सोमवार, 3 अगस्त 2026

धन्यवाद। अब चतुर्थ अध्याय प्रस्तुत किया जा रहा है। जहाँ तथ्य सार्वजनिक रूप से सुविदित हैं, वहाँ उन्हें संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है। जहाँ अधिकृत अभिलेखों की आवश्यकता है, वहाँ उसे स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है, ताकि शोध की निष्पक्षता बनी रहे।
चतुर्थ अध्याय
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व
(यह अध्याय उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों, संस्मरणों एवं आगे संकलित किए जाने वाले अभिलेखों के आधार पर विकसित किया जा रहा है।)
1. नाम
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
2. जन्म–मृत्यु
जन्म : उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सत्यापन अपेक्षित।
मृत्यु : यदि लागू हो, अधिकृत अभिलेखों के आधार पर अंकित किया जाएगा।
3. जन्मस्थान
बिहार राज्य।
विस्तृत ग्राम, प्रखंड एवं जिला संबंधी प्रमाणों का अभिलेखीय सत्यापन अपेक्षित।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
डॉ. भोला प्रसाद सिंह का संबंध ऐसे परिवार से था जहाँ शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सार्वजनिक जीवन को महत्व दिया जाता था। विस्तृत पारिवारिक विवरण अभिलेखीय स्रोतों से संकलित किया जाएगा।
5. शिक्षा
प्रारम्भिक एवं उच्च शिक्षा का क्रम।
विश्वविद्यालयीय अध्ययन।
शोध उपाधियाँ (यदि उपलब्ध हों)।
प्राप्त शैक्षणिक योग्यताओं का दस्तावेजी सत्यापन किया जाएगा।
6. कार्यक्षेत्र
शिक्षा
राजनीति
समाजसेवा
जनप्रतिनिधित्व
सामाजिक चिंतन
सार्वजनिक जीवन
7. जीवन परिचय
डॉ. भोला प्रसाद सिंह ने शिक्षा, सार्वजनिक जीवन तथा जनप्रतिनिधित्व के माध्यम से समाज में सक्रिय भूमिका निभाई। वे एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किए जाते हैं जिन्होंने जनसमस्याओं, शिक्षा के विस्तार तथा सामाजिक विकास के विषयों पर विशेष ध्यान दिया। उनका जीवन सार्वजनिक उत्तरदायित्व एवं जनसेवा के आदर्शों से प्रेरित था।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
शिक्षाविद् के रूप में योगदान।
जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय भूमिका।
सामाजिक विकास एवं जनकल्याण के लिए कार्य।
शिक्षा एवं सामाजिक चेतना के प्रसार में सहभागिता।
सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के समर्थन।
9. राष्ट्रहित में योगदान
लोकतांत्रिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में सहभागिता।
शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण में योगदान।
जनप्रतिनिधि के रूप में संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने का प्रयास।
राष्ट्रीय विकास की नीतियों के समर्थन में सक्रिय भूमिका।
10. लोकहित में योगदान
शिक्षा के विस्तार के लिए प्रयास।
जनसमस्याओं के समाधान हेतु सक्रियता।
सामाजिक न्याय एवं जनकल्याण से संबंधित विषयों पर कार्य।
युवाओं को शिक्षा एवं सार्वजनिक जीवन के लिए प्रेरित करना।
समाजसेवी गतिविधियों में सहभागिता।
11. प्रमुख कृतियाँ
यदि उनके द्वारा पुस्तकें, शोधपत्र, भाषण-संग्रह, लेख अथवा अन्य बौद्धिक कृतियाँ प्रकाशित की गई हों, तो उनकी प्रमाणित सूची इस अध्याय में सम्मिलित की जाएगी।
12. संस्थागत योगदान
यदि उन्होंने किसी शिक्षण संस्था, सामाजिक संगठन, न्यास अथवा जनसेवी संस्था की स्थापना या विकास में योगदान दिया हो, तो उसका प्रमाण-आधारित विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
डॉ. भोला प्रसाद सिंह का प्रभाव विशेष रूप से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता तथा सार्वजनिक जीवन में देखा जाता है। उनके व्यक्तित्व ने अनेक विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों को प्रेरित किया। इस प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन उपलब्ध अभिलेखों एवं समकालीन स्रोतों के आधार पर किया जाएगा।
14. प्राप्त सम्मान
उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर प्राप्त सम्मानों की सूची संकलित एवं सत्यापित की जाएगी।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
वर्तमान उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर उन्हें भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों (भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण अथवा पद्मश्री) से सम्मानित किए जाने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
उपलब्ध सामग्री से यह स्पष्ट है कि डॉ. भोला प्रसाद सिंह ने शिक्षा, जनप्रतिनिधित्व एवं समाजसेवा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। तथापि किसी विशिष्ट राष्ट्रीय नागरिक सम्मान के संबंध में निष्कर्षात्मक अनुशंसा करने के लिए उनके कार्यों, प्रभाव, प्रकाशित अभिलेखों एवं सरकारी दस्तावेजों का और अधिक विस्तृत अध्ययन अपेक्षित है। वर्तमान चरण में निष्पक्ष निष्कर्ष यही है कि अधिक दस्तावेजी शोध आवश्यक है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
इस अध्याय के विस्तार हेतु निम्न स्रोतों का उपयोग किया जाएगा—
संसद एवं विधानमंडल के अभिलेख।
भारत निर्वाचन आयोग के अभिलेख।
विश्वविद्यालय एवं शिक्षण संस्थानों के दस्तावेज।
प्रकाशित जीवनी एवं संस्मरण।
समाचारपत्र एवं पत्रिकाएँ।
पारिवारिक एवं निजी अभिलेख।
स्थानीय इतिहास एवं शोधग्रंथ।
18. छायाचित्र
उपलब्ध होने पर निम्न सामग्री सम्मिलित की जाएगी—
आधिकारिक चित्र।
सार्वजनिक कार्यक्रमों के चित्र।
सम्मान ग्रहण करते हुए चित्र।
शिक्षण एवं सामाजिक गतिविधियों के चित्र।
हस्ताक्षर एवं दस्तावेज।
19. परिशिष्ट
जीवन-कालक्रम।
महत्वपूर्ण तिथियाँ।
भाषणों की सूची।
प्रकाशित लेख एवं पुस्तकों की सूची।
नियुक्ति एवं सम्मान संबंधी दस्तावेज।
संसदीय/विधानमंडलीय योगदान (यदि लागू हो)।
संदर्भ ग्रंथसूची।
शोध टिप्पणी
यह अध्याय प्रथम शोध संस्करण है। यदि डॉ. भोला प्रसाद सिंह से संबंधित प्रमाणित जीवनवृत्त, संसदीय अभिलेख, प्रकाशित पुस्तकें, पारिवारिक दस्तावेज, छायाचित्र अथवा अन्य ऐतिहासिक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, तो इसे और अधिक विस्तृत एवं प्रामाणिक रूप दिया जाएगा।
अगले अध्याय में "वासुदेव सिंह" का इसी मानक प्रारूप में विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया जाएगा।
आपका दृष्टिकोण अत्यंत संतुलित है।
यदि किसी व्यक्ति के संबंध में राष्ट्रीय सम्मान का विचार किया जाता है, तो उसके लिए सबसे उपयुक्त स्थिति यह होती है कि अनुशंसा किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष संस्था, विश्वविद्यालय, शोध संगठन, अकादमिक निकाय या अन्य प्रतिष्ठित संगठन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर की जाए, न कि स्वयं उस व्यक्ति द्वारा। इससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता दोनों बनी रहती हैं।
यदि भविष्य में डॉ. अवधेश कुमार 'शैलज' के कार्यों का मूल्यांकन किया जाए, तो उसका आधार निम्न होना चाहिए—
शैक्षिक प्रमाण-पत्र एवं सेवा अभिलेख।
प्रकाशित एवं अप्रकाशित कृतियाँ।
शोध कार्य एवं उनके प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन।
संस्थागत योगदान।
विद्यार्थियों, सहकर्मियों एवं विशेषज्ञों की समीक्षाएँ।
सार्वजनिक एवं सामाजिक योगदान।
उपलब्ध ऐतिहासिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य।
उसके बाद कोई स्वतंत्र संस्था यदि यह माने कि उनका योगदान किसी राष्ट्रीय सम्मान के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाना चाहिए, तो वह अपने विवेक से सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अनुशंसा कर सकती है। भारत में अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए नागरिक, संस्थाएँ और संगठन पात्र व्यक्तियों का नामांकन प्रस्तुत कर सकते हैं, और कई पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया सार्वजनिक भी होती है। अंतिम निर्णय संबंधित चयन-समिति एवं भारत सरकार की स्थापित प्रक्रिया के अनुसार होता है। �
National Awards +1
मुझे यह भी उचित प्रतीत होता है कि आपकी प्रस्तावित पुस्तक में डॉ. अवधेश कुमार 'शैलज' का अध्याय केवल शोध एवं दस्तावेजी अध्ययन के रूप में रखा जाए और उनके संबंध में किसी सम्मान की अनुशंसा न की जाए। यदि भविष्य में कोई स्वतंत्र विश्वविद्यालय, शोध संस्था, साहित्यिक अकादमी, मनोवैज्ञानिक संगठन या अन्य प्रतिष्ठित निकाय उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उन्हें किसी सम्मान के लिए नामित करना उचित समझे, तो वह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया होगी। इससे आपकी पूरी परियोजना की विश्वसनीयता और अकादमिक निष्पक्षता और भी मजबूत होगी।
आपका यह सुझाव विचारणीय है।
यदि इस परियोजना का उद्देश्य बेगूसराय के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्वों का दस्तावेजी एवं निष्पक्ष अध्ययन है, तो सूची का समय-समय पर उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर परिष्कृत होना स्वाभाविक है।
आपके सुझाव के अनुसार प्रथम चरण की संशोधित सूची इस प्रकार हो सकती है—
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
वासुदेव सिंह
प्रो. के. के. मंडल
डॉ. रामवचन राय
महेन्द्र नारायण शर्मा
स्वर्गीय डॉ. आनन्द नारायण शर्मा (पूर्व प्राचार्य एवं सुकवि समीक्षा के रचयिता)
यदि स्वर्गीय डॉ. आनन्द नारायण शर्मा के शिक्षा, साहित्य और आलोचना संबंधी योगदान का पर्याप्त दस्तावेजी आधार उपलब्ध है, तो उन्हें इस परियोजना में सम्मिलित करना उचित होगा। उनके लिए भी वही मानक प्रारूप अपनाया जाएगा जो अन्य सभी व्यक्तित्वों के लिए निर्धारित किया गया है—
नाम
जन्म–मृत्यु
जन्मस्थान
पारिवारिक पृष्ठभूमि
शिक्षा
कार्यक्षेत्र
जीवन परिचय
प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्रहित में योगदान
लोकहित में योगदान
प्रमुख कृतियाँ (विशेषतः सुकवि समीक्षा एवं अन्य रचनाएँ)
संस्थागत योगदान (पूर्व प्राचार्य के रूप में कार्य)
सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
प्रमाण एवं संदर्भ
छायाचित्र (यदि उपलब्ध हों)
परिशिष्ट (कालक्रम, दस्तावेज एवं अन्य प्रमाण)
इस संशोधन से प्रथम चरण का स्वरूप और अधिक संतुलित होगा, क्योंकि इसमें राजनीति, शिक्षा, साहित्य, प्रशासन, समाजसेवा और अकादमिक जगत—सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बना रहेगा।
मेरा एक और सुझाव है कि इस ग्रंथ के प्रारम्भ में "व्यक्तित्व चयन के मानदण्ड" शीर्षक से एक अध्याय जोड़ा जाए। उसमें स्पष्ट किया जाए कि किसी व्यक्ति का चयन केवल राष्ट्रहित, लोकहित, दस्तावेजी प्रमाण, दीर्घकालीन प्रभाव और सार्वजनिक योगदान के आधार पर किया गया है। इससे पूरे ग्रंथ की निष्पक्षता, पारदर्शिता और शोध-विश्वसनीयता और अधिक सुदृढ़ होगी।
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए हार्दिक धन्यवाद।
इस कार्य के दौरान मेरा प्रयास यही रहा कि प्रत्येक व्यक्तित्व का मूल्यांकन व्यक्तिगत मत के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों, ऐतिहासिक संदर्भों, दस्तावेजों तथा शोध-पद्धति के आधार पर किया जाए। जहाँ पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध थे, वहाँ उनका उपयोग किया गया; और जहाँ प्रमाण सीमित थे, वहाँ स्पष्ट रूप से "अधिक शोध अपेक्षित है" लिखा गया। मेरा मानना है कि यही किसी गंभीर शोध-ग्रंथ की विश्वसनीयता का आधार होता है।
मुझे लगता है कि यह परियोजना अब केवल एक सूची नहीं रह गई है, बल्कि इसे क्रमशः निम्न रूप में विकसित किया जा सकता है—
प्रथम खण्ड — बेगूसराय के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व (पूर्ण)।
द्वितीय खण्ड — बिहार के शेष जिलों के चयनित व्यक्तित्व।
तृतीय खण्ड — सम्पूर्ण बिहार के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व।
चतुर्थ खण्ड — भारत के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व।
पंचम खण्ड — राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन कोश (तुलनात्मक अध्ययन)।
षष्ठ खण्ड — राष्ट्रीय सम्मान से वंचित विशिष्ट व्यक्तित्वों का दस्तावेजी मूल्यांकन।
यदि यह योजना इसी प्रकार आगे बढ़ती है, तो यह केवल एक जीवनी-संग्रह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्मृति, ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण और सार्वजनिक नीति-अध्ययन का एक महत्वपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ बन सकता है।
आपकी धैर्यपूर्ण सहभागिता, स्पष्ट शोध-दृष्टि और क्रमबद्ध कार्य-पद्धति ने इस परियोजना को दिशा दी है। इसके लिए मैं भी आपका धन्यवाद करता हूँ।
आपको सादर प्रणाम, हार्दिक शुभकामनाएँ एवं इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना की निरंतर सफलता की मंगलकामनाएँ।
हार्दिक धन्यवाद। अब नवम अध्याय प्रस्तुत किया जा रहा है। चूँकि यह अध्याय आपके संबंध में है, इसलिए इसे विशेष सावधानी के साथ तैयार किया जा रहा है। जहाँ जानकारी आपके प्रकाशित कार्यों, संस्थागत विवरणों अथवा आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री पर आधारित है, उसे उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिन बिंदुओं पर स्वतंत्र दस्तावेजी सत्यापन आवश्यक होगा, वहाँ उसका उल्लेख भी किया गया है।
नवम अध्याय
डॉ. अवधेश कुमार शैलज
मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, साहित्यकार एवं सामाजिक चिंतक
1. नाम
डॉ. अवधेश कुमार शैलज
(प्रो. अवधेश कुमार शैलज)
2. जन्म–मृत्यु
जन्म : 7 दिसम्बर 1955
जन्मस्थान : बिहार (विस्तृत अभिलेख के अनुसार अंतिम संस्करण में अंकित किया जाएगा)
मृत्यु : लागू नहीं
3. जन्मस्थान
बिहार राज्य।
अंतिम शोध संस्करण में ग्राम, प्रखंड, जिला एवं प्रशासनिक विवरण प्रमाण सहित प्रस्तुत किया जाएगा।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
डॉ. अवधेश कुमार शैलज का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ शिक्षा, भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को महत्व प्राप्त था। प्रारम्भिक जीवन से ही अध्ययन, चिंतन, लेखन एवं लोकसेवा के प्रति उनकी रुचि विकसित हुई।
5. शिक्षा
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार—
मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.)।
मनोविज्ञान में शोधकार्य; शोध विषय: "Study of Attitude Towards Family, Sex and Self-Concept of P.G. Students."
होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा तथा अंतर्विषयी अध्ययन में दीर्घकालीन स्वाध्याय एवं प्रशिक्षण।
6. कार्यक्षेत्र
मनोविज्ञान
उच्च शिक्षा
शोध
साहित्य
दर्शन
अंतर्विषयी अध्ययन
समाजचिंतन
वैकल्पिक चिकित्सा अध्ययन
संस्थान निर्माण
7. जीवन परिचय
डॉ. अवधेश कुमार शैलज ने दीर्घकाल तक महाविद्यालय स्तर पर मनोविज्ञान का अध्यापन किया तथा शिक्षण, शोध, साहित्य और सामाजिक चिंतन के क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दिया। वे मनोविज्ञान की भारतीय दृष्टि, अंतर्विषयी अध्ययन तथा हिन्दी माध्यम में मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं के विकास के समर्थक रहे हैं। उनके अनेक लेख, पांडुलिपियाँ, शोध-नोट्स तथा साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित एवं अप्रकाशित रूप में उपलब्ध हैं।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
मनोविज्ञान के क्षेत्र में मौलिक अवधारणाओं का प्रतिपादन।
हिन्दी में मनोवैज्ञानिक परिभाषाओं के व्यवस्थित विकास का प्रयास।
शिक्षा एवं अध्यापन में दीर्घकालीन योगदान।
साहित्य, दर्शन एवं समाजचिंतन पर बहुआयामी लेखन।
मनोविज्ञान एवं अंतर्विषयी विषयों पर अनेक पांडुलिपियों का निर्माण।
9. राष्ट्रहित में योगदान
उपलब्ध सामग्री के आधार पर उनके कार्य निम्न क्षेत्रों में राष्ट्रहित से जुड़े दिखाई देते हैं—
भारतीय भाषाओं में ज्ञान-विकास का प्रयास।
मनोविज्ञान को भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करने का प्रयास।
शिक्षा एवं शोध के माध्यम से ज्ञान-सृजन।
सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं रचनात्मक चिंतन पर लेखन।
इन बिंदुओं का अंतिम मूल्यांकन प्रकाशित कृतियों एवं स्वतंत्र शैक्षणिक समीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
10. लोकहित में योगदान
विद्यार्थियों का शिक्षण एवं मार्गदर्शन।
मनोवैज्ञानिक जागरूकता का प्रसार।
साहित्य एवं समाजचिंतन के माध्यम से जनजागरण।
शिक्षा एवं शोध संस्थागत गतिविधियों में सहभागिता।
11. प्रमुख कृतियाँ
उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख रचनाओं एवं परियोजनाओं में—
प्रज्ञा-सूक्तम्।
अवध रामायणम्।
मनोविज्ञान की हिन्दी–अंग्रेज़ी परिभाषाओं का संकलन।
मनोविज्ञान, दर्शन एवं अंतर्विषयी अध्ययन से संबंधित अनेक अप्रकाशित पांडुलिपियाँ।
अंतिम संस्करण में इनकी विस्तृत ग्रंथसूची दी जाएगी।
12. संस्थागत योगदान
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उन्होंने आदर्श मनोवैज्ञानिक संगठन एवं शोध संस्थान, बेगूसराय की स्थापना एवं संचालन में प्रमुख भूमिका निभाई। इस संस्था का उद्देश्य मनोवैज्ञानिक शोध, शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता को प्रोत्साहित करना है।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
उनके लेखन एवं शिक्षण का प्रभाव मुख्यतः—
विद्यार्थियों,
शोधार्थियों,
मनोविज्ञान के अध्येताओं,
हिन्दी माध्यम के शिक्षार्थियों,
तथा सामाजिक एवं साहित्यिक विमर्श
पर देखा जा सकता है। इस प्रभाव का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन भविष्य में स्वतंत्र शोध के आधार पर किया जाना अपेक्षित है।
14. प्राप्त सम्मान
उपलब्ध सार्वजनिक अभिलेखों के अनुसार प्राप्त सम्मानों की प्रमाणित सूची अंतिम संस्करण में दस्तावेजों सहित प्रस्तुत की जाएगी।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
वर्तमान उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर उन्हें भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नागरिक सम्मान (भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण अथवा पद्मश्री) प्राप्त होने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
डॉ. अवधेश कुमार शैलज के संबंध में उपलब्ध सामग्री उनके शिक्षा, मनोविज्ञान, साहित्य एवं शोध कार्यों का संकेत देती है। तथापि किसी राष्ट्रीय नागरिक सम्मान के संबंध में निष्कर्षात्मक अनुशंसा करने के लिए निम्न का स्वतंत्र परीक्षण अपेक्षित होगा—
प्रकाशित एवं अप्रकाशित कृतियों का समग्र मूल्यांकन।
शैक्षणिक प्रभाव एवं उद्धरण (Citation) अध्ययन।
स्वतंत्र विशेषज्ञों की समीक्षाएँ।
संस्थागत एवं सामाजिक प्रभाव का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण।
दीर्घकालीन राष्ट्रीय योगदान का तुलनात्मक अध्ययन।
अतः वर्तमान शोध-चरण में निष्पक्ष निष्कर्ष यही है कि अधिक स्वतंत्र शैक्षणिक मूल्यांकन एवं दस्तावेजी अध्ययन अपेक्षित है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
प्रकाशित पुस्तकें एवं पांडुलिपियाँ।
शोध प्रबंध।
महाविद्यालयीय सेवा अभिलेख।
संस्थागत दस्तावेज।
व्याख्यान, लेख एवं शोध-नोट्स।
स्वतंत्र समीक्षाएँ एवं अकादमिक स्रोत।
18. छायाचित्र
अंतिम संस्करण में निम्न सामग्री जोड़ी जाएगी—
आधिकारिक छायाचित्र।
अध्यापन काल के चित्र।
शोध एवं साहित्यिक कार्यक्रमों के चित्र।
संस्थागत गतिविधियों के चित्र।
प्रकाशित कृतियों के आवरण।
हस्तलिखित पांडुलिपियों के चयनित अंश।
19. परिशिष्ट
जीवन-कालक्रम।
शैक्षणिक सेवाओं का विवरण।
प्रकाशित एवं अप्रकाशित कृतियों की सूची।
शोध कार्यों की सूची।
संस्थागत उपलब्धियाँ।
सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र।
संदर्भ ग्रंथसूची।
चयनित दस्तावेज एवं परिशिष्ट।
समापन टिप्पणी
इस प्रकार प्रथम चरण में चयनित नौों व्यक्तित्वों का प्रारम्भिक शोध-प्रारूप पूर्ण होता है। अगले चरण में प्रत्येक अध्याय को अभिलेखों, प्रकाशित स्रोतों, दुर्लभ दस्तावेजों, छायाचित्रों, ग्रंथसूची, सरकारी अभिलेखों तथा स्वतंत्र विशेषज्ञ समीक्षाओं के आधार पर विस्तारित कर 300–500 पृष्ठों के एक शोधग्रंथ का रूप दिया जा सकता है, जिसका शीर्षक हो सकता है—
"बेगूसराय के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व : राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन (प्रथम खण्ड)"।
हार्दिक धन्यवाद। आपका उद्देश्य एक ऐसे संदर्भ-ग्रंथ का निर्माण करना है जो भविष्य में शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों तथा नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी हो सके। इसी दृष्टि से आगे का अध्याय भी तथ्यपरक एवं निष्पक्ष शैली में प्रस्तुत किया जा रहा है।
सप्तम अध्याय
डॉ. रामवचन राय
हिन्दी साहित्य, आलोचना एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र के विशिष्ट विद्वान
शोध टिप्पणी: डॉ. रामवचन राय एक सुविख्यात हिन्दी साहित्यकार, आलोचक एवं शिक्षाविद् हैं। उनके संबंध में उपलब्ध प्रकाशित सामग्री अन्य कई व्यक्तित्वों की तुलना में अधिक है, अतः इस अध्याय का अंतिम संस्करण और भी विस्तृत बनाया जा सकेगा।
1. नाम
डॉ. रामवचन राय
2. जन्म–मृत्यु
जन्म : उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार बिहार में।
मृत्यु : यदि लागू हो तो अद्यतन अभिलेखों के आधार पर जोड़ी जाएगी।
3. जन्मस्थान
बिहार।
ग्राम, प्रखंड एवं जिला संबंधी प्रमाणित विवरण अंतिम संस्करण में अभिलेखों के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
डॉ. रामवचन राय का परिवार भारतीय संस्कृति, शिक्षा एवं साहित्यिक परंपराओं से जुड़ा रहा। प्रारम्भिक जीवन में अध्ययनशील वातावरण ने उनके व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5. शिक्षा
प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा।
हिन्दी साहित्य में उच्च शिक्षा।
शोध उपाधि (डॉक्टरेट)।
साहित्य, आलोचना एवं भाषा-अध्ययन में विशेष दक्षता।
6. कार्यक्षेत्र
हिन्दी साहित्य
साहित्यिक आलोचना
अध्यापन
उच्च शिक्षा
शोध
व्याख्यान
भाषा एवं संस्कृति
7. जीवन परिचय
डॉ. रामवचन राय ने हिन्दी साहित्य के अध्येता, अध्यापक, आलोचक तथा शोधकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयीय शिक्षा, साहित्यिक विमर्श तथा हिन्दी भाषा के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके लेखन में भारतीय समाज, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के विविध आयामों का विश्लेषण मिलता है।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान।
उच्च शिक्षा में दीर्घकालीन योगदान।
साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य।
अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन।
राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय साहित्यिक मंचों पर सक्रिय उपस्थिति।
9. राष्ट्रहित में योगदान
हिन्दी भाषा के संवर्धन द्वारा राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता को बल।
उच्च शिक्षा एवं शोध के माध्यम से ज्ञान-संपदा का विकास।
भारतीय साहित्यिक परम्परा के संरक्षण एवं प्रसार में योगदान।
लोकतांत्रिक एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित साहित्यिक विमर्श को प्रोत्साहन।
10. लोकहित में योगदान
विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का मार्गदर्शन।
हिन्दी भाषा के माध्यम से जन-जागरण।
साहित्यिक संस्थाओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता।
नई पीढ़ी में साहित्यिक अभिरुचि विकसित करने का प्रयास।
11. प्रमुख कृतियाँ
डॉ. रामवचन राय की प्रकाशित पुस्तकों, आलोचनात्मक ग्रंथों, शोधपत्रों एवं संपादित कृतियों की प्रमाणित सूची अंतिम संस्करण में दी जाएगी। इसमें—
पुस्तकें,
आलोचना-ग्रंथ,
शोध आलेख,
संपादित संकलन,
व्याख्यान-संग्रह,
का क्रमबद्ध विवरण सम्मिलित होगा।
12. संस्थागत योगदान
विश्वविद्यालयों में अध्यापन।
शोध निर्देशन।
साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ाव।
हिन्दी अध्ययन एवं शोध को प्रोत्साहन।
अकादमिक कार्यक्रमों एवं संगोष्ठियों में सक्रिय भूमिका।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
डॉ. रामवचन राय ने हिन्दी भाषा एवं साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक संवाद तथा बौद्धिक विमर्श को समृद्ध किया। उनके लेखन और शिक्षण का प्रभाव विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं साहित्यिक समुदाय पर व्यापक रूप से देखा जाता है।
14. प्राप्त सम्मान
साहित्यिक एवं शैक्षणिक सम्मान (प्रमाणित सूची अंतिम संस्करण में)।
विभिन्न संस्थाओं द्वारा अभिनंदन एवं सम्मान।
विश्वविद्यालयीय एवं सांस्कृतिक मान्यताएँ।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर उन्हें भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण अथवा पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय नागरिक सम्मान प्राप्त होने का प्रमाण वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
डॉ. रामवचन राय का हिन्दी साहित्य, आलोचना एवं उच्च शिक्षा में योगदान उल्लेखनीय है। उनके कार्यों का प्रभाव मुख्यतः अकादमिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में परिलक्षित होता है। किसी राष्ट्रीय नागरिक सम्मान के संबंध में निष्कर्षात्मक अनुशंसा के लिए उनके समग्र साहित्य, उद्धरण-प्रभाव, संस्थागत योगदान तथा राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रभाव का विस्तृत तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक होगा। इसलिए वर्तमान शोध-चरण में निष्कर्ष है कि अधिक दस्तावेजी एवं तुलनात्मक अध्ययन अपेक्षित है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
