मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

Shailaj’s QRIT (Qualitative Relational Impact Theory of Shailaj / QRITS) के सन्दर्भ में घोषणा:

Shailaj’s QRIT (Qualitative Relational Impact Theory of Shailaj / QRITS) के सन्दर्भ में घोषणा:
 1: Shailaj’s QRIT (Qualitative Relational Impact Theory of Shailaj / QRITS) 
"किन्हीं दो या दो से अधिक कणों या पिंडों में से एक कण या पिंड की अपेक्षा दूसरे कण या पिंड मेंं कम या अधिक गतिमानता की स्थिति रहने या पैदा होने पर स्थिर और / या गतिमान कण या पिंड अपनी-अपनी गुणवाचकता एवं वस्तुवाचकता और / या अपने-अपने घनत्व, गुरुत्व, विस्तार और / या गति प्रभाव के कारण एक दूसरे को प्रभावित करते हैं, जिसका प्रभाव उस वातावरण में गौण (सूक्ष्म) या प्रत्यक्ष (स्थूल) रूप में दृष्टि गोचर होता है।"
यह सूत्र भौतिकी सार्वत्रिक सिद्धांत (Unified Physical Principle) है, जो पदार्थ की गुणात्मकता, गतिशीलता, घनत्व, विस्तार, गुरुत्व तथा परस्पर प्रभावशीलता को एक सूत्र में बाँधता है।
2:  Shailaj’s QRIT सिद्धांत का संक्षिप्त स्वरूप :
Shailaj’s QRIT (Qualitative Relational Impact Theory of Shailaj / QRITS) :
जब दो या अधिक पिंड भिन्न गतिशीलताओं या स्थितियों में होते हैं, तो वे अपने-अपने गुणों के आधार पर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, और यह प्रभाव उस क्षेत्र (वातावरण) में सूक्ष्म या स्थूल रूप में प्रकट होता है।
मुख्य तत्व:
• गुणवाचकता (Qualitativeness)
• वस्तुवाचकता (Substantiality)
• गतिशीलता / स्थिरता (Kinetics / Statics)
• प्रभावशीलता (Impact)
• माध्यम में प्रभाव (Environmental Influence)
क्रम 3: QRIT का भौतिकी में स्थान
QRIT सिद्धांत पदार्थ और ऊर्जा के पारस्परिक प्रभावों को केवल संख्यात्मक नहीं, अपितु गुणात्मक संदर्भों में भी प्रस्तुत करता है। यह स्थूल-भौतिक घटनाओं के साथ-साथ सूक्ष्म-स्तरीय घटनाओं (quantum या etheric स्तर पर) की व्याख्या में सहायक है।
संभावित अनुप्रयोग:
• द्रव्य-गतिकी (Fluid dynamics)
• गुरुत्वीय प्रभाव (Gravitational effect)
• सूक्ष्म कणों की अन्तरक्रिया (Subatomic interaction)
• मनः-भौतिक प्रभाव (Psycho-physical influence)
 
 4: तुलनात्मक अध्ययन
तत्व / सिद्धांत : न्यूटन का गति नियम आइंस्टीन का सापेक्षता सिद्धांत क्वांटम सिद्धांत Shailaj QRIT सिद्धांत
गति की धारणा स्थूल गति और बल के परिप्रेक्ष्य में समय-स्थान में सापेक्ष गति अनिश्चितता और प्रायिकता गुणात्मक गतिशीलता एवं सापेक्ष स्थिति
बल की परिभाषा द्रव्यमान × त्वरण ऊर्जा-स्थान-समय समन्वय कण-तरंग द्वैत गुरुत्व, घनत्व, विस्तार और गुण के संयुक्त प्रभाव
प्रभाव की प्रकृति प्रत्यक्ष (Direct) सापेक्ष (Relativistic) प्रायिक (Probabilistic) गुणात्मक-सापेक्ष एवं सूक्ष्म/स्थूल प्रभाव
माध्यम निरपेक्ष या निर्वात वक्रित समय-स्थान क्वांटम क्षेत्र प्रभाव-क्षेत्र (Impact Environment)
 
