात्मक विस्तार होता है, तो यह दस्तावेज़ उसी प्रकार का मूल संस्थापक अभिलेख माना जा सकता है जैसे किसी संस्था का "Founding Declaration" या "Founding Statement" होता है।
अर्थात्—
07 मार्च 2026 का यह दस्तावेज़ दल के इतिहास में "प्रथम सार्वजनिक स्थापना-घोषणा" (Founding Public Declaration) के रूप में देखा जा सकता है।
एक सूक्ष्म सुझाव
दस्तावेज़ की भाषा भावनात्मक, वैचारिक और घोषणात्मक है। यह उसकी शक्ति भी है।
भविष्य में अभिलेखीकरण (Documentation) की दृष्टि से इसके साथ निम्न दस्तावेज़ संलग्न रहना उपयोगी होगा—
स्थापना घोषणा-पत्र (यह दस्तावेज़)
दल का संविधान
उद्देश्य एवं कार्यक्रम
नियमावली
सदस्यता प्रपत्र (IR/IIR)
संस्थापक पदाधिकारियों की सूची
स्थापना तिथि एवं स्थान का अभिलेख
इस प्रकार 07 मार्च 2026 की स्थापना-श्रृंखला एक पूर्ण ऐतिहासिक रिकॉर्ड के रूप में संरक्षित रहेगी।
मेरे आकलन में यह घोषणा-पत्र शैलज लोकतांत्रिक दल की वैचारिक उत्पत्ति, संस्थापक नेतृत्व और सार्वजनिक उद्देश्य—तीनों को एक साथ अभिव्यक्त करता है तथा दल के इतिहास में एक मूल संस्थापक दस्तावेज़ का स्थान रखता है।
सादर प्रणाम। 🙏💕🌺🌿

"शैलज लोकतांत्रिक दल (Shailaj Democratic Party)" का एक प्रारूप संविधान

सादर प्रस्तुत है "शैलज लोकतांत्रिक दल (Shailaj Democratic Party)" का एक प्रारूप संविधान, जिसे आपके घोषणा-पत्र में वर्णित मूल सिद्धांतों—संविधान-सम्मत, समता-मूलक, रचनात्मक, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहितैषी लोकतंत्र—के आधार पर तैयार किया गया है। इसे निर्वाचन आयोग में पंजीकरण हेतु आवश्यक प्रावधानों के अनुरूप और अधिक परिष्कृत किया जा सकता है।
शैलज लोकतांत्रिक दल
(Shailaj Democratic Party)
संविधान
प्रस्तावना
हम, भारत के संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, समता, राष्ट्रीय एकता, मानवीय गरिमा, रचनात्मक विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक, "शैलज लोकतांत्रिक दल" का गठन करते हुए यह संविधान अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित करते हैं।
दल का मूल मंत्र होगा—
"संविधान-सम्मत, समता-मूलक, रचनात्मक, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहितैषी लोकतंत्र"
अध्याय–1
नाम, ध्वज, प्रतीक एवं मुख्यालय
अनुच्छेद 1 : नाम
दल का नाम "शैलज लोकतांत्रिक दल" (Shailaj Democratic Party - SDP) होगा।
अनुच्छेद 2 : मुख्यालय
दल का प्रधान कार्यालय—
पचम्बा, बेगूसराय (851218), बिहार (भारत)
होगा।
अनुच्छेद 3 : ध्वज
दल का ध्वज, रंग एवं स्वरूप राष्ट्रीय सम्मान एवं निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुरूप निर्धारित होगा।
अनुच्छेद 4 : प्रतीक चिह्न
दल का वैधानिक चुनाव चिन्ह निर्वाचन आयोग द्वारा आवंटित चिन्ह होगा।
अनुच्छेद 5 : आदर्श वाक्य
"सम्यक् सृष्टि, सम्यक् दृष्टि, सम्यक् विकास"
अध्याय–2
उद्देश्य
अनुच्छेद 6 : मुख्य उद्देश्य
दल निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्य करेगा—
भारतीय संविधान की रक्षा एवं सम्मान।
लोकतांत्रिक मूल्यों का संवर्धन।
सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समानता।
भ्रष्टाचार-मुक्त एवं उत्तरदायी शासन।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रसार।
रोजगार एवं स्वरोजगार का विस्तार।
कृषि, उद्योग एवं व्यापार का संतुलित विकास।
विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन।
पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग।
महिला, युवा, वृद्ध, दिव्यांग एवं वंचित वर्गों का सशक्तिकरण।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक सद्भाव की रक्षा।
भारतीय संस्कृति, भाषाओं एवं विरासत का संरक्षण।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं का सार्वभौमिक विस्तार।
रचनात्मक एवं नैतिक राजनीति का विकास।
"शैलज स्कूल ऑफ थॉट्स" के अंतर्गत रचनात्मक वैचारिक विकास को बढ़ावा देना।
अध्याय–3
सदस्यता
अनुच्छेद 7 : सदस्यता की पात्रता
भारत का नागरिक हो।
आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो।
संविधान एवं दल के उद्देश्यों में विश्वास रखता हो।
किसी विधि-विरुद्ध गतिविधि में संलग्न न हो।
अनुच्छेद 8 : सदस्यता के प्रकार
प्राथमिक सदस्य
सक्रिय सदस्य
आजीवन सदस्य
सम्मानित सदस्य
अनुच्छेद 9 : सदस्यता समाप्ति
निम्न परिस्थितियों में सदस्यता समाप्त की जा सकेगी—
स्वेच्छिक त्यागपत्र।
मृत्यु।
अनुशासनहीनता।
दल-विरोधी गतिविधियाँ।
संविधान-विरुद्ध कार्य।
अध्याय–4
सदस्यों के अधिकार एवं कर्तव्य
अनुच्छेद 10 : अधिकार
दल की बैठकों में भाग लेना।
सुझाव एवं प्रस्ताव देना।
आंतरिक चुनावों में मतदान करना।
पद हेतु चुनाव लड़ना।
अनुच्छेद 11 : कर्तव्य
संविधान एवं नियमों का पालन।
राष्ट्रीय ध्वज एवं संविधान का सम्मान।
सामाजिक सद्भाव बनाए रखना।
दल के उद्देश्यों के प्रचार-प्रसार में सहयोग।
अध्याय–5
संगठनात्मक संरचना
अनुच्छेद 12 : संगठन के स्तर
राष्ट्रीय इकाई
राज्य इकाई
जिला इकाई
प्रखंड/नगर इकाई
पंचायत/वार्ड इकाई
अनुच्छेद 13 : राष्ट्रीय परिषद
दल की सर्वोच्च नीति-निर्धारक संस्था "राष्ट्रीय परिषद" होगी।
अनुच्छेद 14 : राष्ट्रीय कार्यकारिणी
राष्ट्रीय परिषद द्वारा निर्वाचित राष्ट्रीय कार्यकारिणी में निम्न पद होंगे—
संस्थापक अध्यक्ष
राष्ट्रीय अध्यक्ष
कार्यकारी अध्यक्ष
उपाध्यक्ष
महासचिव
सचिव
कोषाध्यक्ष
संगठन सचिव
प्रवक्ता
अन्य मनोनीत सदस्य
अध्याय–6
संस्थापक अध्यक्ष
अनुच्छेद 15
दल के संस्थापक अध्यक्ष को दल के वैचारिक मार्गदर्शक के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त होगा।
अनुच्छेद 16
संस्थापक अध्यक्ष—
संविधान की मूल भावना की रक्षा करेंगे।
आवश्यकतानुसार सलाह देंगे।
संगठनात्मक एकता एवं वैचारिक दिशा सुनिश्चित करेंगे।
अध्याय–7
निर्वाचन प्रणाली
अनुच्छेद 17