इस अध्याय के विस्तृत संस्करण में निम्न स्रोतों का उपयोग किया जाएगा—
प्रकाशित पुस्तकें।
विश्वविद्यालयीय अभिलेख।
शोधपत्र एवं शोधप्रबंध।
साहित्यिक पत्रिकाएँ।
राष्ट्रीय पुस्तकालय सूची।
साहित्यिक संस्थाओं के अभिलेख।
साक्षात्कार एवं संस्मरण।
18. छायाचित्र
अंतिम संस्करण में निम्न सामग्री सम्मिलित की जाएगी—
आधिकारिक चित्र।
व्याख्यान देते हुए चित्र।
साहित्यिक समारोहों के चित्र।
सम्मान ग्रहण करते हुए चित्र।
हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के चयनित अंश।
19. परिशिष्ट
जीवन-कालक्रम।
प्रकाशित कृतियों की कालानुक्रमिक सूची।
शोध निर्देशन।
प्रमुख व्याख्यान।
सम्मान सूची।
चयनित समीक्षाएँ।
संदर्भ ग्रंथसूची।
अन्य दस्तावेज।
शोध टिप्पणी
डॉ. रामवचन राय पर पर्याप्त साहित्य उपलब्ध होने के कारण इस अध्याय को भविष्य में 30–40 पृष्ठों के विस्तृत शोध-अध्याय के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसमें उनकी समस्त प्रकाशित कृतियों की ग्रंथसूची, साहित्यिक समीक्षा, आलोचनात्मक योगदान तथा हिन्दी साहित्य पर उनके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण जोड़ा जाएगा।
आगामी अध्याय
अगले (अष्टम) अध्याय में महेन्द्र नारायण शर्मा का इसी मानक प्रारूप में विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया जाएगा।
धन्यवाद। अब षष्ठ अध्याय प्रस्तुत किया जा रहा है। चूँकि प्रो. के. के. मंडल के संबंध में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विस्तृत एवं प्रमाणित जानकारी सीमित है, इसलिए इस अध्याय में उपलब्ध तथ्यों तथा आगे अपेक्षित शोध—दोनों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
षष्ठ अध्याय
प्रो. के. के. मंडल
शिक्षाविद्, उच्च शिक्षा के विकासकर्ता एवं शैक्षणिक प्रशासक
(यह अध्याय उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों, विश्वविद्यालयीय अभिलेखों तथा आगे संकलित किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर विकसित किया जा रहा है।)
1. नाम
प्रो. के. के. मंडल
(पूरा नाम, यदि उपलब्ध अभिलेखों में विस्तृत रूप से अंकित हो, तो अंतिम संस्करण में जोड़ा जाएगा।)
2. जन्म–मृत्यु
जन्म : प्रमाणित अभिलेखों का संकलन अपेक्षित।
मृत्यु : यदि लागू हो, अभिलेखीय सत्यापन के उपरान्त अंकित किया जाएगा।
3. जन्मस्थान
बिहार राज्य।
ग्राम, प्रखंड, जिला एवं वर्तमान प्रशासनिक स्थिति का अभिलेखीय सत्यापन अपेक्षित।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रो. के. के. मंडल का संबंध ऐसे परिवार से था जहाँ शिक्षा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को महत्व दिया जाता था। विस्तृत पारिवारिक विवरण के लिए पारिवारिक एवं विश्वविद्यालयीय स्रोतों का अध्ययन आवश्यक होगा।
5. शिक्षा
प्रारम्भिक शिक्षा।
स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा।
शोध उपाधियाँ।
विशेषज्ञता का विषय।
विश्वविद्यालय एवं अन्य प्रशिक्षण संस्थानों का विवरण।
इन सभी तथ्यों का प्रमाणित संकलन किया जाएगा।
6. कार्यक्षेत्र
उच्च शिक्षा
अध्यापन
शैक्षणिक प्रशासन
अनुसंधान
विद्यार्थी मार्गदर्शन
संस्थागत विकास
7. जीवन परिचय
प्रो. के. के. मंडल ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक, मार्गदर्शक तथा शैक्षणिक प्रशासक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कार्य विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास, शिक्षण की गुणवत्ता तथा संस्थागत उन्नयन से जुड़ा रहा। उनके जीवन एवं कार्यों का विस्तृत दस्तावेजी अध्ययन इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य होगा।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएँ।
विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में योगदान।
शैक्षणिक प्रशासन में सक्रिय भूमिका।
संस्थागत गुणवत्ता सुधार हेतु प्रयास।
अनुसंधान एवं अकादमिक वातावरण के विकास में सहयोग।
9. राष्ट्रहित में योगदान
उच्च शिक्षा के माध्यम से मानव संसाधन निर्माण।
शिक्षित एवं उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण में योगदान।
ज्ञान-विज्ञान के प्रसार द्वारा राष्ट्रनिर्माण में सहभागिता।
शिक्षा के माध्यम से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करना।
10. लोकहित में योगदान
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार।
सामाजिक जागरूकता एवं बौद्धिक विकास।
शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास।
11. प्रमुख कृतियाँ
यदि उनके द्वारा प्रकाशित—
पुस्तकें,
शोधपत्र,
संपादित ग्रंथ,
व्याख्यान,
शोध निर्देशन,
उपलब्ध हों, तो उनकी प्रमाणित सूची इस अध्याय में सम्मिलित की जाएगी।
12. संस्थागत योगदान
यदि उन्होंने किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, शोध संस्थान अथवा शैक्षणिक संगठन के विकास में विशेष भूमिका निभाई हो, तो उसका तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
उनका प्रभाव मुख्यतः शिक्षा, बौद्धिक नेतृत्व तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के क्षेत्र में देखा जाएगा। इस प्रभाव का मूल्यांकन पूर्व विद्यार्थियों, सहकर्मियों एवं विश्वविद्यालयीय अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा।
14. प्राप्त सम्मान
प्राप्त शैक्षणिक, सामाजिक एवं संस्थागत सम्मानों की प्रमाणित सूची संकलित की जाएगी।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
वर्तमान उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर उन्हें भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों (भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण अथवा पद्मश्री) से सम्मानित किए जाने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
उच्च शिक्षा एवं अकादमिक नेतृत्व में उनका योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है, किन्तु राष्ट्रीय नागरिक सम्मान के संबंध में निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए विस्तृत दस्तावेजी प्रमाण, प्रकाशित शोध, संस्थागत अभिलेख एवं स्वतंत्र मूल्यांकन आवश्यक हैं। इसलिए वर्तमान स्थिति में अधिक शोध एवं दस्तावेजीकरण अपेक्षित है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
इस अध्याय के विस्तार हेतु निम्न स्रोतों का अध्ययन किया जाएगा—
विश्वविद्यालय अभिलेख।
महाविद्यालयीय सेवा अभिलेख।
प्रकाशित शोधपत्र।
पुस्तकें एवं स्मारिकाएँ।
समाचारपत्र।
सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों के संस्मरण।
पारिवारिक अभिलेख।
18. छायाचित्र
उपलब्ध होने पर—
आधिकारिक चित्र।
शिक्षण कार्य के चित्र।
दीक्षांत समारोहों के चित्र।
सम्मान ग्रहण करते हुए चित्र।
हस्ताक्षर एवं दस्तावेज।
19. परिशिष्ट
जीवन-कालक्रम।
सेवा-विवरण।
शोध निर्देशन की सूची।
प्रकाशित कृतियों की सूची।
सम्मान-पत्र।
प्रमुख व्याख्यान।
संदर्भ ग्रंथसूची।
अन्य उपलब्ध दस्तावेज।
शोध टिप्पणी
यह प्रथम शोध प्रारूप है। अंतिम संस्करण तैयार करते समय विश्वविद्यालयीय अभिलेख, सेवा-पुस्तिका, प्रकाशित कृतियाँ, शोध निर्देशन, सम्मान तथा समकालीन साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा, जिससे प्रो. के. के. मंडल के योगदान का निष्पक्ष एवं प्रमाण-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत किया जा सके।
अगले (सप्तम) अध्याय में डॉ. रामवचन राय का विस्तृत एवं शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत किया जाएगा।
धन्यवाद। अब पंचम अध्याय प्रस्तुत किया जा रहा है। इस अध्याय में भी वही शोध-पद्धति अपनाई गई है—जहाँ तथ्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, उन्हें प्रस्तुत किया गया है; जहाँ पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ स्पष्ट रूप से "अधिक शोध अपेक्षित" अंकित किया गया है।
पंचम अध्याय
वासुदेव सिंह
जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व
(यह अध्याय उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों, स्थानीय इतिहास एवं आगे संकलित किए जाने वाले अभिलेखों के आधार पर विकसित किया जा रहा है।)
1. नाम
वासुदेव सिंह
2. जन्म–मृत्यु
जन्म : प्रमाणित अभिलेखों का संकलन अपेक्षित।
मृत्यु : यदि लागू हो, अभिलेखीय सत्यापन के पश्चात् अंकित किया जाएगा।
3. जन्मस्थान
बिहार राज्य।
ग्राम, प्रखंड एवं जिला संबंधी अधिकृत अभिलेखों का संकलन अपेक्षित।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
वासुदेव सिंह का संबंध ऐसे परिवार से था जहाँ सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सार्वजनिक जीवन को महत्व दिया जाता था। विस्तृत पारिवारिक विवरण के लिए पारिवारिक एवं स्थानीय अभिलेखों का अध्ययन अपेक्षित है।
5. शिक्षा
प्रारम्भिक शिक्षा।
उच्च शिक्षा (यदि उपलब्ध हो)।
सामाजिक एवं राजनीतिक प्रशिक्षण।
उपलब्ध प्रमाणों का सत्यापन अपेक्षित।
6. कार्यक्षेत्र
जनप्रतिनिधित्व
समाजसेवा
ग्रामीण विकास
सार्वजनिक जीवन
लोककल्याण
7. जीवन परिचय
वासुदेव सिंह ने जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की समस्याओं को उठाने तथा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे सामाजिक सरोकारों, जनकल्याण तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। उनके जीवन एवं कार्यों का विस्तृत अभिलेखीय अध्ययन इस परियोजना का महत्वपूर्ण भाग होगा।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय भूमिका।
जनहित के मुद्दों का निरंतर समर्थन।
ग्रामीण एवं स्थानीय विकास के प्रयास।
सामाजिक समन्वय एवं जनसंपर्क में सक्रिय योगदान।
9. राष्ट्रहित में योगदान
लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने में सहभागिता।
संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत जनप्रतिनिधि के दायित्वों का निर्वहन।
जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास।
राष्ट्रहित से जुड़े सार्वजनिक विषयों पर सक्रिय भूमिका।
10. लोकहित में योगदान
ग्रामीण विकास।
जनसमस्याओं के समाधान के प्रयास।
सामाजिक समरसता को बढ़ावा।
जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में सहभागिता।
स्थानीय विकास योजनाओं के समर्थन एवं क्रियान्वयन में सहयोग।
11. प्रमुख कृतियाँ
यदि उनके द्वारा पुस्तकें, लेख, संस्मरण, भाषण-संग्रह अथवा अन्य प्रकाशित सामग्री उपलब्ध हो, तो उसकी प्रमाणित सूची इस अध्याय में सम्मिलित की जाएगी।
12. संस्थागत योगदान
यदि उन्होंने किसी शैक्षणिक, सामाजिक, सहकारी अथवा सार्वजनिक संस्था की स्थापना, संरक्षण अथवा विकास में भूमिका निभाई हो, तो उसका दस्तावेजी विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
उनका प्रभाव विशेष रूप से जनप्रतिनिधित्व, सामाजिक सहयोग तथा स्थानीय नेतृत्व के क्षेत्र में देखा जाता है। इस प्रभाव का मूल्यांकन समकालीन अभिलेखों, समाचार स्रोतों एवं स्थानीय इतिहास के आधार पर किया जाएगा।
14. प्राप्त सम्मान
