📜 स्थापना-घोषणा-पत्र
शैलज लोकतांत्रिक दल
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मैं,
डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज,
पुत्र – स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह,
निवासी – ग्राम पचम्बा,
पो० – सुहृद नगर (851218),
जिला – बेगूसराय,
राज्य – बिहार (भारत),
यह विधिवत घोषणा करता हूँ कि वर्तमान राष्ट्रीय एवं सामाजिक परिस्थितियों, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, संवैधानिक आदर्शों की प्रतिष्ठा तथा जन-उत्तरदायी शासन व्यवस्था की स्थापना के उद्देश्य से एक स्वतंत्र राजनीतिक संगठन के रूप में “शैलज लोकतांत्रिक दल” की स्थापना की जाती है।
1️⃣ स्थापना की औपचारिक उद्घोषणा :
आज दिनांक __________ को, पूर्ण चेतना एवं वैधानिक अधिकार के साथ, मैं “शैलज लोकतांत्रिक दल” की स्थापना की घोषणा करता हूँ।
यह दल भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुरूप लोकतांत्रिक, समतामूलक एवं रचनात्मक शासन प्रणाली के संवर्धन हेतु समर्पित रहेगा।
2️⃣ संकल्पना एवं वैचारिक आधार :
“शैलज लोकतांत्रिक दल” की संकल्पना निम्न मूल सिद्धांतों पर आधारित है—
संविधान सर्वोपरि। नागरिक-धर्म आधारित लोकतंत्र। समता एवं सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता। "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।। ", "अग्रत: सकलं शास्त्रं, पृष्ठत: सशरं धनु:। "
भारत के सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण। नागरिकों की बौद्धिक संपदा की सुरक्षा एवं सम्वर्धन में उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करना।
बाल, वृद्ध एवं युवा सभी नर-नारियों के प्रति सम्यक्, निष्पक्ष, योग्यता आधारित, पूर्वाग्रह रहित और यथोचित व्यवहार करना।
सरकारी, अर्द्ध-सरकारी विभागों, उपक्रमों, प्रतिष्ठानों, संस्थाओं या संस्थानों को अपना-अपना दायित्व बोध।
सम्यक्, निष्पक्ष, निर्दोष, स्पष्ट, दबाव रहित, सन्तुलित एवं पूर्वाग्रह रहित न्याय।
सत्ता-पक्ष या विपक्ष के जनप्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रहित एवं नागरिक हित में अपने दायित्व एवं अधिकार सीमा का बोध।
बुद्धि जीवियों एवं श्रम जीवियों को यथोचित सम्मान।
समाजिक कार्यकर्ताओं, नागरिकों एवं प्रशासन से सम्बंधित शक्तियों के मध्य सम्मान, सहयोग और रचनात्मक सम्बन्ध बोध।
आत्मोन्नति, आत्मनिर्भरता, कौशल विकास एवं स्वस्थ पारस्परिक संबंध।
योग्यता की समता एवं प्रथमिकता।
विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका एवं प्रशासनिक शक्तियों का अपना-अपना संवैधानिक सीमा बोध।
नैतिक एवं उत्तरदायी नेतृत्व।
समृद्ध, सुरक्षित, आदर्श, उत्कृष्ट, व्यवहारिक, ज्ञान-विज्ञान सम्पन्न, आत्मनिर्भर, रचनात्मक एवं विकासात्मक राष्ट्र-निर्माण।
3️⃣ उद्देश्य निर्धारण :
दल के प्रमुख उद्देश्य निम्न होंगे—
भारतीय संविधान के आदर्शों की रक्षा एवं संवर्धन।
विधि के शासन (Rule of Law) की स्थापना। राष्ट्रहित एवं नागरिक हित में योग्यता की प्राथमिकता, निष्पक्षता एवं पूर्वाग्रह मुक्त व्यवस्था।
भ्रष्टाचार-मुक्त एवं पारदर्शी प्रशासन
शिक्षा, स्वास्थ्य, आध्यात्मिक ज्ञान, औद्योगिक विकास, आवश्यक संसाधन, अनुसंधान, कला-संस्कृति, कृषि, वन, पशुपालन, व्यवहारिकता एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा।
सामाजिक-सांस्कृतिक सद्भाव एवं राष्ट्रीय एकता।
4️⃣ संविधान एवं नियमावली निर्माण :
मैं यह भी उद्घोषित करता हूँ कि—
दल का संविधान एवं नियमावली विधिसम्मत रूप से निर्मित की गई है;
संविधान में आंतरिक लोकतंत्र, सदस्यता प्रावधान, वित्तीय पारदर्शिता, अनुशासन तंत्र एवं पदाधिकारियों के निर्वाचन की स्पष्ट व्यवस्था की गई है;
दल लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण साधनों से ही अपने उद्देश्यों की प्राप्ति करेगा।
5️⃣ संवैधानिक निष्ठा की प्रतिज्ञा:
“शैलज लोकतांत्रिक दल” यह प्रतिज्ञा करता है कि—
भारत की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता की रक्षा करेगा;
लोकतंत्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता एवं गणतंत्रवाद के सिद्धांतों का पालन करेगा;
किसी भी प्रकार की विधि-विरुद्ध या विभाजनकारी गतिविधि का समर्थन नहीं करेगा।
6️⃣ नैतिक उद्घोष :
राजनीति को सत्ता-प्राप्ति का माध्यम न मानकर जन-सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण का साधन माना जाएगा।
दल का मूल मंत्र होगा:
“संविधान-सम्मत, समता-मूलक, रचनात्मक एवं राष्ट्रहितैषी लोकतंत्र”
7️⃣ नागरिकों से आह्वान:
मैं देश के जागरूक नागरिकों से आह्वान करता हूँ कि—
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु संगठित हों;
रचनात्मक राजनीति का समर्थन करें;
राष्ट्रीय समृद्धि एवं सामाजिक सद्भाव के निर्माण में सहभागी बनें।
8️⃣ अंतिम घोषणा:
यह घोषणा-पत्र सार्वजनिक अभिलेख हेतु जारी किया जाता है तथा विधिसम्मत प्रक्रिया के अंतर्गत संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
दिनांक: ____________
स्थान: पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
(हस्ताक्षर)
डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज
संस्थापक, संकल्पना कर्त्ता,
उद्देश्य निर्धारक एवं संविधान-निर्माता
शैलज लोकतांत्रिक दल
(आधिकारिक मुहर)
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