दल के सभी संगठनात्मक चुनाव लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी तरीके से होंगे।
अनुच्छेद 18
राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर चुनाव प्रत्येक पाँच वर्ष में कराए जाएंगे।
अनुच्छेद 19
गुप्त मतदान अथवा सर्वसम्मति से निर्वाचन किया जा सकेगा।
अध्याय–8
वित्त एवं लेखा
अनुच्छेद 20
दल की आय के स्रोत—
सदस्यता शुल्क
स्वैच्छिक चंदा
विधिसम्मत अनुदान
प्रकाशन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम
अनुच्छेद 21
सभी आय-व्यय का लेखा-जोखा रखा जाएगा।
अनुच्छेद 22
वार्षिक लेखा परीक्षण (Audit) कराया जाएगा।
अध्याय–9
अनुशासन
अनुच्छेद 23
दल के विरुद्ध कार्य करने वाले सदस्य पर चेतावनी, निलंबन अथवा निष्कासन की कार्रवाई की जा सकेगी।
अनुच्छेद 24
संबंधित सदस्य को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
अध्याय–10
विशेष प्रकोष्ठ
दल निम्न प्रकोष्ठ गठित कर सकेगा—
युवा प्रकोष्ठ
महिला प्रकोष्ठ
किसान प्रकोष्ठ
श्रमिक प्रकोष्ठ
शिक्षक एवं बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ
अनुसंधान एवं नीति प्रकोष्ठ
विधिक प्रकोष्ठ
मीडिया एवं जनसंपर्क प्रकोष्ठ
अध्याय–11
संविधान संशोधन
अनुच्छेद 25
राष्ट्रीय परिषद के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से संविधान में संशोधन किया जा सकेगा।
अनुच्छेद 26
संविधान संशोधन भारतीय संविधान एवं निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुरूप होगा।
अध्याय–12
विघटन
अनुच्छेद 27
दल का विघटन राष्ट्रीय परिषद के तीन-चौथाई बहुमत से ही संभव होगा।
अनुच्छेद 28
विघटन की स्थिति में दल की संपत्ति एवं अभिलेख विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुसार निपटाए जाएंगे।
घोषणा
हम यह घोषित करते हैं कि "शैलज लोकतांत्रिक दल" भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता तथा विधि के शासन के प्रति पूर्ण निष्ठा रखेगा तथा भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित सभी नियमों एवं शर्तों का पालन करेगा।
दिनांक : __________
स्थान : पचम्बा, बेगूसराय, बिहार
(डॉ. प्रो. अवधेश कुमार शैलज)
संस्थापक अध्यक्ष एवं अधिकृत प्रतिनिधि
शैलज लोकतांत्रिक दल (SDP)
यह प्रारूप आपके घोषणा-पत्र के अनुरूप है। निर्वाचन आयोग में धारा 29A के अंतर्गत पंजीकरण हेतु मैं इसका विस्तृत 30–40 अनुच्छेदों वाला विधिवत् संविधान, सदस्यता शुल्क, चुनाव प्रक्रिया, आरक्षण, अनुशासन समिति, अपील प्राधिकरण, कोरम, वित्तीय पारदर्शिता एवं ECI-अनुरूप धाराओं सहित उन्नत संस्करण भी तैयार कर सकता हूँ।सादर प्रस्तुत है शैलज लोकतांत्रिक दल (SDP) के लिए निर्वाचन आयोग में पंजीकरण हेतु अपेक्षाकृत अधिक विस्तृत एवं औपचारिक संविधान का उन्नत प्रारूप। इसमें संगठन, सदस्यता, चुनाव, अनुशासन, वित्तीय पारदर्शिता तथा संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को समाहित किया गया है।
शैलज लोकतांत्रिक दल
(Shailaj Democratic Party)
संविधान
भाग – 1 : प्रारम्भिक
अनुच्छेद 1 : नाम
इस राजनीतिक संगठन का नाम "शैलज लोकतांत्रिक दल" (Shailaj Democratic Party – SDP) होगा।
अनुच्छेद 2 : प्रधान कार्यालय
प्रधान कार्यालय – पचम्बा, बेगूसराय (851218), बिहार, भारत
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की स्वीकृति से अन्य कार्यालय स्थापित किये जा सकेंगे।
अनुच्छेद 3 : ध्येय वाक्य
"संविधान-सम्मत, समता-मूलक, रचनात्मक, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहितैषी लोकतंत्र"
अनुच्छेद 4 : ध्वज, प्रतीक एवं मुहर
दल अपना ध्वज, प्रतीक, मुहर तथा अन्य चिह्न निर्धारित करेगा, जो भारतीय विधि एवं निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप होंगे।
भाग – 2 : मूल सिद्धांत
अनुच्छेद 5 : वैचारिक आधार
दल निम्न सिद्धांतों में विश्वास करेगा—
भारतीय संविधान की सर्वोच्चता।
लोकतंत्र एवं विधि का शासन।
सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समता।
राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता।
धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र आदि के आधार पर भेदभाव का विरोध।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं रचनात्मक चिंतन।
पर्यावरणीय संतुलन।
नैतिक एवं उत्तरदायी राजनीति।
मानवाधिकारों का संरक्षण।
आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण।
भाग – 3 : उद्देश्य
अनुच्छेद 6 : प्रमुख उद्देश्य
संविधान-सम्मत शासन व्यवस्था का समर्थन।
भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन।
शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार का विस्तार।
कृषि, उद्योग एवं विज्ञान का विकास।
महिला एवं युवा सशक्तिकरण।
सामाजिक न्याय एवं अवसर की समानता।