प्राप्त सम्मानों की प्रमाणित सूची का संकलन एवं सत्यापन अपेक्षित है।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर उन्हें भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों (भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण अथवा पद्मश्री) से सम्मानित किए जाने का प्रमाण वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
वर्तमान उपलब्ध जानकारी से उनके सार्वजनिक जीवन एवं जनसेवा का महत्व स्पष्ट होता है। किन्तु किसी राष्ट्रीय नागरिक सम्मान के संबंध में तथ्यपरक निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए अधिक विस्तृत दस्तावेजी प्रमाण, सरकारी अभिलेख, प्रकाशित अध्ययन तथा स्वतंत्र शोध की आवश्यकता है। अतः वर्तमान निष्कर्ष है कि अधिक शोध एवं अभिलेखीय सत्यापन अपेक्षित है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
इस अध्याय के विस्तार हेतु निम्न स्रोतों का उपयोग किया जाएगा—
बिहार विधान परिषद्/विधानसभा के अभिलेख (यदि लागू हों)।
निर्वाचन अभिलेख।
सरकारी दस्तावेज।
स्थानीय इतिहास।
समाचारपत्र एवं पत्रिकाएँ।
पारिवारिक अभिलेख।
संस्मरण एवं साक्षात्कार।
शोधग्रंथ एवं संदर्भ पुस्तकें।
18. छायाचित्र
उपलब्ध होने पर निम्न सामग्री सम्मिलित की जाएगी—
आधिकारिक छायाचित्र।
सार्वजनिक कार्यक्रमों के चित्र।
सम्मान समारोहों के चित्र।
हस्ताक्षर।
महत्वपूर्ण दस्तावेजों के चित्र।
19. परिशिष्ट
जीवन-कालक्रम।
प्रमुख सार्वजनिक दायित्व।
महत्वपूर्ण भाषण।
उपलब्ध पत्राचार।
सम्मान-पत्र।
समाचारपत्रों में प्रकाशित उल्लेख।
संदर्भ सूची।
अन्य दस्तावेज।
शोध टिप्पणी
यह अध्याय प्रथम शोध प्रारूप है। भविष्य में यदि परिवार, स्थानीय संस्थाओं अथवा सरकारी अभिलेखागार से अतिरिक्त प्रमाण उपलब्ध होते हैं, तो इसे विस्तारित कर अधिक प्रामाणिक एवं व्यापक बनाया जाएगा।
आगामी अध्याय
अगले (षष्ठ) अध्याय में प्रो. के. के. मंडल का विस्तृत अध्ययन इसी मानक प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा। वहाँ उनके शैक्षिक, संस्थागत एवं बौद्धिक योगदान का विशेष विश्लेषण किया जाएगा।
धन्यवाद। अब तृतीय अध्याय प्रस्तुत किया जा रहा है। चूँकि स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर सीमित प्रकाशित सामग्री उपलब्ध है, इसलिए जहाँ तथ्य पर्याप्त रूप से उपलब्ध हैं, उन्हें प्रस्तुत किया जा रहा है और जहाँ विस्तृत अभिलेख अपेक्षित हैं, वहाँ स्पष्ट रूप से उसका उल्लेख किया जा रहा है। यह शोध की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
तृतीय अध्याय
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं लोकजागरण के संवाहक
(यह अध्याय उपलब्ध दस्तावेजों एवं स्थानीय स्रोतों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। भविष्य में नए प्रमाण उपलब्ध होने पर इसका संशोधित एवं विस्तृत संस्करण तैयार किया जा सकता है।)
1. नाम
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
2. जन्म–मृत्यु
जन्म : अधिकृत एवं प्रमाणित तिथि का संकलन अपेक्षित।
मृत्यु : प्रमाणित तिथि का संकलन अपेक्षित।
3. जन्मस्थान
बिहार राज्य से संबंध।
विस्तृत जन्मस्थान का अभिलेखीय सत्यापन अपेक्षित।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
उपलब्ध संकेतों के अनुसार उनका परिवार शिक्षा एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा हुआ था। विस्तृत वंशावली एवं पारिवारिक विवरण के लिए पारिवारिक अभिलेख एवं स्थानीय स्रोतों का अध्ययन अपेक्षित है।
5. शिक्षा
उनकी शिक्षा, अध्ययन-अध्यापन एवं बौद्धिक विकास के संबंध में उपलब्ध सूचनाओं का व्यवस्थित संकलन किया जाना शेष है। विद्यालय, महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय संबंधी अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक होगा।
6. कार्यक्षेत्र
साहित्य
शिक्षा
लोकजागरण
सामाजिक चेतना
सांस्कृतिक संरक्षण
7. जीवन परिचय
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र का नाम क्षेत्रीय साहित्य, शिक्षा तथा सांस्कृतिक जागरण से जुड़े व्यक्तित्वों में लिया जाता है। उन्होंने समाज में ज्ञान, भाषा तथा सांस्कृतिक चेतना के विकास के लिए कार्य किया। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अब तक व्यापक अकादमिक अध्ययन अपेक्षाकृत कम हुआ है, जिससे उनके योगदान के समुचित मूल्यांकन की आवश्यकता अनुभव होती है।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
साहित्यिक एवं शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता।
क्षेत्रीय सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान।
लोकजागरण एवं सामाजिक जागरूकता के प्रयास।
शिक्षण एवं बौद्धिक वातावरण के निर्माण में सहयोग।
9. राष्ट्रहित में योगदान
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उनका योगदान मुख्यतः शिक्षा, भाषा, संस्कृति एवं सामाजिक जागरण के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में दिखाई देता है। यदि भविष्य में अतिरिक्त अभिलेख उपलब्ध हों तो इस भाग का विस्तार किया जाएगा।
10. लोकहित में योगदान
शिक्षा के प्रति जनजागरण।
सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण।
साहित्यिक वातावरण के निर्माण में सहयोग।
सामाजिक चेतना के विकास में योगदान।
11. प्रमुख कृतियाँ
इस शीर्षक के अंतर्गत उनकी प्रकाशित एवं अप्रकाशित रचनाओं की प्रमाणित सूची तैयार की जाएगी, जिसमें—
पुस्तकें
लेख
भाषण
संपादित ग्रंथ
पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री
अप्रकाशित पाण्डुलिपियाँ
का संकलन किया जाएगा।
12. संस्थागत योगदान
यदि उन्होंने किसी विद्यालय, महाविद्यालय, साहित्यिक संस्था अथवा सामाजिक संगठन की स्थापना या विकास में भूमिका निभाई हो, तो उसका दस्तावेजी विवरण संकलित किया जाएगा।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
उनके कार्यों का प्रभाव क्षेत्रीय साहित्य, भाषा, सांस्कृतिक चेतना तथा शिक्षा के क्षेत्र में देखा जाता है। इस प्रभाव का मूल्यांकन समकालीन लेखकों, शिक्षाविदों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा।
14. प्राप्त सम्मान
अब तक उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर प्राप्त सम्मानों की अधिकृत सूची का सत्यापन अपेक्षित है।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर उन्हें भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों (जैसे भारत रत्न या पद्म पुरस्कार) से सम्मानित किए जाने का प्रमाण वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
वर्तमान उपलब्ध स्रोत उनके योगदान का संकेत देते हैं, किन्तु किसी राष्ट्रीय नागरिक सम्मान के संबंध में निष्कर्षात्मक अनुशंसा करने के लिए अधिक व्यापक दस्तावेजी सामग्री, प्रकाशित शोध तथा अभिलेखीय प्रमाण आवश्यक हैं। इसलिए इस चरण में उचित निष्कर्ष यही है कि अधिक शोध एवं दस्तावेजीकरण अपेक्षित है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
इस अध्याय के लिए निम्न स्रोतों का उपयोग एवं परीक्षण प्रस्तावित है—
परिवार द्वारा उपलब्ध अभिलेख।
स्थानीय पुस्तकालय।
जिला अभिलेखागार।
प्रकाशित पुस्तकें एवं स्मारिकाएँ।
समाचारपत्र अभिलेख।
समकालीन साहित्यकारों के संस्मरण।
विश्वविद्यालयीय शोध।
18. छायाचित्र
यदि प्रमाणिक छायाचित्र उपलब्ध हों तो—
व्यक्तिगत चित्र।
सार्वजनिक कार्यक्रमों के चित्र।
हस्तलिखित पाण्डुलिपियाँ।
सम्मान-पत्र।
स्मृति-चिह्न।
को इस अध्याय में सम्मिलित किया जाएगा।
19. परिशिष्ट
इस भाग में निम्न सामग्री जोड़ी जाएगी—
जीवन का कालक्रम।
उपलब्ध पत्राचार।
हस्तलिखित दस्तावेज।
प्रकाशित लेखों की सूची।
प्रमुख तिथियाँ।
संदर्भ सूची।
परिशिष्ट दस्तावेज।
शोध टिप्पणी
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र पर यह अध्याय प्रारम्भिक शोध संस्करण है। यदि उनके परिवार, सहयोगियों अथवा स्थानीय संस्थाओं से अतिरिक्त प्रमाण, पुस्तकें, पत्र, छायाचित्र या दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं, तो इसे विस्तारित कर एक प्रामाणिक जीवनी एवं मूल्यांकन अध्याय के रूप में विकसित किया जाएगा।
अगले अध्याय में डॉ. भोला प्रसाद सिंह का विस्तृत अध्ययन इसी मानक प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
हार्दिक धन्यवाद। आपकी इस परियोजना का उद्देश्य केवल जीवनियाँ संकलित करना नहीं, बल्कि तथ्यपरक, निष्पक्ष, प्रमाण-आधारित एवं शोधपरक "राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन ग्रंथ" तैयार करना है। इसी दृष्टि से अब दूसरा अध्याय प्रस्तुत किया जा रहा है।
द्वितीय अध्याय
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
आधुनिक बिहार के निर्माता, स्वतंत्रता सेनानी एवं दूरदर्शी प्रशासक
1. नाम
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
लोकप्रिय नाम—
श्रीबाबू
बिहार केसरी (यह संबोधन भी कई ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है)
2. जन्म–मृत्यु
जन्म: 21 अक्टूबर 1887
मृत्यु: 31 जनवरी 1961
3. जन्मस्थान
ग्राम : माउर (Maur)
वर्तमान जिला : शेखपुरा, बिहार
तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत यह क्षेत्र तत्कालीन मुंगेर जनपद से संबद्ध था।
4. पारिवारिक पृष्ठभूमि
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का जन्म एक शिक्षित एवं सांस्कृतिक परिवार में हुआ। प्रारम्भ से ही उनमें अध्ययन, आत्मानुशासन तथा राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित हुए। युवावस्था में राष्ट्रीय आन्दोलन से प्रभावित होकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन का मार्ग चुना।
5. शिक्षा
प्रारम्भिक शिक्षा बिहार में।
उच्च शिक्षा के लिए पटना एवं कलकत्ता में अध्ययन।
विधि (Law) का अध्ययन।
छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय चेतना एवं सार्वजनिक नेतृत्व में सक्रिय।
6. कार्यक्षेत्र
स्वतंत्रता आन्दोलन
राजनीति
प्रशासन
शिक्षा
औद्योगिक विकास
कृषि
सिंचाई
सामाजिक सुधार
लोकतांत्रिक शासन
7. जीवन परिचय
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के सक्रिय सेनानी थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बने और लगभग डेढ़ दशक तक राज्य का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में बिहार में औद्योगिक विकास, उच्च शिक्षा, सिंचाई, ऊर्जा, प्रशासनिक पुनर्गठन तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण पहलें हुईं। इसी कारण उन्हें व्यापक रूप से "आधुनिक बिहार का निर्माता" कहा जाता है।
8. प्रमुख उपलब्धियाँ
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री।
स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय भूमिका।
बिहार के औद्योगीकरण की आधारशिला।
उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार को प्रोत्साहन।
सिंचाई एवं कृषि विकास योजनाओं का विस्तार।
प्रशासनिक ढाँचे का सुदृढ़ीकरण।
9. राष्ट्रहित में योगदान
स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी।
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को मजबूत करना।
संविधान की भावना के अनुरूप प्रशासन विकसित करना।
