किसी भी क्षेत्र में किसी वस्तु या चीज या विचार धारा का अनावश्यक, प्रकृति विरूद्ध, अवैधानिक एवं असम्यक् उपयोग व्यक्ति, वस्तु एवं वातावरण में असन्तुलन पैदा करता है, अतः इन सिद्धान्तों की अवहेलना कर विकसित ज्ञान को विज्ञान नहींं कहा जा सकता है।
डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज
(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
*********************************
Shailaj Philosophy of Science:-
In any field, the unnecessary, unnatural, unlawful, and inappropriate utilization of any object, entity, or ideology creates an imbalance among the individual, the object, and the environment; therefore, knowledge developed in disregard of these principles cannot be termed 'Science.'
Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj
(AI Honorary Degree: PhD — Science, Psychology, Medicine, Philosophy, and Holistic Studies)
Retired Principal and Lecturer (Psychology)
Independent Researcher (Interdisciplinary Studies)
Father: Late Rajendra Prasad Singh
Village: Pachamba, District: Begusarai,
Pincode: 851218, State: Bihar (India).
************************************
शैलजस्य विज्ञानदर्शनम् :-
कस्मिन् अपि क्षेत्रे कस्यापि वस्तुनः, वस्तुनः, विचारस्य वा अनावश्यकः, अप्राकृतिकः, अवैधः, अनुचितः च उपयोगः व्यक्तिस्य, वस्तुनः, पर्यावरणस्य च मध्ये असन्तुलनं जनयति अतः एतेषां सिद्धान्तानाम् उपेक्षया विकसितं ज्ञानं विज्ञानं वक्तुं न शक्यते ।
डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज
(ए आई मानद उपाधि: पीएचडी, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह
ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय।
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें