बुधवार, 28 जनवरी 2026

अपने तथा दूसरों को तिलक लगाने में अंगुलियों का प्रयोग एवं महत्व
तिलक की सार्थकता केवल पदार्थ (चंदन, कुमकुम, भस्म) से नहीं, बल्कि किसे तिलक लगाया जा रहा है (स्वयं या अन्य) और किस अंगुली से लगाया जा रहा है, इन दोनों से निर्धारित होती है। भारतीय परंपरा में इसे ऊर्जा-संयम, मर्यादा और भाव-संप्रेषण का सूक्ष्म विज्ञान माना गया है।
1️⃣ स्वयं को तिलक लगाना (Self Tilak)
🔹 प्रमुख अंगुली: अनामिका
कारण: अनामिका को देव-अंगुली और सात्त्विक माना गया है।
भाव: आत्मशुद्धि, संयम, साधना।
प्रभाव:
मन में स्थिरता और ध्यान-भाव।
अहं का न्यूनतम हस्तक्षेप।
पूजा, जप, अध्ययन से पूर्व मानसिक तैयारी।
👉 इसलिए दैनिक पूजा, व्रत, संकल्प आदि में स्वयं तिलक सदैव अनामिका से करना शास्त्रसम्मत है।
🔹 वैकल्पिक (विशेष परिस्थिति)
मध्यमा: भस्म के साथ, वैराग्य या तप-भाव में।
अंगूठा: केवल तांत्रिक संकल्प या विशेष साधना में।
तर्जनी: सामान्यतः वर्जित (अहं-सूचक)।
2️⃣ दूसरों को तिलक लगाना (Applying Tilak to Others)
यह क्रिया केवल चिन्हांकन नहीं, बल्कि भाव, आशीर्वाद और सामाजिक-संवाद का माध्यम है।
🔹 प्रमुख अंगुली: अनामिका
किसके लिए:
अतिथि
गुरु, शिष्य
पुत्र-पुत्री
विवाह, उत्सव, संस्कार
महत्व:
अनामिका से लगाया गया तिलक शुभेच्छा, मंगलकामना और सात्त्विक ऊर्जा का संचार करता है।
इसमें अधिकार नहीं, बल्कि स्नेह और सम्मान का भाव रहता है।
3️⃣ विशेष संबंधों में अंगुली-प्रयोग
🔸 माता द्वारा संतान को
अनामिका → संरक्षण, करुणा, आशीर्वाद
🔸 गुरु द्वारा शिष्य को
अनामिका → ज्ञान-दीक्षा, अनुशासन
🔸 गृहस्थ द्वारा बड़ों को
अनामिका (नम्रता के भाव से)
कभी-कभी केवल प्रतीकात्मक स्पर्श
🔸 शैव परंपरा (भस्म)
मध्यमा या अनामिका
वैराग्य और नश्वरता-बोध का संकेत
4️⃣ तर्जनी से तिलक क्यों वर्जित (विशेषतः दूसरों को)?
तर्जनी आदेश, निर्देश और अहं की अंगुली है।
इससे किसी को तिलक करना श्रेष्ठता-बोध या अधिकार-भाव दर्शा सकता है।
सामाजिक और आध्यात्मिक मर्यादा के विरुद्ध माना गया है।
5️⃣ मनोवैज्ञानिक एवं ऊर्जा-दृष्टि
स्वयं तिलक → आत्म-नियमन (self-regulation)
दूसरों को तिलक → भाव-संप्रेषण (emotional communication)
सही अंगुली से तिलक करने पर
संबंधों में सौहार्द
संस्कारों में गरिमा
और मन में अनुशासन विकसित होता है।
✨ संक्षिप्त निष्कर्ष
स्थिति
उपयुक्त अंगुली
मुख्य भाव
स्वयं तिलक
अनामिका
आत्मशुद्धि, साधना
दूसरों को तिलक
अनामिका
सम्मान, आशीर्वाद
भस्म (शैव)
मध्यमा / अनामिका
वैराग्य
तर्जनी
❌ वर्जित
अहं / आदेश
अतः तिलक में अंगुली का चयन एक सूक्ष्म सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक अनुशासन है, जो व्यक्ति के आंतरिक भाव और बाह्य संबंध—दोनों को संतुलित करता है।
यदि आप चाहें, तो इसे मैं
शास्त्रीय उद्धरणों,
मुद्रा-विज्ञान, या
शैलज मनो-तांत्रिक सिद्धांत
के आलोक में और अधिक गहराई से प्रस्तुत कर सकता अपने तथा दूसरों को तिलक लगाने में अंगुलियों का प्रयोग एवं उसका महत्व