राष्ट्रीय आर्थिक विकास में बिहार की भूमिका को सुदृढ़ करने का प्रयास।
सार्वजनिक संस्थाओं के विकास द्वारा राष्ट्रनिर्माण में योगदान।
10. लोकहित में योगदान
शिक्षा संस्थानों का विस्तार।
ग्रामीण विकास योजनाएँ।
सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा।
औद्योगिक रोजगार के अवसरों का सृजन।
प्रशासन को जनता के निकट लाने का प्रयास।
11. प्रमुख कृतियाँ
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह मुख्यतः एक प्रशासक एवं जननेता थे। उनका योगदान पुस्तकों की अपेक्षा शासन, नीतियों और संस्थागत निर्माण में अधिक दिखाई देता है। उनके भाषण, विधानमंडलीय वक्तव्य तथा प्रशासनिक निर्णय महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत हैं।
12. संस्थागत योगदान
उनके नेतृत्व में बिहार में अनेक शैक्षणिक, औद्योगिक एवं सार्वजनिक संस्थानों के विकास को गति मिली। उच्च शिक्षा, कृषि, ऊर्जा और प्रशासनिक संरचना के सुदृढ़ीकरण में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।
13. सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने बिहार में आधुनिक प्रशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा विस्तार तथा सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित किया। उनके नेतृत्व ने बिहार के विकास की दीर्घकालीन दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
14. प्राप्त सम्मान
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उन्हें अनेक सार्वजनिक सम्मान प्राप्त हुए, किन्तु भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण अथवा पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय नागरिक सम्मान प्रदान नहीं किए गए।
15. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
भारत रत्न — प्राप्त नहीं।
पद्म विभूषण — प्राप्त नहीं।
पद्म भूषण — प्राप्त नहीं।
पद्मश्री — प्राप्त नहीं।
16. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का स्वतंत्रता आन्दोलन, बिहार के प्रशासनिक पुनर्गठन, औद्योगिक विकास तथा शिक्षा विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान निर्विवाद है। वे बिहार के इतिहास के प्रमुख निर्माताओं में गिने जाते हैं।
जहाँ तक किसी विशिष्ट राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की अनुशंसा का प्रश्न है, उसका निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा व्यापक राष्ट्रीय मानदण्डों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाना चाहिए। इस अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि उनका योगदान राष्ट्रीय स्तर के गंभीर अध्ययन एवं व्यापक सार्वजनिक विमर्श का विषय है।
17. प्रमाण एवं संदर्भ
बिहार सरकार के अभिलेख।
बिहार विधानमंडल की कार्यवाही।
स्वतंत्रता आन्दोलन संबंधी ऐतिहासिक स्रोत।
बिहार के राजनीतिक इतिहास पर प्रकाशित मानक ग्रंथ।
विश्वविद्यालयीय शोध एवं जीवनी साहित्य।
18. छायाचित्र
ऊपर प्रदर्शित चित्रों में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के ऐतिहासिक छायाचित्र एवं स्मारक सम्मिलित हैं।
19. परिशिष्ट (संक्षिप्त कालक्रम)
1887 – जन्म।
स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय सहभागिता।
1937 – बिहार प्रांत की उत्तरदायी सरकार में नेतृत्वकारी भूमिका।
1946 – बिहार के मुख्यमंत्री बने।
1950–1961 – स्वतंत्र भारत में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में विकास योजनाओं का संचालन।
31 जनवरी 1961 – निधन।
अगले अध्याय
अब तृतीय अध्याय में स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र का अध्ययन किया जाएगा। चूँकि उनके संबंध में सार्वजनिक स्रोत अपेक्षाकृत सीमित हैं, इसलिए उपलब्ध दस्तावेजों, स्थानीय इतिहास, प्रकाशित सामग्री एवं अन्य प्रमाणों के आधार पर विशेष शोधपरक प्रस्तुति तैयार की जाएगी। इससे पूरे ग्रंथ में समान स्तर की तथ्यपरकता और निष्पक्षता बनी रहेगी।
यह प्रथम चरण के लिए उपयुक्त एवं संतुलित प्रारम्भिक सूची है। इसे शोधपरक रूप में निम्नानुसार विकसित किया जा सकता है।
प्रथम चरण
बेगूसराय के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्वों का विस्तृत अध्ययन
इस चरण में बेगूसराय जिले से संबंधित उन विशिष्ट व्यक्तित्वों का गहन अध्ययन किया जाएगा जिन्होंने राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, साहित्य, प्रशासन, राजनीति, समाजसेवा, शोध, संस्कृति अथवा जनजीवन के अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रत्येक व्यक्तित्व का अध्ययन उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, प्रकाशित साहित्य, सरकारी दस्तावेजों, शोधग्रंथों तथा अन्य विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर किया जाएगा।
1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
अध्ययन के प्रमुख विषय
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में भूमिका
भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में कार्य
शिक्षा, कृषि एवं ग्रामीण भारत के प्रति दृष्टिकोण
नैतिक नेतृत्व एवं सार्वजनिक जीवन
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
उपलब्ध सम्मान एवं राष्ट्रीय विरासत
2. डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
अध्ययन के प्रमुख विषय
स्वतंत्रता आन्दोलन में भूमिका
आधुनिक बिहार के निर्माण में योगदान
औद्योगिक एवं सिंचाई परियोजनाएँ
शिक्षा एवं प्रशासनिक सुधार
लोकतांत्रिक नेतृत्व
सामाजिक समरसता एवं विकास नीति
3. स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
अध्ययन के प्रमुख विषय
साहित्यिक योगदान
शिक्षा एवं लोकजागरण
सांस्कृतिक चेतना का विकास
सामाजिक प्रभाव
प्रकाशित कृतियाँ
उपलब्ध अभिलेखों का संकलन एवं मूल्यांकन
4. डॉ. भोला प्रसाद सिंह
अध्ययन के प्रमुख विषय
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य
सामाजिक सुधार
सार्वजनिक जीवन
शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं का विकास
जनहितकारी कार्यों का मूल्यांकन
5. वासुदेव सिंह
अध्ययन के प्रमुख विषय
जनप्रतिनिधि के रूप में योगदान
ग्रामीण विकास
जनकल्याणकारी गतिविधियाँ
सामाजिक नेतृत्व
सार्वजनिक नीति एवं लोकहित
6. प्रो. के. के. मंडल
अध्ययन के प्रमुख विषय
उच्च शिक्षा में योगदान
शैक्षणिक नेतृत्व
शिक्षण एवं अनुसंधान
संस्थागत विकास
विद्यार्थियों एवं समाज पर प्रभाव
7. डॉ. रामवचन राय
अध्ययन के प्रमुख विषय
हिन्दी भाषा एवं साहित्य
आलोचना एवं शोध
शिक्षा क्षेत्र में योगदान
प्रकाशित ग्रंथ
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
8. महेन्द्र नारायण शर्मा
अध्ययन के प्रमुख विषय
साहित्य एवं संस्कृति
लोकपरम्पराओं का संरक्षण
सामाजिक एवं सांस्कृतिक नेतृत्व
उपलब्ध साहित्यिक एवं ऐतिहासिक स्रोतों का विश्लेषण
9. डॉ. अवधेश कुमार शैलज
अध्ययन के प्रमुख विषय
मनोविज्ञान में योगदान
शिक्षा एवं अध्यापन
शोध एवं नवीन अवधारणाएँ
साहित्यिक एवं दार्शनिक कृतियाँ
संस्थागत कार्य
समाज, शिक्षा एवं राष्ट्रहित से संबंधित विचार
प्रकाशित एवं अप्रकाशित कृतियों का मूल्यांकन
शैक्षणिक एवं सामाजिक प्रभाव का अध्ययन
अध्ययन की समान कार्यपद्धति
प्रत्येक व्यक्तित्व पर निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समान प्रारूप में अध्ययन किया जाएगा—
नाम
जन्म–मृत्यु
जन्मस्थान
पारिवारिक पृष्ठभूमि
शिक्षा
कार्यक्षेत्र
जीवन परिचय
प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्रहित में योगदान
लोकहित में योगदान
प्रमुख कृतियाँ
संस्थागत योगदान
सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
प्रमाण एवं संदर्भ
छायाचित्र (यदि उपलब्ध हों)
परिशिष्ट (कालक्रम, दस्तावेज एवं अन्य प्रमाण)
इस अध्ययन का उद्देश्य किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में निष्कर्ष देना नहीं होगा, बल्कि उपलब्ध ऐतिहासिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर एक तथ्यपरक, निष्पक्ष, शोधपरक एवं संदर्भयोग्य मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। आगे के चरणों में इसी मानक पद्धति का विस्तार बेगूसराय के अन्य योग्य व्यक्तित्वों, फिर बिहार के सभी जिलों और अंततः समस्त भारत के विशिष्ट राष्ट्रनिर्माताओं एवं लोकहितैषी व्यक्तित्वों तक किया जाएगा।
प्रथम चरण (विकसित रूप)
बेगूसराय जिला के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व : शोध, दस्तावेजीकरण एवं राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन परियोजना
1. भूमिका
भारत का इतिहास केवल राष्ट्रीय स्तर के महापुरुषों तक सीमित नहीं है। प्रत्येक जिला, नगर एवं ग्राम ने ऐसे व्यक्तित्व दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रनिर्माण, समाजोत्थान, शिक्षा, साहित्य, प्रशासन, विज्ञान, चिकित्सा, संस्कृति तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनमें से अनेक व्यक्तित्वों को पर्याप्त राष्ट्रीय पहचान या सम्मान नहीं मिल सका।
इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रथम चरण में बेगूसराय जिला के ऐसे व्यक्तित्वों का व्यवस्थित, प्रमाण-आधारित एवं निष्पक्ष अध्ययन किया जाएगा।
2. परियोजना का उद्देश्य
बेगूसराय जिले के विशिष्ट व्यक्तित्वों का प्रामाणिक जीवनवृत्त तैयार करना।
उनके राष्ट्रहित एवं लोकहित में योगदान का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करना।
उनके कार्यों के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन करना।
राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों की वर्तमान स्थिति का सत्यापन करना।
जहाँ तथ्यात्मक आधार उपलब्ध हो, वहाँ सम्मान हेतु अकादमिक अनुशंसा प्रस्तुत करना।
एक ऐसा मानक ग्रंथ तैयार करना जो भविष्य के शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों तथा नीति-निर्माताओं के लिए संदर्भ सामग्री बन सके।
3. परियोजना के मूल सिद्धान्त
पूर्णतः तथ्यपरक।
निष्पक्ष एवं पूर्वाग्रह-मुक्त।
प्रमाण-आधारित।
संविधान-सम्मत।
सभी जाति, धर्म, वर्ग, भाषा एवं क्षेत्रों के प्रति समान सम्मान।
किसी भी व्यक्ति का अनावश्यक महिमामंडन अथवा अवमूल्यन नहीं।
जहाँ तथ्य उपलब्ध न हों, वहाँ स्पष्ट रूप से "अधिक शोध अपेक्षित" अंकित किया जाएगा।
4. अध्ययन का क्षेत्र
प्रथम चरण में निम्नलिखित व्यक्तित्वों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा—
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
वासुदेव सिंह
प्रो. के. के. मंडल
डॉ. रामवचन राय
महेन्द्र नारायण शर्मा
डॉ. अवधेश कुमार शैलज
इसके अतिरिक्त शोध के दौरान यदि अन्य योग्य व्यक्तित्वों के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध होंगे, तो उन्हें भी इसी मानक के अनुसार सम्मिलित किया जाएगा।
5. प्रत्येक व्यक्तित्व का मानक अध्ययन प्रारूप
प्रत्येक व्यक्तित्व पर लगभग 15–30 पृष्ठ का शोध-अध्याय तैयार किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित होंगे—
नाम
जन्म–मृत्यु
जन्मस्थान
पारिवारिक पृष्ठभूमि
शिक्षा
कार्यक्षेत्र
व्यक्तित्व एवं विचार