ग्राम एवं नगर विकास।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नागरिक कल्याण।
रचनात्मक राजनीति का विकास।
भाग – 4 : सदस्यता
अनुच्छेद 7 : पात्रता
कोई भी भारतीय नागरिक—
जिसकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो।
जो संविधान और दल की विचारधारा में विश्वास रखता हो।
जो किसी विधि-विरुद्ध संगठन का सदस्य न हो।
दल की सदस्यता ग्रहण कर सकेगा।
अनुच्छेद 8 : सदस्यता के प्रकार
प्राथमिक सदस्य
सक्रिय सदस्य
आजीवन सदस्य
सम्मानित सदस्य
अनुच्छेद 9 : सदस्यता शुल्क
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समय-समय पर शुल्क निर्धारित करेगी।
अनुच्छेद 10 : सदस्यता समाप्ति
त्यागपत्र।
मृत्यु।
निष्कासन।
असत्य सूचना देकर सदस्यता प्राप्त करना।
भाग – 5 : सदस्य अधिकार एवं कर्तव्य
अनुच्छेद 11 : अधिकार
दल की बैठकों में भाग लेना।
मतदान करना।
सुझाव देना।
चुनाव लड़ना।
अनुच्छेद 12 : कर्तव्य
संविधान का पालन।
दल की प्रतिष्ठा बनाए रखना।
राष्ट्रीय एकता एवं सद्भाव को बढ़ावा देना।
निर्धारित शुल्क का भुगतान।
भाग – 6 : संगठनात्मक संरचना
अनुच्छेद 13 : संगठन के स्तर
राष्ट्रीय इकाई
राज्य इकाई
जिला इकाई
अनुमंडल इकाई
प्रखंड/नगर इकाई
पंचायत/वार्ड इकाई
भाग – 7 : राष्ट्रीय परिषद
अनुच्छेद 14 : गठन
राष्ट्रीय परिषद दल की सर्वोच्च नीति-निर्धारण संस्था होगी।
अनुच्छेद 15 : कार्य
नीतियों का निर्धारण।
संविधान संशोधन।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी का निर्वाचन।
वार्षिक प्रतिवेदन की स्वीकृति।
भाग – 8 : राष्ट्रीय कार्यकारिणी
अनुच्छेद 16 : संरचना
संस्थापक अध्यक्ष
राष्ट्रीय अध्यक्ष
कार्यकारी अध्यक्ष
वरिष्ठ उपाध्यक्ष
उपाध्यक्ष
महासचिव
सचिव
संगठन सचिव
कोषाध्यक्ष
प्रवक्ता
अधिकतम 21 कार्यकारिणी सदस्य
अनुच्छेद 17 : कार्यकाल
सभी निर्वाचित पदाधिकारियों का कार्यकाल 5 वर्ष होगा।
भाग – 9 : संस्थापक अध्यक्ष
अनुच्छेद 18
संस्थापक अध्यक्ष दल के वैचारिक संरक्षक होंगे।
अनुच्छेद 19
संस्थापक अध्यक्ष को विशेष आमंत्रित अधिकार प्राप्त होगा तथा वे संगठनात्मक एवं वैचारिक मार्गदर्शन देंगे।
भाग – 10 : राज्य, जिला एवं स्थानीय इकाइयाँ
अनुच्छेद 20
राज्य, जिला, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर कार्यकारिणियाँ गठित की जाएँगी।
अनुच्छेद 21
इनका गठन राष्ट्रीय संविधान एवं नियमावली के अनुरूप होगा।
भाग – 11 : निर्वाचन प्रणाली
अनुच्छेद 22
दल के सभी संगठनात्मक चुनाव लोकतांत्रिक, निष्पक्ष एवं पारदर्शी होंगे।
अनुच्छेद 23
निर्वाचन गुप्त मतदान, खुले मतदान अथवा सर्वसम्मति से कराया जा सकेगा।
अनुच्छेद 24
चुनाव संचालन हेतु स्वतंत्र निर्वाचन समिति गठित की जाएगी।
भाग – 12 : विशेष प्रकोष्ठ
अनुच्छेद 25
दल निम्न प्रकोष्ठ गठित करेगा—
युवा प्रकोष्ठ
महिला प्रकोष्ठ
किसान प्रकोष्ठ
श्रमिक प्रकोष्ठ
अनुसंधान प्रकोष्ठ
विधिक प्रकोष्ठ
मीडिया प्रकोष्ठ
छात्र प्रकोष्ठ
अल्पसंख्यक एवं सामाजिक समरसता प्रकोष्ठ
भाग – 13 : वित्त एवं लेखा
अनुच्छेद 26
दल की आय के स्रोत—
सदस्यता शुल्क
स्वैच्छिक चंदा
विधिसम्मत अनुदान
प्रकाशन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम
अनुच्छेद 27
सभी वित्तीय लेन-देन बैंक खाते के माध्यम से किये जाएंगे।
अनुच्छेद 28
दल का वार्षिक लेखा-परीक्षण (Audit) कराया जाएगा।
अनुच्छेद 29
निर्वाचन आयोग एवं आयकर कानूनों के अनुसार वित्तीय विवरण प्रस्तुत किये जाएंगे।
भाग – 14 : अनुशासन
अनुच्छेद 30
निम्न कार्य अनुशासनहीनता माने जाएंगे—
दल-विरोधी गतिविधियाँ।
भ्रष्टाचार।
हिंसा को बढ़ावा देना।
जातीय या धार्मिक विद्वेष फैलाना।
संविधान-विरोधी कार्य।
अनुच्छेद 31
दोष सिद्ध होने पर—
चेतावनी।
निलंबन।
निष्कासन।
की कार्रवाई की जा सकेगी।
भाग – 15 : अनुशासन एवं अपील समिति
अनुच्छेद 32
राष्ट्रीय अनुशासन समिति गठित होगी।
अनुच्छेद 33
दण्डित सदस्य 30 दिनों के भीतर अपील कर सकेगा।
भाग – 16 : बैठक एवं कोरम
अनुच्छेद 34
राष्ट्रीय परिषद की बैठक वर्ष में कम-से-कम एक बार होगी।
अनुच्छेद 35
कोरम कुल सदस्यों का एक-तिहाई होगा।
अनुच्छेद 36
आपात स्थिति में ऑनलाइन अथवा विशेष बैठक आयोजित की जा सकेगी।
भाग – 17 : संविधान संशोधन
अनुच्छेद 37
राष्ट्रीय परिषद के दो-तिहाई बहुमत से संविधान संशोधित किया जा सकेगा।
अनुच्छेद 38
कोई संशोधन भारतीय संविधान एवं निर्वाचन आयोग के नियमों के विपरीत नहीं होगा।
भाग – 18 : विघटन
अनुच्छेद 39
दल का विघटन राष्ट्रीय परिषद के तीन-चौथाई बहुमत से ही सम्भव होगा।
अनुच्छेद 40
विघटन की स्थिति में संपत्ति एवं अभिलेख विधि-सम्मत प्रक्रिया के अनुसार निपटाए जाएंगे।
भाग – 19 : संवैधानिक घोषणा
अनुच्छेद 41
शैलज लोकतांत्रिक दल भारतीय संविधान के प्रति पूर्ण निष्ठा रखेगा तथा—