भारतीय परंपरा में तिलक केवल क्या लगाया गया इतना ही नहीं, बल्कि किसे लगाया गया (स्वयं या अन्य) और किस अंगुली से लगाया गया—यह भी उतना ही अर्थपूर्ण है। यहाँ सूक्ष्म रूप से अहं–नियंत्रण, श्रद्धा, आशीर्वाद और ऊर्जा-संचरण का सिद्धांत कार्य करता है।
1️⃣ स्वयं को तिलक लगाने में अंगुलियों का प्रयोग
🔹 (क) अनामिका — सर्वश्रेष्ठ एवं शास्त्रसम्मत
प्रयोग: चंदन, कुमकुम, रोली
भाव: आत्म-शुद्धि, भक्ति, संकल्प
महत्व:
अनामिका को देव-अंगुली माना गया है।
स्वयं को तिलक करते समय इससे अहं नहीं बढ़ता, बल्कि आत्म-संयम विकसित होता है।
पूजा, जप, व्रत से पूर्व यही अंगुली उपयुक्त है।
🔹 (ख) मध्यमा — संयम या वैराग्य भाव में
प्रयोग: भस्म
भाव: तप, नश्वरता-बोध
महत्व:
विशेषकर शैव या वैराग्य परंपरा में।
सामान्य गृहस्थ जीवन में सीमित प्रयोग।
❌ (ग) तर्जनी — वर्जित
कारण:
तर्जनी अहं, निर्देश और आदेश की अंगुली है।
स्वयं को इससे तिलक करना अवचेतन रूप से “मैं” को प्रधान करता है।
2️⃣ दूसरों को तिलक लगाने में अंगुलियों का प्रयोग
यहाँ तिलक आशीर्वाद, सम्मान और शुभेच्छा का माध्यम होता है, इसलिए अंगुली का चयन और भी संवेदनशील माना गया है।
🔹 (क) अनामिका — आशीर्वाद की अंगुली
प्रयोग: माता-पिता, गुरु, अतिथि, स्त्री, बालक
महत्व:
अनामिका से लगाया गया तिलक निष्काम और शुद्ध आशीर्वाद का संकेत है।
इसमें अहं नहीं, केवल शुभकामना प्रवाहित होती है।
🔹 (ख) अंगूठा — विशेष, स्नेह या तांत्रिक भाव में
प्रयोग:
माता द्वारा शिशु को
गुरु द्वारा शिष्य को (विशेष अवसर पर)
महत्व:
अंगूठा इच्छा-शक्ति और संकल्प-ऊर्जा का प्रतीक है।
इसका प्रयोग सामान्य सामाजिक तिलक में नहीं, बल्कि गहन स्नेह या विशेष अनुग्रह में होता है।
❌ (ग) तर्जनी — स्पष्टतः निषिद्ध
क्यों?
तर्जनी से किसी को तिलक करना अधिकार-बोध या श्रेष्ठता का भाव दर्शाता है।
यह आशीर्वाद नहीं, आदेश का संकेत बन जाता है।
3️⃣ मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अंतर
स्वयं को तिलक → आत्म-नियमन (Self-regulation)
दूसरे को तिलक → भाव-संप्रेषण (Emotional transmission)
अनामिका दोनों ही स्थितियों में अहं को न्यूनतम रखती है, इसलिए सर्वोत्तम मानी गई है।
4️⃣ ऊर्जा एवं सूक्ष्म विज्ञान (संक्षेप)
अंगुलियाँ शरीर की ऊर्जा-नाड़ियों के द्वार हैं।
अनामिका → सात्त्विक, संतुलित ऊर्जा
अंगूठा → तीव्र संकल्प-ऊर्जा
तर्जनी → अहं-प्रधान ऊर्जा
इसलिए तिलक में अनामिका = शुद्ध प्रवाह,
और तर्जनी = विकृत प्रवाह मानी गई है।
✨ निष्कर्ष (सार-सूत्र)
स्थिति
उपयुक्त अंगुली
भाव
स्वयं को तिलक
अनामिका
आत्म-शुद्धि
स्वयं (भस्म)
मध्यमा
वैराग्य
दूसरों को तिलक
अनामिका
आशीर्वाद
विशेष स्नेह/दीक्षा
अंगूठा
संकल्प
किसी भी स्थिति में
❌ तर्जनी
अहं
👉 इस प्रकार तिलक कर्म नहीं, संस्कार है—
और अंगुली उसका मौन संदेश।
यदि आप चाहें तो मैं इसे
✔️ शास्त्रीय उद्धरणों सहित,
✔️ शिक्षा/संस्कार-प्रशिक्षण हेतु संक्षेप नोट्स में,
✔️ या शैलज मनो-तांत्रिक सिद्धांत के अनुरूप अकादमिक रूप में भी प्रस्तुत कर सकता हूँ। 🙏

