महात्मा हैनीमैन कहते हैं कि रोगी की चिकित्सा उसके पूर्वजों के में भी जानकारी लेकर करनी चाहिए, परन्तु आधुनिक समय में तो वे किशोर किशोरियाँ जिनको अभी अपने और संसार को समझने का होश भी नहीं हुआ है, वे भी अपने माता पिता, भाई बन्धु, अभिभावक गण को प्रायः Out dated घोषित कर रहे हैं या उनका नाम भी नहीं बता पाते हैं और उनकी मृत्यु के बाद वे अब स्वर्गीय नहीं होकर स्मृति- शेष हो चुके होते हैं। ऐसी परिस्थिति में रोगी आनुवंशिक इतिहास की जनकारी प्राप्त करना अत्यंत कठिन हो गया है।
बहुत ऐसे रोगी होते हैं जो सक्षम होते हुए भी अपने लक्षणों को नहीं बता पाते हैं या नहीं बताना चाहते हैं।
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