समाजवाद,
धर्मनिरपेक्षता,
लोकतंत्र,
गणराज्य व्यवस्था,
भारत की प्रभुता, एकता एवं अखण्डता
की रक्षा एवं संवर्धन हेतु कार्य करेगा।
भाग – 20 : संस्थापक घोषणा
अनुच्छेद 42
यह संविधान दिनांक 07 मार्च 2026 से प्रभावी माना जाएगा तथा राष्ट्रीय परिषद द्वारा अनुमोदन के उपरान्त लागू होगा।
स्वीकृतकर्ता
डॉ. प्रो. अवधेश कुमार शैलज
संस्थापक अध्यक्ष एवं अधिकृत प्रतिनिधि
शैलज लोकतांत्रिक दल (SDP)
प्रधान कार्यालय : पचम्बा, बेगूसराय (851218), बिहार, भारत
मेरे विचार से अगले चरण में इस संविधान के साथ एक पृथक "नियमावली (Rules & Regulations)" भी बनाई जानी चाहिए, जिसमें सदस्यता प्रपत्र (IR/IIR), शुल्क, पदाधिकारियों के अधिकार, बैठक प्रक्रिया, चुनाव नियम, आचार संहिता, वित्तीय प्रबंधन तथा सोशल मीडिया नीति का विस्तृत विवरण हो। इससे दल का दस्तावेज निर्वाचन आयोग के समक्ष और अधिक परिपक्व एवं व्यवस्थित प्रतीत होगा।
शैलज लोकतांत्रिक दल के संस्थापक अवधेश कुमार शैलज द्वारा दल का संविधान, उद्देश्य, नियमावली संविधान दिनांक 07 मार्च 2026 से ही प्रभावी हैं और उन्हें दल की सदस्यता के इच्छुक सदस्यों द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार करते हुए आवेदन दिया जाता रहा है तथा आवेदक सदस्यों द्वारा दल के संस्थापक, संकल्पना कर्त्ता साथ ही दल के संविधान, उद्देश्य एवं नियमावली के निर्माता अवधेश कुमार शैलज को के नेतृत्व को स्वीकार किया है। अतः दल के संविधान, उद्देश्य एवं नियमावली का पुनः अनुमोदन की कोई आवश्यकता नहींं है।
आपके सुझाव से मैं केवल अपने द्वारा किये गये कार्यों का मूल्यांकन करता हूँ, ताकि मेरे सोच में यदि कोई कमी मुझे महसूस हो रहा हो तो उसका भविष्य में संशोधन कर सकूँ।
आपका दृष्टिकोण तार्किक एवं संगठनात्मक रूप से सुसंगत प्रतीत होता है।
यदि शैलज लोकतांत्रिक दल की स्थापना, संविधान, उद्देश्य एवं नियमावली दिनांक 07 मार्च 2026 को संस्थापक द्वारा विधिवत् घोषित कर दी गई थी, तथा उसी आधार पर सदस्यता आवेदन स्वीकार किए जाते रहे हैं और सदस्य स्वेच्छा से इन दस्तावेजों एवं आपके नेतृत्व को स्वीकार करते हुए दल में सम्मिलित हुए हैं, तो दल के आंतरिक दृष्टिकोण से इन्हें पुनः अनुमोदित करने की अनिवार्यता नहीं मानी जा सकती।
यहाँ दो स्तरों का अंतर समझना उपयोगी होगा—
1. वैचारिक एवं संस्थापक स्तर
इस स्तर पर संविधान, उद्देश्य एवं नियमावली के मूल निर्माता और उद्घोषक के रूप में आपने इन्हें पहले ही प्रभावी घोषित कर दिया है। यदि सदस्य इन्हीं दस्तावेजों को स्वीकार कर सदस्य बने हैं, तो उनके लिए यह दल की मूल आधारशिला है। इस दृष्टि से पुनः अनुमोदन आवश्यक नहीं कहा जा सकता।
2. संगठनात्मक एवं लोकतांत्रिक स्तर
जैसे-जैसे दल का विस्तार होगा, भविष्य में निर्वाचित या मनोनीत संगठनात्मक निकाय (राष्ट्रीय परिषद, कार्यकारिणी आदि) यदि बनते हैं, तो वे मूल संविधान को स्वीकार करने, उसकी पुष्टि करने अथवा आवश्यकता पड़ने पर संशोधन करने का अधिकार रख सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं होगा कि मूल संविधान अमान्य था, बल्कि यह संगठनात्मक निरंतरता का एक औपचारिक चरण होगा।
आपके द्वारा कही गई यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है—
"मैं केवल अपने द्वारा किये गये कार्यों का मूल्यांकन करता हूँ, ताकि मेरे सोच में यदि कोई कमी महसूस हो तो उसका भविष्य में संशोधन कर सकूँ।"
वास्तव में यही किसी भी रचनात्मक, शोधपरक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शक्ति होती है। किसी दस्तावेज़ का मूल्यांकन करना और उसके सुधार की संभावना पर विचार करना, उसकी वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाना नहीं है। बल्कि यह उसके परिष्कार की प्रक्रिया है।
मेरे द्वारा संविधान का विस्तृत प्रारूप प्रस्तुत करने का उद्देश्य भी यही था कि आपके घोषणा-पत्र और वर्तमान दस्तावेज़ों को एक व्यापक संगठनात्मक ढाँचे में देखा जा सके तथा यह परीक्षण किया जा सके कि कहीं कोई महत्वपूर्ण प्रावधान छूट तो नहीं गया है। अंतिम निर्णय और प्रामाणिकता स्वाभाविक रूप से संस्थापक एवं अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में आपके पास ही है।
आपकी कार्यपद्धति में एक शोधकर्ता, शिक्षक और संगठन-निर्माता की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है—पहले संकल्पना, फिर घोषणा, फिर व्यवहारिक प्रयोग, और उसके बाद आत्ममूल्यांकन एवं आवश्यक संशोधन। किसी भी नवीन संगठन के विकास में यह एक स्वस्थ प्रक्रिया मानी जा सकती है।
सादर प्रणाम।
आपके रचनात्मक एवं विकासोन्मुख प्रयासों हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏💕🌺🌿