शैलज पदार्थ जाति सिद्धांत एवं परिभाषा :-

शैलज पदार्थ जाति सिद्धांत एवं परिभाषा :-

वे समस्त पदार्थ जिनके अभ्यान्तरिक भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणधर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं उनकी अभ्यान्तरिक संरचनात्मक, विकासात्मक या विघटनात्मक अभिक्रिया और / या उनके अपने एवं अन्य पदार्थों के घटकों के साथ सात्मीकरणात्मक, तटस्थ या विस्थापनात्मक प्रतिक्रियत्मक अभिव्यक्ति की भाषा के गुणवाचकता एवं वस्तुवाचकता की अपने स्वरूप में स्थिति एवं क्रियाशीलन की अपनी मौलिक गुणवत्ता के आधार पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र श्रेणी के अन्तर्गत आते है, जो उनकी जाति कहलाती है।

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

अवकाश प्राप्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान), विधि-छात्र, ज्योतिर्विद, वैज्ञानिक, कवि, लेखक, सम्पादक, पत्रकार, समाज सेवी, रचनात्मक चिन्तक, सर्वधर्म एवं सन्यास दीक्षित, कुण्डलिनी जाग्रत, स्वर योगी, रेकी मास्टर, होमियोपैथिक, बायोकेमिक और समग्र चिकित्सा विद् । 

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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 Shailaj Material Caste Theory and Definition:

All substances whose internal physical, chemical, or biological properties, class, color, region, and their internal structural, developmental, or disintegrative reactions, and/or their assimilative, neutral, or displacement reactions with their own and other substances' components, are categorized into the Brahmin, Kshatriya, Vaishya, and Shudra classes based on the qualitative and objective nature of their expression and their fundamental quality of existence and functioning, which is called their caste.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

Retired Principal and Lecturer (Psychology), Law Student, Astrologer, Scientist, Poet, Author, Editor, Journalist, Social Worker, Creative Thinker, Initiated into all religions and Sannyasa, Kundalini Awakened, Swara Yogi, Reiki Master, Homeopathic, Biochemic and Holistic Medicine Practitioner.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy, and Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

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शैलज पदार्थ जाति सिद्धान्त एवं परिभाषा : १.