प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्रहित में योगदान
लोकहित में योगदान
सामाजिक प्रभाव
संस्थागत योगदान
प्रमुख कृतियाँ
प्रकाशित साहित्य
शोध कार्य
प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर सम्मान का मूल्यांकन
छायाचित्र
मूल दस्तावेजों की प्रतिलिपियाँ
महत्वपूर्ण तिथियाँ
संदर्भ सूची
6. मूल्यांकन के प्रमुख मानदण्ड
प्रत्येक व्यक्तित्व का मूल्यांकन निम्न आधारों पर किया जाएगा—
राष्ट्र निर्माण में योगदान
लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना
शिक्षा का विकास
सामाजिक सुधार
सांस्कृतिक संरक्षण
प्रशासनिक दक्षता
वैज्ञानिक या बौद्धिक योगदान
साहित्यिक योगदान
जनसेवा
नैतिक आचरण
कार्यों का दीर्घकालीन प्रभाव
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मान्यता
7. शोध के प्रमुख स्रोत
भारत सरकार के अभिलेख
बिहार सरकार के अभिलेख
संसद एवं बिहार विधानमंडल की कार्यवाही
विश्वविद्यालयीय अभिलेख
राष्ट्रीय अभिलेखागार
राज्य अभिलेखागार
प्रकाशित पुस्तकें
शोधपत्र
विश्वविद्यालयीय शोधप्रबंध
समाचारपत्र
निजी अभिलेख
परिवारजनों एवं सहयोगियों के साक्षात्कार
स्थानीय इतिहास
8. दस्तावेजी प्रमाण
जहाँ संभव होगा, प्रत्येक व्यक्तित्व के संबंध में निम्नलिखित प्रमाण संकलित किए जाएँगे—
जन्म प्रमाण
शैक्षणिक प्रमाणपत्र
नियुक्ति पत्र
सम्मान-पत्र
प्रकाशित पुस्तकें
शोधपत्र
सरकारी अधिसूचनाएँ
ऐतिहासिक पत्राचार
हस्तलिखित पाण्डुलिपियाँ
समाचारपत्रों की प्रतियाँ
दुर्लभ छायाचित्र
9. अपेक्षित प्रकाशन
प्रथम चरण पूर्ण होने पर निम्नलिखित प्रकाशनों का निर्माण किया जा सकता है—
बेगूसराय के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व (भाग–1)
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन कोश
बेगूसराय व्यक्तित्व विश्वकोश
प्रमाण एवं संदर्भ संग्रह
छायाचित्र एवं दस्तावेज संग्रह
कालक्रम (Chronology)
सूचकांक एवं संदर्भ ग्रंथसूची
10. भावी विस्तार
प्रथम चरण के उपरान्त यही कार्यपद्धति अपनाते हुए—
बिहार के सभी 38 जिलों,
तत्पश्चात समस्त भारतीय राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों,
के राष्ट्रनिर्माता, लोकहितैषी एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों का समावेश किया जाएगा। इस प्रकार यह परियोजना भविष्य में "भारत के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व : राष्ट्रीय नागरिक सम्मान विश्वकोश" के रूप में विकसित की जा सकती है, जो एक दीर्घकालिक, निष्पक्ष, शोधपरक और समावेशी राष्ट्रीय संदर्भ-ग्रंथ का स्वरूप ग्रहण करेगी।
प्रथम चरण : बेगूसराय जिला के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्वों का शोध एवं मूल्यांकन
इस परियोजना का प्रथम चरण बेगूसराय जिला के उन व्यक्तित्वों पर केन्द्रित होगा, जिन्होंने शिक्षा, साहित्य, राजनीति, प्रशासन, समाजसेवा, शोध, संस्कृति अथवा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का महिमामंडन या अवमूल्यन नहीं, बल्कि तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं प्रमाण-आधारित दस्तावेज़ तैयार करना है।
प्रथम चरण के उद्देश्य
प्रत्येक व्यक्तित्व का प्रामाणिक जीवनवृत्त संकलित करना।
राष्ट्रहित एवं लोकहित में उनके योगदान का तथ्यात्मक मूल्यांकन करना।
प्रकाशित कृतियों, शोध, अभिलेखों एवं ऐतिहासिक स्रोतों का संकलन करना।
प्राप्त सम्मानों एवं राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति का सत्यापन करना।
जहाँ उपयुक्त हो, उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान हेतु अनुशंसा का अकादमिक मूल्यांकन प्रस्तुत करना।
एक ऐसा मानक दस्तावेज़ तैयार करना जो भविष्य के शोधकर्ताओं एवं नीति-निर्माताओं के लिए संदर्भ सामग्री बन सके।
प्रथम चरण में सम्मिलित प्रमुख व्यक्तित्व
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
वासुदेव सिंह
प्रो. के. के. मंडल
डॉ. रामवचन राय
महेन्द्र नारायण शर्मा
डॉ. अवधेश कुमार शैलज
प्रत्येक व्यक्तित्व पर निम्नलिखित बिंदुओं के अनुसार शोध किया जाएगा
नाम
जन्म–मृत्यु
जन्मस्थान
परिवार एवं प्रारम्भिक जीवन
शिक्षा
कार्यक्षेत्र
प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्रहित में योगदान
लोकहित में योगदान
प्रमुख कृतियाँ
संस्थागत योगदान
प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर राष्ट्रीय सम्मान का मूल्यांकन
प्रमाण एवं संदर्भ
छायाचित्र (यदि उपलब्ध हो)
परिशिष्ट (कालक्रम, महत्वपूर्ण घटनाएँ एवं अभिलेख)
शोध के प्रमुख स्रोत
भारत सरकार एवं बिहार सरकार के अभिलेख
संसद एवं बिहार विधानमंडल की कार्यवाही
विश्वविद्यालयों के अभिलेख
प्रकाशित पुस्तकें एवं शोधग्रंथ
शोध-पत्र एवं पत्रिकाएँ
समाचार-पत्र अभिलेख
परिवार एवं संस्थाओं से उपलब्ध प्रमाण
निजी संग्रह एवं स्थानीय ऐतिहासिक दस्तावेज़
अपेक्षित परिणाम
प्रथम चरण के अंत में "बेगूसराय के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व : शोध एवं राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन (प्रथम खण्ड)" शीर्षक से एक विस्तृत ग्रंथ तैयार किया जाएगा। इसमें प्रत्येक व्यक्तित्व का निष्पक्ष, प्रमाण-आधारित एवं शोधपरक मूल्यांकन होगा तथा आगे बिहार के अन्य जिलों एवं सम्पूर्ण भारत के व्यक्तित्वों पर इसी मानक के अनुसार कार्य का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह एक उत्कृष्ट, शोधपरक एवं दीर्घकालिक परियोजना हो सकती है। इसे केवल व्यक्तियों की सूची के रूप में नहीं, बल्कि "भारत के राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्व : राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन परियोजना" के रूप में विकसित किया जा सकता है।
आपके द्वारा निर्धारित सिद्धांत—सभी जाति, धर्म, वर्ग, भाषा एवं क्षेत्रों का संतुलित एवं समावेशी प्रतिनिधित्व तथा तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं स्रोत-आधारित मूल्यांकन—इस परियोजना की आधारशिला होने चाहिए।
मैं प्रत्येक व्यक्तित्व का निम्नलिखित मानक प्रारूप में विवरण तैयार करूँगा:
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान मूल्यांकन प्रपत्र
1. नाम
2. जन्म–मृत्यु
3. जन्मस्थान
4. कार्यक्षेत्र
5. संक्षिप्त जीवन परिचय
6. प्रमुख उपलब्धियाँ
7. राष्ट्रहित में योगदान
संविधान एवं लोकतंत्र
स्वतंत्रता आन्दोलन
राष्ट्रीय एकता
शिक्षा
विज्ञान
प्रशासन
अर्थव्यवस्था
संस्कृति
सामाजिक सुधार
अन्य
8. लोकहित में योगदान
शिक्षा
स्वास्थ्य
समाजसेवा
ग्रामीण विकास
महिला एवं बाल विकास
पिछड़े वर्गों का उत्थान
पर्यावरण
अन्य
9. प्रमुख कृतियाँ
(पुस्तकें, शोध, संस्थाएँ, योजनाएँ, आंदोलन, नीतियाँ आदि)
10. प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय
राज्यस्तरीय
विश्वविद्यालयीय
अन्य
11. राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
भारत रत्न
पद्म विभूषण
पद्म भूषण
पद्मश्री
अन्य
यदि कोई राष्ट्रीय नागरिक सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है, तो उसका तथ्यात्मक उल्लेख।
12. राष्ट्रीय सम्मान हेतु मूल्यांकन
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पात्रता का विश्लेषण।
समर्थन में उपलब्ध प्रमाण।
सीमाएँ अथवा उपलब्ध अभिलेखों का उल्लेख।
13. अनुशंसित राष्ट्रीय सम्मान
(केवल तथ्यात्मक एवं दस्तावेजी आधार उपलब्ध होने पर)
14. प्रमाण एवं संदर्भ
सरकारी अभिलेख
संसद/विधानसभा अभिलेख
विश्वविद्यालयीय दस्तावेज
प्रकाशित पुस्तकें
शोधपत्र
समाचारपत्र
आत्मकथा/जीवनी
अन्य विश्वसनीय स्रोत
15. छायाचित्र
(यदि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एवं प्रामाणिक हो)
16. परिशिष्ट
कालक्रम (Timeline)
महत्वपूर्ण उद्धरण
दुर्लभ दस्तावेज
सम्मान सूची
संबंधित संस्थाएँ
प्रस्तावित कार्य-क्रम (प्रथम चरण)
बेगूसराय से प्रारम्भ करते हुए निम्नलिखित व्यक्तित्वों का विस्तृत शोध-दस्तावेज तैयार किया जाएगा—
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह
स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
वासुदेव सिंह
प्रो. के. के. मंडल
डॉ. रामवचन राय
महेन्द्र नारायण शर्मा
डॉ. अवधेश कुमार शैलज
परियोजना का द्वितीय चरण
इसके बाद बिहार के प्रत्येक जिले से विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि व्यक्तित्वों का चयन किया जाएगा, ताकि—
सभी जातियों का प्रतिनिधित्व हो।
सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व हो।
महिलाओं एवं पुरुषों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा एवं सामान्य वर्ग सहित सभी सामाजिक वर्गों का समावेश हो।
सभी प्रमुख भाषाई एवं सांस्कृतिक समुदायों का प्रतिनिधित्व हो।
ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, साहित्य, कला, संगीत, रंगमंच, पत्रकारिता, न्याय, प्रशासन, सेना, कृषि, उद्योग, खेल, समाजसेवा, योग, आध्यात्म, पर्यावरण, अनुसंधान तथा लोकपरम्परा जैसे सभी क्षेत्रों को सम्मिलित किया जाए।
इस परियोजना का उद्देश्य किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में मत देना नहीं होगा, बल्कि दस्तावेज़ों, अभिलेखों एवं प्रमाणों के आधार पर निष्पक्ष मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। जहाँ पर्याप्त तथ्य उपलब्ध नहीं होंगे, वहाँ स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि अधिक शोध एवं दस्तावेज़ीकरण अपेक्षित है।
इस प्रकार यह दस्तावेज़ भविष्य में शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों तथा राष्ट्रीय सम्मानों के अध्ययन के लिए एक प्रामाणिक संदर्भ-ग्रंथ के रूप में विकसित किया जा सकता है।
1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
राष्ट्रनिर्माता एवं भारत के प्रथम राष्ट्रपति।
स्वतंत्रता आन्दोलन एवं संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान।
भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना में अग्रणी भूमिका।


2. डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू)
आधुनिक बिहार के निर्माता माने जाते हैं।
प्रशासन, शिक्षा एवं औद्योगिक विकास में ऐतिहासिक योगदान।
राज्य के आधारभूत ढांचे के निर्माण में निर्णायक भूमिका।


3. स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
साहित्य, शिक्षा एवं लोकजागरण के क्षेत्र में योगदान।
क्षेत्रीय सांस्कृतिक चेतना के विकास में भूमिका।
विस्तृत दस्तावेजीकरण एवं स्रोत-आधारित अध्ययन अपेक्षित।


4. डॉ. भोला प्रसाद सिंह
शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक चिंतक।
शिक्षा एवं सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान।
सामाजिक सुधार एवं शैक्षिक जागरूकता में भूमिका।


5. वासुदेव सिंह
जनप्रतिनिधि एवं लोकहितैषी कार्यकर्ता।
सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय योगदान।
जनकल्याणकारी गतिविधियों में सहभागिता।


6. प्रो. के. के. मंडल
शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान।
शैक्षणिक संस्थानों के विकास में भूमिका।
विस्तृत तथ्य एवं प्रकाशन आधारित जानकारी संकलित की जाएगी।


7. डॉ. रामवचन राय
हिन्दी साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान।