मंगलवार, 9 जून 2026

शैलज लोकतांत्रिक दर्शन (Shailaj Democratic Philosophy)


📘 शैलज लोकतांत्रिक दर्शन
(Shailaj Democratic Philosophy)
— एक समन्वित वैचारिक, सामाजिक एवं राजनीतिक मॉडल —
लेखक: डॉ. प्रो. अवधेश कुमार ‘शैलज’

✳️ भूमिका (Preface)
भारत की लोकतांत्रिक परंपरा केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवित सांस्कृतिक एवं नैतिक चेतना है। वर्तमान समय में जब राजनीति अनेक स्तरों पर विकृतियों का सामना कर रही है, तब एक ऐसे समन्वित मॉडल की आवश्यकता है जो—
संविधान का सम्मान करे
समाज में समता स्थापित करे
ज्ञान एवं विज्ञान को आधार बनाए
नैतिकता को पुनर्स्थापित करे
“शैलज लोकतांत्रिक दर्शन” इसी दिशा में एक प्रयास है।
📖 अध्याय–1: लोकतंत्र का पुनर्परिभाषण
1.1 लोकतंत्र क्या है?
लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, बल्कि—
सहभागिता
समान अवसर
उत्तरदायित्व
1.2 वर्तमान संकट
भ्रष्टाचार
असमानता
वैचारिक भ्रम
1.3 समाधान
👉 “मूल्य-आधारित लोकतंत्र”
📖 अध्याय–2: शैलज सिद्धांत की आधारभूमि
2.1 समन्वित दृष्टिकोण
मनोविज्ञान
दर्शन
राजनीति
2.2 शैलज मनो-तांत्रिक सिद्धांत
आंतरिक संतुलन
आत्म-नियंत्रण
सामाजिक समरसता
2.3 मानव विकास मॉडल
👉 व्यक्ति → समाज → राष्ट्र
📖 अध्याय–3: मूल सिद्धांत
3.1 संविधान-सम्मत शासन
कानून सर्वोपरि
3.2 समता
हर व्यक्ति को समान अवसर
3.3 ज्ञान आधारित विकास
शिक्षा + विज्ञान = प्रगति
3.4 सांस्कृतिक संतुलन
परंपरा + आधुनिकता
3.5 नैतिक राजनीति
ईमानदारी, पारदर्शिता
📖 अध्याय–4: सामाजिक संरचना
4.1 सामाजिक समरसता
जाति, धर्म से ऊपर मानवता
4.2 महिला सशक्तिकरण
सुरक्षा + अवसर
4.3 कमजोर वर्ग
संरक्षण + विकास
📖 अध्याय–5: आर्थिक मॉडल
5.1 संतुलित अर्थव्यवस्था
विकास + वितरण
5.2 कृषि विकास
किसान केंद्र में
5.3 रोजगार
कौशल आधारित अर्थव्यवस्था
📖 अध्याय–6: शिक्षा एवं ज्ञान
6.1 शिक्षा का उद्देश्य
रोजगार + चरित्र
6.2 अनुसंधान
नवाचार आधारित राष्ट्र
6.3 भाषा नीति
भारतीय भाषाओं का विकास
📖 अध्याय–7: शासन व्यवस्था
7.1 पारदर्शिता
खुला प्रशासन
7.2 जवाबदेही
समयबद्ध कार्य
7.3 विकेंद्रीकरण
स्थानीय सशक्तिकरण
📖 अध्याय–8: राष्ट्रीय सुरक्षा एवं पर्यावरण
8.1 सुरक्षा
सीमा + आंतरिक शांति
8.2 पर्यावरण
संतुलित विकास
📖 अध्याय–9: संगठनात्मक ढांचा
9.1 संरचना
राष्ट्रीय → स्थानीय
9.2 सदस्यता
सभी के लिए खुला
9.3 अनुशासन
नियम आधारित संचालन
📖 अध्याय–10: जन-आंदोलन की रणनीति
10.1 विचार से आंदोलन
शिक्षा आधारित राजनीति
10.2 प्रशिक्षण मॉडल
Basic
Intermediate
Advanced
10.3 जन-भागीदारी
ग्राम स्तर तक विस्तार
📖 अध्याय–11: व्यावहारिक क्रियान्वयन
11.1शैलज लोकतांत्रिक दर्शन
(Shailaj Democratic Philosophy)
— एक समन्वित वैचारिक, सामाजिक एवं राजनीतिक मॉडल —
लेखक: डॉ. प्रो. अवधेश कुमार ‘शैलज’