येषां सर्वेषां पदार्थानां आन्तरिकभौतिक-रासायनिक-जैविक-गुणाः, वर्गः, वर्णः, प्रदेशः, तेषां आन्तरिकाः संरचनात्मकाः, विकासात्मकाः, अपघटनात्मकाः वा विक्रियाः, तथा/वा तेषां स्वस्य अन्येषां पदार्थानां घटकैः सह आत्मसात-तटस्थ-विच्छेदक-प्रतिक्रियाशीलतायाः मौलिकगुणाः, ते ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य-शूद्र-वर्गयोः अन्तर्गताः भवन्ति, येन तेषां कथ्यते जातिः ।

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

अवकाश प्राप्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान), विधि-छात्र, ज्योतिर्विद, वैज्ञानिक, कवि, लेखक, सम्पादक, पत्रकार, समाज सेवी, रचनात्मक चिन्तक, सर्वधर्म एवं सन्यास दीक्षित, कुण्डलिनी जाग्रत, स्वर योगी, रेकी मास्टर, होमियोपैथिक, बायोकेमिक और समग्र चिकित्सा विद् । 

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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मंगलवार, 27 जनवरी 2026

शैलज जाति सिद्धांत एवं परिभाषा (Shailaj caste theory and Definition) :--

शैलज जाति सिद्धांत एवं परिभाषा :-

सृष्टि के समस्त प्राणी एवं पदार्थ अपनी मौलिक गुणवत्ता के आधार पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र श्रेणी के अन्तर्गत आते है जो उनकी जाति कहलाती है। 

शैलज प्राणी जाति सिद्धांत एवं परिभाषा :-

सजीव प्राणियों में जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी तथा समूह के वंशानुगत अर्थात् आनुवांशिकी और डी० एन० ए० के प्रभाव को दर्शाता है, जिसके गुणधर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं अभिव्यक्ति की भाषा उनकी पारम्परिक गतिविधियों, कार्य प्रणाली, मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार, मनोदैहिक अभिव्यक्ति और अतीन्द्रिय प्रभाव के रूप में दृष्टि गोचर होता है। 

अतः "शैलज जाति सिद्धांत एवं परिभाषा" जाति सम्बंधित अधोगामी सामाजिक सोच, अवधारणाओं एवं प्रवृत्तियों तथा विकृत सह स्वार्थ प्रेरित राजनीतिक गतिविधियों को समझने और वैयक्तिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक गतिविधियों को आदर्श, वैज्ञानिक तथा विकासात्मक दिशा प्रदान करने में सहायक हो सकता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

अवकाश प्राप्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान), विधि-छात्र, ज्योतिर्विद, वैज्ञानिक, कवि, लेखक, सम्पादक, पत्रकार, समाज सेवी, रचनात्मक चिन्तक, सर्वधर्म एवं सन्यास दीक्षित, कुण्डलिनी जाग्रत, स्वर योगी, रेकी मास्टर, होमियोपैथिक, बायोकेमिक और समग्र चिकित्सा विद् । 

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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Shailaj Caste Theory and Definition:

All beings and substances in creation fall under the categories of Brahmin, Kshatriya, Vaishya, and Shudra based on their fundamental qualities, which constitute their caste.

Shailaj Living Being Caste Theory and Definition:

In living beings, caste represents the hereditary influence, i.e., genetics and DNA, of any individual, creature, or group. Its attributes, class, varna, region, and language of expression are manifested in their traditional activities, working methods, psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior, psychosomatic expression, and extrasensory influence.

Therefore, the "Shailaj Caste Theory and Definition" can be helpful in understanding regressive social thinking, concepts, and tendencies related to caste, as well as distorted and self-serving political activities, and in providing an ideal, scientific, and developmental direction to individual, social, cultural, and political activities.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

Retired Principal and Lecturer (Psychology), Law Student, Astrologer, Scientist, Poet, Author, Editor, Journalist, Social Worker, Creative Thinker, Initiated into all religions and Sannyasa, Kundalini Awakened, Swara Yogi, Reiki Master, Homeopathic, Biochemic and Holistic Medicine Practitioner.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy and Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh
Village: Pachamba, District: Begusarai,
Pincode: 851218, State: Bihar (India).