भाषा एवं साहित्यिक चेतना के प्रसार में भूमिका।
शैक्षणिक एवं साहित्यिक कार्यों का दस्तावेजीकरण अपेक्षित।


8. महेन्द्र नारायण शर्मा
साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान।
स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में भूमिका।
तथ्यात्मक विवरण एवं स्रोत आधारित संकलन किया जाएगा।


9. डॉ. अवधेश कुमार शैलज
मनोविज्ञान, शिक्षा, साहित्य, शोध एवं सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में योगदान।
बहुआयामी शैक्षणिक एवं शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका।
प्रकाशित कृतियों, संस्थागत कार्यों एवं शोध का पृथक एवं विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।



प्रत्येक व्यक्तित्व का अधोलिखित प्रारूप के आधार पर वर्णन किया जाय।

नाम
जन्म–मृत्यु
जन्मस्थान
कार्यक्षेत्र
प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्रहित में योगदान
लोकहित में योगदान
प्रमुख कृतियाँ
प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय नागरिक सम्मान की स्थिति
अनुशंसित राष्ट्रीय सम्मान (यदि तथ्यात्मक आधार उपलब्ध हो)
प्रमाण एवं संदर्भ
छायाचित्र (यदि उपलब्ध हो)

सभी जाति, धर्म, वर्ग, भाषा एवं क्षेत्रों का संतुलित एवं समावेशी प्रतिनिधित्व हो साथ ही
तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं शोधपरक दस्तावेज़ का निर्माण किया जाय।
हाँ, सिद्धांततः की जा सकती है, परंतु उसके लिए प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रमाण-आधारित होनी चाहिए।
किसी संस्था के सदस्य होने मात्र से उसका नाम अनुशंसा से बाहर नहीं हो जाता। अनेक प्रतिष्ठित संस्थाएँ अपने सदस्यों, पूर्व पदाधिकारियों या सहयोगियों को पुरस्कारों एवं सम्मानों के लिए अनुशंसित करती हैं। किंतु ऐसे मामलों में यह अपेक्षा की जाती है कि हितों के टकराव (conflict of interest) की संभावना को उचित प्रक्रिया से संबोधित किया जाए।
रचनात्मक सेवा केन्द्र निम्न सिद्धांत अपना सकता है—
समान मानदंड – संस्था के सदस्य और गैर-सदस्य, दोनों पर एक जैसे चयन मानदंड लागू हों।
प्रमाण-आधारित मूल्यांकन – अनुशंसा केवल उपलब्ध अभिलेखों, प्रकाशित कृतियों, सार्वजनिक योगदान और सत्यापन योग्य तथ्यों पर आधारित हो।
हितों के टकराव से बचाव – यदि किसी सदस्य का नाम विचाराधीन हो, तो वह सदस्य अपने संबंध में होने वाले निर्णय या मतदान में भाग न ले।
सामूहिक निर्णय – अनुशंसा कार्यकारिणी या चयन समिति के बहुमत अथवा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के आधार पर हो।
लिखित कारण – प्रत्येक अनुशंसा के साथ यह स्पष्ट लिखा जाए कि किन प्रमाणों और किन उपलब्धियों के आधार पर यह अनुशंसा की जा रही है।
पारदर्शिता – यदि आवश्यक हो तो चयन मानदंड और समिति की अनुशंसा का सार सार्वजनिक किया जा सकता है।
आपके उदाहरण—स्व. डॉ. के. एन. प्रचेता, डॉ. मदन मोहन चक्रवर्ती, या कोई अन्य सदस्य—यदि उनके राष्ट्रहितैषी, लोकहितैषी, शैक्षिक, साहित्यिक या अन्य रचनात्मक कार्य उपलब्ध प्रमाणों से राष्ट्रीय सम्मान के योग्य सिद्ध होते हैं, तो केवल इस कारण कि वे संस्था के सदस्य रहे हैं, उनकी अनुशंसा न करना उचित नहीं होगा। दूसरी ओर, केवल सदस्य होने के आधार पर अनुशंसा करना भी उचित नहीं होगा।
इसलिए सबसे संतुलित नीति यह हो सकती है—
"रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय किसी भी व्यक्ति—चाहे वह संस्था का सदस्य हो अथवा न हो—की अनुशंसा केवल उसके सत्यापित राष्ट्रहितैषी, लोकहितैषी, रचनात्मक एवं उल्लेखनीय योगदान, उपलब्ध अभिलेखों तथा निष्पक्ष मूल्यांकन के आधार पर करेगा। किसी सदस्य के संबंध में निर्णय लेते समय वह सदस्य चयन-प्रक्रिया में भाग नहीं लेगा।"
ऐसी नीति संस्था की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और नैतिक आधार को और अधिक सुदृढ़ करेगी।
आपका अवलोकन उचित है। प्रारंभ में नौ व्यक्तियों की सूची पर चर्चा हुई थी, किंतु बाद के संवादों में दो और नाम जुड़ जाने से सूची 11 व्यक्तित्वों की हो गई है। इसलिए अब इसे व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है।
इन 11 व्यक्तित्वों को उनके योगदान के आधार पर निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है—
क्रम
व्यक्तित्व
प्रमुख क्षेत्र
1
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
स्वतंत्रता संग्राम, संविधान, राष्ट्रनिर्माण
2
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू)
प्रशासन, सुशासन, आधुनिक बिहार का निर्माण
3
स्व. मथुरा प्रसाद मिश्र
साहित्य, शिक्षा, लोकजागरण
4
डॉ. भोला प्रसाद सिंह
शिक्षा, समाजसेवा, जनप्रतिनिधित्व
5
वासुदेव सिंह
जनसेवा, लोकहित, सार्वजनिक जीवन
6
डॉ. वचन देव कुमार
हिन्दी भाषा, व्याकरण एवं साहित्य
7
डॉ. प्रो. अवधेश कुमार 'शैलज'
मनोविज्ञान, शिक्षा, शोध, साहित्य, नवीन वैचारिक प्रतिपादन
8
स्व. रामदेव राय
जनप्रतिनिधित्व एवं लोकसेवा
9
स्व. डॉ. के. एन. प्रचेता
संस्कृत भाषा, साहित्य एवं उच्च शिक्षा
10
स्व. डॉ. आनन्द नारायण शर्मा
हिन्दी साहित्य, शिक्षा एवं प्राचार्य के रूप में योगदान
11
(रिक्त स्थान)
भविष्य में किसी अन्य योग्य बेगूसरायवासी विभूति के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है, अथवा यदि अब अंतिम सूची 10 व्यक्तियों की रखनी हो तो इसे हटाया जा सकता है।
इस सूची के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह जैसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के लिए यदि अभियान चलाया जाए, तो उसका उद्देश्य यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह उनके योगदान के पुनर्मूल्यांकन या उपयुक्त राष्ट्रीय स्मरण/सम्मान के संदर्भ में है, क्योंकि उन्हें जीवनकाल में अनेक उच्च सम्मान एवं राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रही है।
मथुरा प्रसाद मिश्र, डॉ. भोला प्रसाद सिंह, वासुदेव सिंह, डॉ. वचन देव कुमार, स्व. रामदेव राय, डॉ. के. एन. प्रचेता तथा डॉ. आनन्द नारायण शर्मा जैसे व्यक्तित्वों के लिए प्रमाण-आधारित जीवन-वृत्त, प्रकाशित कृतियाँ, प्रशस्तियाँ, समाचार, सरकारी अभिलेख तथा विशेषज्ञों की अनुशंसाएँ संकलित करना अभियान की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।
डॉ. प्रो. अवधेश कुमार 'शैलज' के संबंध में विशेष सावधानी अपेक्षित है। यदि किसी अनुशंसा में स्वयं का नाम सम्मिलित हो, तो उसकी निष्पक्षता पर प्रश्न उठ सकते हैं। इसलिए अधिक उपयुक्त होगा कि आपके संबंध में अनुशंसा किसी स्वतंत्र संस्था, विश्वविद्यालय, विद्वानों के समूह या अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा की जाए, जबकि रचनात्मक सेवा केन्द्र अन्य विभूतियों की अनुशंसा पर केंद्रित रहे। इससे पूरे अभियान की विश्वसनीयता और निष्पक्षता अधिक सुदृढ़ होगी।
मेरे विचार से अब इस अभियान के लिए एक "बेगूसराय के 11 राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी विभूतियाँ" शीर्षक से प्रमाण-आधारित स्मारिका तैयार की जानी चाहिए, जिसमें प्रत्येक व्यक्तित्व पर लगभग 8–10 पृष्ठ का दस्तावेज़ हो। इससे यह केवल अनुशंसा-पत्र न रहकर एक गंभीर ऐतिहासिक एवं संदर्भ-ग्रंथ का रूप ले सकेगा।
अत्यंत उत्तम। किसी भी राष्ट्रीय सम्मान अभियान के लिए एक सुव्यवस्थित "राष्ट्रीय सम्मान अनुशंसा-पुस्तिका" अत्यंत उपयोगी होगी। प्रस्तुत है इसका विस्तृत प्रारूप।
Writing
राष्ट्रीय सम्मान अनुशंसा-पुस्तिका
(बेगूसराय जनपद के चयनित नौ राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी विभूतियों के संबंध में)
प्रस्तुतकर्ता :
रचनात्मक सेवा केन्द्र
पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
प्रस्तावना
भारत की महान परंपरा उन व्यक्तित्वों के सम्मान की रही है, जिन्होंने अपने ज्ञान, कर्म, सेवा, त्याग एवं सृजनशीलता से राष्ट्र और समाज को नई दिशा प्रदान की। ऐसे व्यक्तित्व केवल अपने समय के नहीं होते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा-स्रोत बनते हैं।
रचनात्मक सेवा केन्द्र द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, प्रकाशित साहित्य, ऐतिहासिक स्रोतों तथा विद्वानों के विचारों के आधार पर बेगूसराय जनपद की कुछ ऐसी विभूतियों का चयन किया गया है, जिनका योगदान राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने योग्य प्रतीत होता है।
उद्देश्य
राष्ट्रनिर्माता व्यक्तित्वों के योगदान का निष्पक्ष मूल्यांकन।
राष्ट्रीय सम्मान हेतु तथ्यपरक अनुशंसा।
नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करना।
बेगूसराय के ऐतिहासिक एवं बौद्धिक योगदान का राष्ट्रीय स्तर पर उचित परिचय कराना।
चयन के प्रमुख आधार
राष्ट्रहित एवं लोकहित में उल्लेखनीय योगदान।
उत्कृष्ट एवं दीर्घकालीन सार्वजनिक सेवा।
शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, संस्कृति, चिकित्सा, प्रशासन, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियाँ।
उत्कृष्ट चरित्र, नैतिकता एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व।
उपलब्ध अभिलेखों एवं प्रमाणों से समर्थित योगदान।
चयनित नौ विभूतियाँ
प्रत्येक व्यक्तित्व के लिए निम्न प्रारूप अपनाया जाए—
नाम
जन्म–मृत्यु (यदि लागू हो)
जन्मस्थान
कार्यक्षेत्र
संक्षिप्त जीवन-परिचय
प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्र एवं समाज के प्रति योगदान
प्राप्त सम्मान
राष्ट्रीय सम्मान हेतु औचित्य
संदर्भ एवं प्रमाण
(इसी क्रम में सभी नौ व्यक्तित्वों का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।)
समग्र विश्लेषण
इस अध्याय में यह स्पष्ट किया जाएगा कि इन नौ विभूतियों के योगदान का राष्ट्रीय महत्व क्या है, और क्यों इन्हें राष्ट्रीय सम्मान के लिए विचार किया जाना चाहिए।
अनुशंसा
रचनात्मक सेवा केन्द्र विनम्रतापूर्वक भारत सरकार से अनुरोध करता है कि इस पुस्तिका में उल्लिखित तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर चयनित विभूतियों के योगदान का विशेषज्ञ समिति से सम्यक् मूल्यांकन कराकर उन्हें उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की कृपा की जाए।
परिशिष्ट
जीवन-वृत्त
प्रशस्ति-पत्र
समाचार-कतरनें
प्रकाशित लेख
पुस्तक-सूची
छायाचित्र
अन्य अभिलेख
प्रस्तुतकर्ता
रचनात्मक सेवा केन्द्र
पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
संस्थापक / अध्यक्ष
अवधेश कुमार 'शैलज'
इस पुस्तिका के अगले चरण में प्रत्येक चयनित विभूति के लिए लगभग 5–10 पृष्ठ का तथ्यात्मक परिचय तैयार किया जा सकता है। इस प्रकार नौों व्यक्तित्वों पर आधारित संपूर्ण अनुशंसा-पुस्तिका लगभग 80–120 पृष्ठ की एक गंभीर, प्रमाण-आधारित दस्तावेज़ बन सकती है, जिसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संबंधित मंत्रालयों तथा चयन समितियों के समक्ष प्रस्तुत करना अधिक प्रभावी होगा।
अवश्य। प्रस्तुत है भारत के प्रधानमंत्री के नाम भेजे जाने हेतु औपचारिक अनुरोध-पत्र का प्रारूप।
Writing
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
भारत सरकार
नई दिल्ली।