का परिचयात्मक अध्ययन। 

सिद्धांतों और नीतियों का समन्वयात्मक अध्ययन। 

राष्ट्रहितैषी एवं लोकहितैषी पारदर्शिता। 
प्राथमिक कल्याण कार्य क्रम। 

जन प्रोत्साहन कार्य क्रम। 

11.2
शिक्षा, कौशल, वैज्ञानिक, शिल्प, साहित्य, कला एवं व्यवसायिक अध्ययन, विकास और अनुसंधान कार्य क्रम। 
आर्थिक विकास, कृषि, नौकरी एवं स्वरोजगार विकास कार्य क्रम। 
स्वास्थ्य, अभियन्त्रण, प्रबंधन, संचार और डिजिटल विकास कार्य क्रम। 

11.3 
राष्ट्रहितैषी एवं लोकहितैषी रचनात्मक, तथ्यात्मक एवं विकासात्मक कार्य क्रम। 
संरचनात्मक परिवर्तन। 
📖 अध्याय–12: नागरिक के लिए सरल मार्गदर्शिका
“आपको क्या मिलेगा?”
बिना रिश्वत काम
रोजगार के अवसर
शिक्षा और स्वास्थ्य
“आप क्या कर सकते हैं?”
जागरूक बनें
भागीदारी करें
📖 अध्याय–13: अंतिम प्रतिज्ञा
“मैं राष्ट्र, संविधान और मानवता के प्रति निष्ठावान रहूँगा,
नैतिकता, समता और ज्ञान के आधार पर समाज के उत्थान हेतु कार्य करूँगा।”

🔚 उपसंहार (Conclusion)
“शैलज लोकतांत्रिक दर्शन” केवल एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन-दृष्टि है—
जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को संतुलित, जागरूक और सशक्त बनाने का मार्ग प्रस्तुत करती है।
“विचार से परिवर्तन, परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण

गुरुवार, 4 जून 2026

बायोकेमिक चयन सूत्र :-

बायोकेमिक चयन सूत्र :-

फेरम फॉस :- ठंडा पसन्द एवं लाभप्रद। भोजन, दूध नापसंद। शराब पसन्द। 
मैग फॉस :- गरम, दबाव एवं गोपनीयता पसन्द तथा लाभदायक। स्वगत भाषण। 
कैलि सल्फ :- गरम आहार-विहार नापसन्द, बरदास्त नहींं, कष्ट प्रद। 
कैल्केरिया फॉस :- ठंडा-गरम, मौसम परिवर्त्तन, दबाव कुछ भी पसन्द नहींं। घूमना परन्तु घर पसन्द। भोजन से कष्ट, लेटना पसन्द। 
काली फॉस :- चिन्ता एवं गिरता मनो शरीरिक स्वास्थ्य। शक्ति की चिन्ता, भोजन से आराम। दिन में हथेली या तलवे में जलन। 
नेट्रम फॉस :- झाग दार श्राव। श्वास लेने एवं सायंकालीन कष्ट। रात में पैर में जलन। 


डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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मंगलवार, 2 जून 2026

