बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

प्रकाश पिंड या श्रोत के दर्शन या प्रेक्षण का शैलज सिद्धांत (Shailaj's theory of viewing / observing light body or source) : --

बुधवार, 13 अगस्त 2025
प्रकाश पिंड या श्रोत के दर्शन या प्रेक्षण का शैलज सिद्धांत :-

"प्रकाश का अपने मूल श्रोत से चल कर किसी खास स्थान या प्रेक्षक तक पहुँचने पर उक्त दूरी पर उपस्थित द्रष्टा या प्रेक्षक या संसाधन द्वारा प्रेक्षण हमेशा अहर्निश कालान्तर तक किया जा सकता है, चाहे वह प्रकाश पिंड या श्रोत किसी भी दिशा और दूरी तक कितना भी स्थानांतरित हो गया हो, यदि प्रकाश के माध्यम में और / या प्रकाश श्रोत एवं प्रकाश से प्रभावित क्षेत्र या प्रेक्षक के मध्य कोई व्यवधान उपस्थित नहीं हुआ हो, लेकिन प्रकाश पिंड या श्रोत का अस्तित्व जब तक समाप्त नहीं हो जाता है, तब तक उसकी तीव्रता के अनुपात में प्रकाश पिंड या श्रोत का प्रेक्षक की दृष्टि क्षमता के आलोक में स्थूल या सूक्ष्म रूप में अवलोकन किया जा सकता है।"

Shailaj's theory of viewing / observing light body or source: -

"Light travelling from its original source and reaching a particular place or observer can always be observed day and night by the viewer or observer or resource present at the said distance, no matter how much the light object or source has moved in any direction and distance, if there is no obstruction in the medium of light and/or between the light source and the area affected by light or the observer, but till the existence of the light object or source does not cease, the light object or source can be observed in gross or microscopic form in proportion to its intensity in the light of the vision capability of the observer."

इस सिद्धांत का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करते हुए विस्तृत व्याख्या की जाय। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)

स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।


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