 5: Shailaj QRIT की उपयोगिता एवं संभावनाएँ :
Shailaj QRIT सिद्धांत विज्ञान की निम्न शाखाओं में नवीन दृष्टिकोण प्रदान करता है:
1. प्राकृतिक दर्शन: पदार्थ और चेतना के अंतर्सम्बंध को एक ही सिद्धांत में समझने की क्षमता।
2. पारंपरिक ऊर्जा चिकित्सा: जैविक शरीर में ऊर्जा और पदार्थ की सूक्ष्म पारस्परिक क्रियाओं की व्याख्या।
3. जैवभौतिकी (Biophysics): कोशिकीय स्तर पर गुणात्मक एवं घनत्वीय प्रभावों का अध्ययन।
4. चेतनातत्त्व-अध्ययन (Consciousness Studies): मानसिक ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के मध्य संबंध।
 
 6: Shailaj QRIT ( Shailaj Qualitative Relational Impact Theory) की विशिष्टता एवं अनुप्रयोग की शर्तें :-
 Shailaj QRIT सिद्धांत एक समग्र भौतिक दृष्टिकोण का प्रतिपादन करता है, जो गुण, घनत्व, गुरुत्व, गति एवं प्रभाव के पारस्परिक समीकरण पर आधारित है। यह पारंपरिक सिद्धांतों के सीमितताओं को गुणात्मक विश्लेषण द्वारा पूर्ण कर सकता है। 
Shailaj QRIT सिद्धांत अपने गहन गणितीय सैद्धान्तिक सूत्रों, प्रयोगात्मक प्रमाणों और प्रायोगिक मापन के माध्यम से अन्य सिद्धांतों के समान ही  भौतिकी के महत्वपूर्ण सिद्धांत के रूप में निकट भविष्य में प्रतिष्ठित होगा, जो पाठकों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और / या उपयोगकर्ताओं के निष्पक्ष एवं पूर्वाग्रह रहित अध्ययन, प्रयोग, सोच एवं उपयोग पर निर्भर करेगा और इसके लिये “शैलज साहित्य का अध्ययन एवं इसके अनुप्रयोग के शर्तों का अनुशीलन” अपेक्षित रहेगा। 
Shailaj QRIT ( Shailaj Qualitative Relational Impact Theory) जिसे संक्षिप्त रूप में SQRIT  और/या QRITS नाम से जाना जायेगा, जो वास्तव में वर्तमान भौतिकी के संकीर्ण द्वैत को अतिक्रमित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण वैकल्पिक सोच प्रस्तुत करता है।
 
क्रम 7: संदर्भ ग्रंथ एवं शोध श्रोत
1. न्यूटन, आइज़ैक – Philosophiæ Naturalis Principia Mathematica (1687)
2. आइंस्टीन, अल्बर्ट – Relativity: The Special and General Theory (1916)
3. हाइजेनबर्ग, वर्नर – Physics and Philosophy: The Revolution in Modern Science (1958)
4. बोहम, डेविड – Wholeness and the Implicate Order (1980)
5. Capra, Fritjof – The Tao of Physics (1975)
6. Schauberger, Viktor – Nature as Teacher (2000)
7. शंकराचार्य – विवेकचूडामणि एवं ब्रह्मसूत्र भाष्य (गुण-गति दृष्टिकोण के संदर्भ में)
8. Awadhesh Kumar Shailaj (डॉ० प्रो० अवधेश कुमार 'शैलेज') – प्रज्ञा-सूक्तम्, सर्व-कल्याणकारी भौतिक सूत्रावली तथा Shailaj QRIT ( Shailaj Qualitative Relational Impact Theory / SQRIT / QRITS) विचार का मूल स्रोत। 
9. Journal of Consciousness Studies, Volume 7–14 (वैकल्पिक भौतिकी एवं चेतना)
10. Indian Journal of Theoretical Physics – विभिन्न लेख, जो पारंपरिक और परावैज्ञानिक भौतिकी पर केंद्रित हैं।
 डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज
(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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