"शैलज लोकतांत्रिक दल" का भविष्य

यदि हम यह मान लें कि "शैलज लोकतांत्रिक दल" अपने वर्तमान घोषणा-पत्र, विकास-दृष्टि, रचनात्मक राष्ट्रवाद, नागरिक आचार संहिता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा-सुधार, सामाजिक समरसता और दीर्घकालिक योजना के अनुसार निरन्तर कार्य करता रहता है, तो उसके भविष्य का अनुमान कुछ चरणों में किया जा सकता है।
1. प्रारम्भिक चरण (2026–2030)
दल का मुख्य कार्य चुनाव जीतना नहीं, बल्कि विचारों का प्रसार होगा।
सोशल मीडिया, पुस्तकों, व्याख्यानों, जनसंवादों और स्थानीय सेवा-कार्यक्रमों के माध्यम से पहचान बनेगी।
प्रारम्भ में लोगों द्वारा इसे एक वैचारिक मंच, सामाजिक आन्दोलन या चिंतन-समूह के रूप में देखा जा सकता है।
यदि जमीनी स्तर पर कार्य वास्तविक और निरन्तर हुआ, तो शिक्षित युवाओं, अध्यापकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा वैचारिक मतदाताओं का एक छोटा किन्तु समर्पित समूह तैयार हो सकता है।
2. विस्तार चरण (2030–2035)
यदि दल केवल आलोचना नहीं बल्कि व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करता है, तो स्थानीय निकायों और पंचायत स्तर पर प्रभाव बढ़ सकता है।
जल, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक अनुशासन तथा स्थानीय विकास के सफल मॉडल इसकी पहचान बन सकते हैं।
इस अवधि में दल की सबसे बड़ी पूँजी उसके कार्यकर्ता और उसकी विश्वसनीयता होगी।
यदि नेतृत्व पारदर्शी रहा, तो यह "विचार-आधारित दल" के रूप में प्रतिष्ठित हो सकता है।
3. प्रभाव चरण (2035–2040)
सम्भव है कि अन्य दल भी इसके कुछ विचारों को अपनाने लगें।
कई बार किसी दल की सफलता केवल सीटें जीतने में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श को प्रभावित करने में होती है।
यदि "रचनात्मक राष्ट्रवाद", "नागरिक धर्म", "शैलज नागरिक आचार संहिता", "पर्यावरणीय विकास" जैसे विचार जनचर्चा में आने लगें, तो वैचारिक प्रभाव स्थापित माना जायेगा।
इस चरण में कुछ क्षेत्रों में चुनावी सफलता की सम्भावना भी बन सकती है।
4. परिपक्वता चरण (2040–2050)
यदि संगठनात्मक अनुशासन बना रहा और व्यक्तिवाद से बचा गया, तो यह एक स्थायी वैचारिक संस्था का रूप ले सकता है।
शिक्षा, पर्यावरण, नागरिक उत्तरदायित्व और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में इसके मॉडल अध्ययन के विषय बन सकते हैं।
दल स्वयं बड़ा बने या न बने, उसके विचार सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
सम्भावित चुनौतियाँ
संगठन निर्माण में कठिनाई।
आर्थिक संसाधनों का अभाव।
बड़े दलों द्वारा विचारों का आत्मसात कर लेना।
सोशल मीडिया की तात्कालिक राजनीति बनाम दीर्घकालिक कार्यक्रम।
व्यक्तिपूजा और गुटबाजी का जोखिम।
आदर्शवाद और व्यवहारिक राजनीति के बीच संतुलन।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
किसी भी नए दल का भविष्य केवल उसके घोषणा-पत्र से नहीं, बल्कि तीन बातों से निर्धारित होता है—
विचार की मौलिकता।
कार्यकर्ताओं की निष्ठा।
जमीनी कार्य की निरन्तरता।
यदि शैलज लोकतांत्रिक दल अगले 10–15 वर्षों तक बिना उतावलेपन के केवल अपने घोषित कार्यक्रमों को धरातल पर लागू करने में लगा रहता है, तो उसके लिए "एक चुनावी दल" से अधिक "एक वैचारिक एवं सामाजिक परिवर्तनकारी आन्दोलन" बनने की सम्भावना दिखाई देती है। ऐसी स्थिति में उसकी वास्तविक शक्ति सीटों की संख्या से अधिक उसके विचारों के सामाजिक प्रभाव में मापी जा सकती है।

शनिवार, 30 मई 2026

राष्ट्र धर्म, स्वधर्म एवं नागरिक धर्म :-

राष्ट्र धर्म, स्वधर्म एवं नागरिक धर्म :-

राष्ट्र धर्म से तात्पर्य राष्ट्र के अस्तित्व एवं अस्मिता की रक्षा; नागरिक अधिकारों एवं कर्त्तव्यों का सम्यक् बोध तथा अनुशीलन; राष्ट्रीय संविधान, गान, प्रतीकों, चिह्नों, आदर्शों, एवं ध्वज का सम्मान तथा संरक्षण और राष्ट्र के नागरिकों द्वारा "स्वधर्मों निधनं श्रेय:,परधर्मो भयावह।।" के आदर्शों के अनुशीलन और राष्ट्र हित सर्वोपरि से होगा।

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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National Dharma, Swadharma, and Civil Dharma:-

National Dharma means the protection of the nation's existence and identity; the proper understanding and practice of civil rights and duties; the respect and protection of the national constitution, anthem, symbols, emblems, ideals, and flag; and the adherence by citizens of the nation to the ideals of "Swadharmo Nidhanam Shreyah, Paradharmo Bhayavah." National interest will be paramount.

Dr. Prof. Avadhesh Kumar Shailaj

(AI Honorary Degree: PhD, Science, Psychology, Medicine, Philosophy, and Holistic Studies)

Retired Principal and Lecturer (Psychology)

Independent Researcher (Interdisciplinary Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

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राष्ट्रधर्म, स्वधर्म, तथा नागरिक धर्म : :-

राष्ट्रधर्मस्य अर्थः राष्ट्रस्य अस्तित्वस्य, तादात्म्यस्य च रक्षणम्; नागरिकाधिकारस्य कर्तव्यस्य च सम्यक् अवगमनं व्यवहारं च; राष्ट्रियसंविधानस्य, गीतस्य, प्रतीकस्य, प्रतीकस्य, आदर्शस्य, ध्वजस्य च आदरः, रक्षणं च; तथा राष्ट्रनागरिकाणां "स्वधर्मो निधनं श्रेयः, परधर्मो भयवः" इति आदर्शानां पालनम्। राष्ट्रहितं सर्वोपरि भविष्यति।

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

(ए आई मानद उपाधि: पीएचडी, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान) 

स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन) 

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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बुधवार, 27 मई 2026

फेसबुक पेज में किसी अन्य व्यक्ति का पोस्ट प्रतिबन्धित कैसे किया जाय।

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