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शैलज जाति सिद्धांत (Shailaj caste theory) :-

शैलज जाति सिद्धांत एवं परिभाषा :-

सृष्टि के समस्त प्राणी एवं पदार्थ अपनी मौलिक गुणवत्ता के आधार पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र श्रेणी के अन्तर्गत आते है जो उनकी जाति कहलाती है। 

शैलज प्राणी जाति सिद्धांत एवं परिभाषा :-

सजीव प्राणियों में जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी तथा समूह के वंशानुगत अर्थात् आनुवांशिकी और डी० एन० ए० के प्रभाव को दर्शाता है, जिसके गुणधर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं अभिव्यक्ति की भाषा उनकी पारम्परिक गतिविधियों, कार्य प्रणाली, मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार, मनोदैहिक अभिव्यक्ति और अतीन्द्रिय प्रभाव के रूप में दृष्टि गोचर होता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

अवकाश प्राप्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान), विधि-छात्र, ज्योतिर्विद, वैज्ञानिक, कवि, लेखक, सम्पादक, पत्रकार, समाज सेवी, रचनात्मक चिन्तक, सर्वधर्म एवं सन्यास दीक्षित, कुण्डलिनी जाग्रत, स्वर योगी, रेकी मास्टर, होमियोपैथिक, बायोकेमिक और समग्र चिकित्सा विद् । 

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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Shailaj caste theory and definition :-

 On the basis of their fundamental quality, all the creatures and things of the universe come under the categories of Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra, which is called their caste. 

 Shailaj species theory and definition: -

 In living beings, caste refers to the hereditary influence of genetics and DNA on any individual, organism, or group, whose characteristics, class, color, region, and language of expression are manifested as psychobiological social behavior, psychosomatic expression, and extrasensory influence arising from their traditional activities, working methods, psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

Retired Principal and Lecturer (Psychology), law student, astrologer, scientist, poet, writer, editor, journalist, social worker, creative thinker, initiated into all religions and monasticism, Kundalini awakened, Swara Yogi, Reiki Master, and expert in Homeopathic, Biochemic and holistic medicine.
Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

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शैलज जाति सिद्धान्त एवं परिभाषा :-

तेषां मौलिकगुणस्य आधारेण जगतः सर्वे प्राणिनः, वस्तूनि च ब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्रवर्गाणाम् अन्तर्गताः भवन्ति, येन तेषां जातिः कथ्यते । 

शेलज प्रजाति सिद्धान्तः परिभाषा च : - .

जीवेषु जातिः आनुवंशिकतायाः अर्थात् कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः समूहस्य च आनुवंशिकतायाः प्रभावं प्रतिबिम्बयति, यस्य गुणाः, वर्गः, जातिः, क्षेत्रः, अभिव्यक्तिभाषा च तेषां पारम्परिकक्रियाकलापस्य, कार्यव्यवस्थायाः, मनोसामाजिकव्यवहारस्य, मनोजैविकस्य आनुवंशिकस्य, मनोजैविकभौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविकरासायनिकप्रक्रियायाः च उत्पद्यमानस्य मनोदैहिकव्यञ्जनस्य तथा च बाह्यसंवेदीप्रभावस्य रूपेण दृश्यन्ते। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान), विधि छात्र, ज्योतिषी, वैज्ञानिक, कवि, लेखक, सम्पादक, पत्रकार, समाजसेवी, रचनात्मक विचारक, सर्वधर्म एवं सन्यास दीक्षित, कुंडलिनी जागृत, स्वरा योगी, रेकी मास्टर, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक एवं समग्र चिकित्सा विशेषज्ञ।
(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह
ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

सृष्टि के समस्त प्राणी एवं पदार्थ अपनी मौलिक गुणवत्ता के आधार पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र श्रेणी के अन्तर्गत आते है जो उनकी जाति कहलाती है। 

सजीव प्राणियों में जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी तथा समूह के वंशानुगत अर्थात् आनुवांशिकी और डी० एन० ए० के प्रभाव को दर्शाता है, जिसके गुणधर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं अभिव्यक्ति की भाषा उनकी पारम्परिक गतिविधियों, मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव के रूप में दृष्टि गोचर होता है। 


इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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 जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी के वंशानुगत प्रभाव और डी० एन० ए०; धर्म व्यक्ति या प्राणी के जीवन यात्रा की मनो-शारीरिक अनुभूति, आवश्यकता, अनुक्रियात्मक एवं समायोजनात्मक व्यवहार तथा मानव जीवन में स्वत: उद्भूत और / या समाजिक, परम्परागत और / या परिस्थिति प्रेरित व्यवहारिकता; वर्ग व्यक्ति या प्राणी के पारस्परिक अनुकूलन या समायोजनात्मक समूह विकास, कार्य-शैली एवं अभिव्यक्ति व्यवस्था; वर्ण जीव-रासायनिक एवं खगोलीय प्रभाव; क्षेत्र व्यक्ति या प्राणी की
दैहिक एवं स्थानीय सीमा तथा भाषा उनकी मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक अवस्थाओं को उनकी वाणी और / या संकेतों की अभिव्यक्ति माध्यम को दर्शाता है। 

इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

*************************************
जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी के वंशानुगत प्रभाव और डी० एन० ए०; धर्म व्यक्ति या प्राणी के जीवन यात्रा की मनो-शारीरिक अनुभूति, आवश्यकता, अनुक्रियात्मक एवं समायोजनात्मक व्यवहार तथा मानव जीवन में स्वत: उद्भूत और / या समाजिक, परम्परागत और / या परिस्थिति प्रेरित व्यवहारिकता; वर्ग व्यक्ति या प्राणी के पारस्परिक अनुकूलन या समायोजनात्मक समूह विकास, कार्य-शैली एवं अभिव्यक्ति व्यवस्था; वर्ण जीव-रासायनिक एवं खगोलीय प्रभाव; क्षेत्र व्यक्ति या प्राणी की
दैहिक एवं स्थानीय सीमा तथा भाषा उनकी मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक अवस्थाओं को उनकी वाणी और / या संकेतों की अभिव्यक्ति माध्यम को दर्शाता है। 

इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
*************************************
 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

*************************************

 जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी के वंशानुगत प्रभाव और डी० एन० ए०; धर्म व्यक्ति या प्राणी के जीवन यात्रा की मनो-शारीरिक अनुभूति, आवश्यकता, अनुक्रियात्मक एवं समायोजनात्मक व्यवहार तथा मानव जीवन में स्वत: उद्भूत और / या समाजिक, परम्परागत और / या परिस्थिति प्रेरित व्यवहारिकता; वर्ग व्यक्ति या प्राणी के पारस्परिक अनुकूलन या समायोजनात्मक समूह विकास, कार्य-शैली एवं अभिव्यक्ति व्यवस्था; वर्ण जीव-रासायनिक एवं खगोलीय प्रभाव; क्षेत्र व्यक्ति या प्राणी की
दैहिक एवं स्थानीय सीमा तथा भाषा उनकी मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक अवस्थाओं को उनकी वाणी और / या संकेतों की अभिव्यक्ति माध्यम को दर्शाता है। 

इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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 जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी के वंशानुगत प्रभाव और डी० एन० ए०; धर्म व्यक्ति या प्राणी के जीवन यात्रा की मनो-शारीरिक अनुभूति, आवश्यकता, अनुक्रियात्मक एवं समायोजनात्मक व्यवहार तथा मानव जीवन में स्वत: उद्भूत और / या समाजिक, परम्परागत और / या परिस्थिति प्रेरित व्यवहारिकता; वर्ग व्यक्ति या प्राणी के पारस्परिक अनुकूलन या समायोजनात्मक समूह विकास, कार्य-शैली एवं अभिव्यक्ति व्यवस्था; वर्ण जीव-रासायनिक एवं खगोलीय प्रभाव; क्षेत्र व्यक्ति या प्राणी की
दैहिक एवं स्थानीय सीमा तथा भाषा उनकी मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक अवस्थाओं को उनकी वाणी और / या संकेतों की अभिव्यक्ति माध्यम को दर्शाता है। 

इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
*************************************
 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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 जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी के वंशानुगत प्रभाव और डी० एन० ए०; धर्म व्यक्ति या प्राणी के जीवन यात्रा की मनो-शारीरिक अनुभूति, आवश्यकता, अनुक्रियात्मक एवं समायोजनात्मक व्यवहार तथा मानव जीवन में स्वत: उद्भूत और / या समाजिक, परम्परागत और / या परिस्थिति प्रेरित व्यवहारिकता; वर्ग व्यक्ति या प्राणी के पारस्परिक अनुकूलन या समायोजनात्मक समूह विकास, कार्य-शैली एवं अभिव्यक्ति व्यवस्था; वर्ण जीव-रासायनिक एवं खगोलीय प्रभाव; क्षेत्र व्यक्ति या प्राणी की
दैहिक एवं स्थानीय सीमा तथा भाषा उनकी मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक अवस्थाओं को उनकी वाणी और / या संकेतों की अभिव्यक्ति माध्यम को दर्शाता है। 

इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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 जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार :-

जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषादि के परम्परागत महत्व के अतिरिक्त उनका 
वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार अधोलिखित है :-

वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जाति किसी भी व्यक्ति या प्राणी के वंशानुगत प्रभाव और डी० एन० ए०; धर्म व्यक्ति या प्राणी के जीवन यात्रा की मनो-शारीरिक अनुभूति, आवश्यकता, अनुक्रियात्मक एवं समायोजनात्मक व्यवहार तथा मानव जीवन में स्वत: उद्भूत और / या समाजिक, परम्परागत और / या परिस्थिति प्रेरित व्यवहारिकता; वर्ग व्यक्ति या प्राणी के पारस्परिक अनुकूलन या समायोजनात्मक समूह विकास, कार्य-शैली एवं अभिव्यक्ति व्यवस्था; वर्ण जीव-रासायनिक एवं खगोलीय प्रभाव; क्षेत्र व्यक्ति या प्राणी की
दैहिक एवं स्थानीय सीमा तथा भाषा उनकी मनोदैहिक और / या मनो-शरीरिक अवस्थाओं को उनकी वाणी और / या संकेतों की अभिव्यक्ति माध्यम को दर्शाता है। 

इस प्रकार किसी व्यक्ति या प्राणी के जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र एवं भाषा की पारम्परिक गतिविधियों का मूल उनके मनोजैविक आनुवंशिकी, मनोजैविक भौतिकी एवं मनोजैविक रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न मनोजैविक सामाजिक व्यवहार और अतीन्द्रिय प्रभाव में पाया जाता है। 

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह

गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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 The Scientific and Psychological Basis of Caste, Religion, Class, Varna, Region, Language, etc.:

In addition to their traditional significance, the scientific and psychological basis of caste, religion, class, varna, region, and language is as follows:

From a scientific and psychological perspective, caste represents the hereditary influence and DNA of any individual or organism; religion represents the psycho-physical experience, needs, reactive and adaptive behavior of an individual or organism's life journey, and the spontaneously arising and/or social, traditional, and/or situationally induced behavior in human life; class represents the mutual adaptation or adaptive group development, work style, and expression system of an individual or organism; varna represents biochemical and astronomical influences; region represents the physical and local boundaries of an individual or organism; and language represents their psycho-physical and/or psychosomatic states through the medium of expression in their speech and/or gestures.

Thus, the basis of the traditional activities of an individual or organism's caste, religion, class, varna, region, and language is found in their psychobiological genetics, psychobiological physics, and psychobiological chemical processes, resulting in psychobiological social behavior and extrasensory influences.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Scholar.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

*************************************जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण, क्षेत्र, भाषा आदि का वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार : १.

जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आदीनां पारम्परिक-महत्त्वस्य अतिरिक्तं तेषां वैज्ञानिक-मनोवैज्ञानिक-आधारः निम्नलिखितम् अस्ति ।

वैज्ञानिकमनोवैज्ञानिकदृष्ट्या जातिः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा वंशानुगतप्रभावं डीएनए च प्रतिबिम्बयति; धर्मः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य जीवनयात्रायाः मनो-शारीरिक-अनुभवानाम्, आवश्यकतानां, प्रतिक्रियाशील-अनुकूल-व्यवहारानाम्, मानवजीवने च स्वतःस्फूर्तं तथा / वा सामाजिकं, पारम्परिकं / वा परिस्थितिजन्य-प्रेरितं व्यवहारं च प्रतिबिम्बयति वर्गः कस्यचित् व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा परस्परं अनुकूलनं वा अनुकूलसमूहविकासं, कार्यशैलीं, अभिव्यक्तिव्यवस्थां च प्रतिबिम्बयति; वर्ण जैवरासायनिक-खगोलीय-प्रभावान् प्रतिबिम्बयति; क्षेत्रं व्यक्तिस्य वा पशुस्य वा भौतिकं स्थानीयं च सीमां प्रतिबिम्बयति; तथा भाषा वाक् तथा/वा संकेतानां माध्यमेन अभिव्यक्ताः मनोशारीरिकाः/वा मनोशारीरिकाः अवस्थाः प्रतिबिम्बयति।

एवं च कस्यचित् व्यक्तिस्य वा प्राणिनः वा पारम्परिकक्रियाकलापाः, तेषां जाति-धर्म-वर्ग-वर्ण-प्रदेश-भाषा-आधारिताः, तेषां मनोजैविक-सामाजिक-व्यवहारस्य, तेषां मनोजैविक-आनुवंशिकतायाः, मनोजैविक-भौतिकशास्त्रस्य, मनोजैविक-रासायनिक-प्रक्रियाणां च परिणामेण उत्पन्न-इन्द्रिय-बाह्य-धारणासु मूलभूताः भवन्ति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिषी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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रविवार, 25 जनवरी 2026

🇮🇳 गणतंत्र दिवस आमन्त्रण पत्र (संकल्प सहित) 🇮🇳


🇮🇳 गणतंत्र दिवस आमन्त्रण पत्र (संकल्प सहित) 🇮🇳
आदरणीय महोदय/महोदया,
सादर प्रणाम 🙏
भारत के गौरवपूर्ण गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के पावन अवसर पर रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय की ओर से आपको सादर आमन्त्रित करते हुए हमें अत्यन्त हर्ष हो रहा है।
गणतंत्र दिवस हमारे संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति पुनः जागरूक होने का महापर्व है। यह दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विचार, मूल्य और सेवा-भाव का जीवंत राष्ट्र है।
📅 कार्यक्रम विवरण
दिनांक: 26 जनवरी 2026 तदनुसार सोमवार
समय: प्रातः 10 बजे
स्थान: रचनात्मक सेवा केन्द्र परिसर,
पचम्बा, बेगूसराय
🇮🇳 कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान
संविधान एवं गणतंत्र की गरिमा पर विचार-प्रस्तुति
देशभक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
राष्ट्रीय संकल्प पाठ
✨ राष्ट्रीय संकल्प
इस पावन अवसर पर हम सभी यह संकल्प लेंगे कि—
हम भारत के संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता एवं बंधुत्व के मूल्यों को अपने आचरण में आत्मसात करेंगे।
हम राष्ट्र की एकता, अखण्डता और संप्रभुता की रक्षा हेतु सदैव सजग एवं प्रतिबद्ध रहेंगे।
हम अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने नागरिक, सामाजिक एवं नैतिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे।
हम परस्पर सहयोगात्मक, निष्पक्ष एवं पूर्वाग्रह मुक्त व्यवहार करेंगे। 
हम सेवा, सद्भाव, सृजनात्मकता एवं समावेशिता के माध्यम से भारत को एक सशक्त, संस्कारित एवं विकसित राष्ट्र बनाने में सक्रिय योगदान देंगे।
आपकी गरिमामयी उपस्थिति / योगदान इस राष्ट्रीय आयोजन को गौरवान्वित करेगी तथा संकल्प को सामूहिक शक्ति प्रदान करेगी।
सादर आमन्त्रण सहित,
भवदीय
रचनात्मक सेवा केन्द्र
पचम्बा, बेगूसराय
(सचिव/संयोजक)

नाम: अवधेश कुमार शैलज
मोबाइल: 8210938389