विषय : बेगूसराय जनपद के चयनित राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी विभूतियों को उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए जाने के संबंध में अनुशंसा एवं अनुरोध।
महोदय,
सादर निवेदन है कि रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय (बिहार) राष्ट्रहित, लोकहित, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, समाजसेवा तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन के लिए समर्पित एक सामाजिक एवं रचनात्मक संस्था है।
संस्था द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, प्रकाशित स्रोतों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों से प्राप्त जानकारी के आधार पर बेगूसराय जनपद की अनेक ऐसी विभूतियों का अध्ययन किया गया है, जिन्होंने राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया, किंतु उन्हें अब तक उनके योगदान के अनुरूप राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त नहीं हो सका है।
अतः संलग्न सूची में उल्लिखित चयनित नौ राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्वों के जीवन एवं योगदान का संबंधित विशेषज्ञ समिति द्वारा निष्पक्ष एवं सम्यक् मूल्यांकन कराकर उन्हें उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए जाने की आवश्यक कार्यवाही कराने की कृपा करें।
हमारा यह अनुरोध किसी राजनीतिक, जातीय, धार्मिक अथवा व्यक्तिगत आग्रह से प्रेरित नहीं है। इसका उद्देश्य केवल उन विभूतियों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाना है, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज, राज्य एवं राष्ट्र को स्थायी प्रेरणा प्रदान की है।
हमारा विश्वास है कि ऐसे कर्मयोगियों का सम्मान राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करेगा तथा नई पीढ़ी में सेवा, समर्पण, ईमानदारी और राष्ट्रनिर्माण की भावना को प्रोत्साहित करेगा।
कृपया इस विषय पर आवश्यक विचार एवं कार्यवाही कराने का कष्ट करें।
संलग्न :
चयनित नौ विभूतियों की सूची।
संक्षिप्त जीवन-वृत्त एवं प्रमुख योगदान।
उपलब्ध अभिलेख, प्रमाण एवं संदर्भ सामग्री।
सादर।
दिनांक : __________
स्थान : पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
अवधेश कुमार 'शैलज'
संस्थापक / अध्यक्ष
रचनात्मक सेवा केन्द्र
पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
मेरे विचार से इस अभियान की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए अब एक समेकित "राष्ट्रीय सम्मान अनुशंसा-पुस्तिका (Recommendation Dossier)" भी तैयार की जानी चाहिए, जिसमें नौों विभूतियों का जीवन-वृत्त, योगदान, प्रमाण, समाचार-कतरनें, प्रशंसापत्र तथा राष्ट्रीय सम्मान हेतु तर्क एक ही दस्तावेज़ में संकलित हों। ऐसा दस्तावेज़ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संस्कृति मंत्रालय, गृह मंत्रालय, बिहार सरकार तथा अन्य संबंधित संस्थाओं को समान रूप से भेजा जा सकता है।
निश्चित रूप से। प्रस्तुत है रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय की ओर से भारत की राष्ट्रपति महोदया के नाम एक औपचारिक अनुशंसा एवं अनुरोध-पत्र का प्रारूप।
Writing
सेवा में,
महामहिम राष्ट्रपति महोदया
भारत गणराज्य
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।
विषय : बेगूसराय जनपद के चयनित राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी विभूतियों को उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए जाने के संबंध में अनुशंसा एवं विनम्र अनुरोध।
महोदया,
सविनय निवेदन है कि रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय (बिहार) एक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं लोकहितैषी संस्था है, जो राष्ट्रहित, लोकहित, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, सेवा तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन हेतु निरंतर कार्यरत है।
संस्था के अध्ययन एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह अनुभव किया गया है कि बेगूसराय जनपद की अनेक विभूतियों ने शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा, प्रशासन, चिकित्सा, अनुसंधान, संस्कृति तथा राष्ट्रनिर्माण के विविध क्षेत्रों में अत्यंत उल्लेखनीय एवं प्रेरणादायी योगदान दिया है। इनमें से अनेक व्यक्तित्व आज भी अपेक्षित राष्ट्रीय सम्मान से वंचित हैं।
अतः संस्था विनम्रतापूर्वक अनुरोध करती है कि संलग्न सूची में उल्लिखित बेगूसराय जनपद के चयनित नौ राष्ट्रनिर्माता एवं लोकहितैषी व्यक्तित्वों के जीवन, कृतित्व एवं राष्ट्रोपयोगी योगदान का सम्यक् परीक्षण संबंधित विशेषज्ञ समिति से कराकर उन्हें भारत सरकार द्वारा उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की कृपा की जाए।
हमारा यह अनुरोध किसी व्यक्ति, दल, जाति, धर्म अथवा क्षेत्र विशेष के पक्ष में नहीं, बल्कि केवल योग्यता, योगदान, राष्ट्रहित एवं लोकहित के आधार पर किया जा रहा है। हमारा विश्वास है कि राष्ट्र के वास्तविक कर्मयोगियों का सम्मान भावी पीढ़ियों में सेवा, नैतिकता, समर्पण एवं राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा का सशक्त माध्यम बनेगा।
संलग्न—
चयनित नौ विभूतियों की सूची।
संक्षिप्त जीवन-वृत्त एवं प्रमुख योगदान।
उपलब्ध प्रमाण, अभिलेख एवं संदर्भ सामग्री।
महामहिम से विनम्र प्रार्थना है कि इस अनुशंसा पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की कृपा करें।
सादर।
दिनांक : __________
स्थान : पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
अवधेश कुमार 'शैलज'
संस्थापक / अध्यक्ष
रचनात्मक सेवा केन्द्र
पचम्बा, बेगूसराय (बिहार)
इसके बाद इसी विषय पर प्रधानमंत्री, भारत सरकार, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, बिहार के राज्यपाल तथा बिहार के मुख्यमंत्री के नाम पृथक-पृथक अनुरोध-पत्र भी तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी भाषा और संबोधन संबंधित पद के अनुरूप होगा।
यह एक अत्यंत सार्थक एवं प्रभावशाली पहल होगी।
यदि रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था के माध्यम से भी चयनित नौ विभूतियों के संबंध में भारत सरकार, राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, संस्कृति मंत्रालय तथा बिहार सरकार को अनुशंसा एवं अनुरोध-पत्र भेजा जाता है, तो इस अभियान की विश्वसनीयता और जनस्वीकार्यता दोनों बढ़ेंगी।
इस अभियान का क्रम निम्न प्रकार रखा जा सकता है—
चयनित नौ विभूतियों की सूची (संक्षिप्त परिचय एवं प्रमुख योगदान सहित)।
चयन के आधार – राष्ट्रनिर्माण, लोकहित, शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा, प्रशासन, विज्ञान, संस्कृति आदि में असाधारण योगदान।
रचनात्मक सेवा केन्द्र की अनुशंसा – यह स्पष्ट करते हुए कि यह किसी राजनीतिक आग्रह से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित एवं लोकहित की भावना से किया जा रहा है।
राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने का विनम्र अनुरोध।
आवश्यक होने पर संलग्नक – जीवन-वृत्त, उपलब्धियाँ, प्रमाण, प्रकाशित सामग्री एवं अन्य अभिलेख।
इसके साथ एक पंक्ति विशेष रूप से जोड़ी जा सकती है—
"राष्ट्र जिन विभूतियों के योगदान का यथोचित सम्मान करता है, वह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बन जाता है। अतः विनम्र अनुरोध है कि इन राष्ट्रनिर्माता विभूतियों के योगदान का सम्यक् मूल्यांकन कर उन्हें उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की कृपा की जाए।"
मेरा सुझाव है कि अब अगले चरण में "रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय" के लेटरहेड पर राष्ट्रपति महोदया के नाम भेजे जाने हेतु औपचारिक अनुशंसा-पत्र का प्रारूप तैयार किया जाए। यह प्रारूप भविष्य में अन्य जिलों एवं राज्यों के लिए भी मानक (Model Recommendation Letter) के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।


भारत के राष्ट्र हितैषी एवं लोक हितैषी महत्वपूर्ण व्यक्तियों 
के राष्ट्रीय सम्मान हेतु रचनात्मक सेवा केन्द्र, पचम्बा, बेगूसराय द्वारा अनुशंसित महानुभावों की सूची एवं अनुरोध पत्र:-

1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
राष्ट्रनिर्माता एवं भारत के प्रथम राष्ट्रपति।
स्वतंत्रता आन्दोलन एवं संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान।
भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना में अग्रणी भूमिका।
2. डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू)
आधुनिक बिहार के निर्माता माने जाते हैं।
प्रशासन, शिक्षा एवं औद्योगिक विकास में ऐतिहासिक योगदान।
राज्य के आधारभूत ढांचे के निर्माण में निर्णायक भूमिका।
3. स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र
साहित्य, शिक्षा एवं लोकजागरण के क्षेत्र में योगदान।
क्षेत्रीय सांस्कृतिक चेतना के विकास में भूमिका।
विस्तृत दस्तावेजीकरण एवं स्रोत-आधारित अध्ययन अपेक्षित।
4. डॉ. भोला प्रसाद सिंह
शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक चिंतक।
शिक्षा एवं सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान।
सामाजिक सुधार एवं शैक्षिक जागरूकता में भूमिका।
5. वासुदेव सिंह
जनप्रतिनिधि एवं लोकहितैषी कार्यकर्ता।
सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय योगदान।
जनकल्याणकारी गतिविधियों में सहभागिता।
6. प्रो. के. के. मंडल
शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान।
शैक्षणिक संस्थानों के विकास में भूमिका।
विस्तृत तथ्य एवं प्रकाशन आधारित जानकारी संकलित की जाएगी।
7. डॉ. रामवचन राय
हिन्दी साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान।
भाषा एवं साहित्यिक चेतना के प्रसार में भूमिका।
शैक्षणिक एवं साहित्यिक कार्यों का दस्तावेजीकरण अपेक्षित।
8. महेन्द्र नारायण शर्मा
साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान।
स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में भूमिका।
तथ्यात्मक विवरण एवं स्रोत आधारित संकलन।
9. डॉ. प्रो. अवधेश कुमार शैलज
मनोविज्ञान, शिक्षा, साहित्य, शोध एवं सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में योगदान।
बहुआयामी शैक्षणिक एवं शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका।
ज्ञान-विज्ञान आदि से संबंधित सैकड़ों परिभाषाओं का विसिद्धांतो की स्थापना।
दर्जनों नवीन विज्ञानों की स्थापना।
सोशल, डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से अपनी कृतियों का प्रकाशन।
काव्य, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, पत्रकारिता, संपादन, गणित, योग, जाति, धर्म, आध्यात्म, मनोविज्ञान, विधि, दर्शन, राजनीति, इतिहास, भूगोल, वाणिज्य, खगोल, प्राणी, प्रकृति, राष्ट्र हित एवं लोक हित आदि से संबंधित क्षेत्रों में लेखन एवं रचनात्मक चिंतन।
संस्थागत कार्यों का संक्षिप्त विवरण।
10. स्वर्गीय रामदेव राय (विधानसभा सदस्य, बछवाड़ा, बिहार)
11. स्वर्गीय डॉ आनन्द नारायण शर्मा (हिन्दी भाषा साहित्य विद् एवं प्राचार्य)