सर्व धर्म प्रार्थना
ऊँ कारेश्वरं नमस्तुभ्यं सर्व कल्याणकारकम्।
"अम्ब अक्क अल्ला ह्रंरच:" पाणिनि सुदर्शितम्।।
निर्गुणंं सगुणं सनातनस्य, अवतरणं धर्म दर्शनं।
पश्चिमाभिमुख संस्थिते रहमान अव्यक्त रुपिणं।।
क्रिश्चनस्य गॉड ईसा बाईबिल सुवर्णितम्।
वेद पुराण सुग्रंथ कथितं दयालु समदर्शिनः।।
पूर्णं, सर्वज्ञं, सर्वव्यापी, समर्थं, सर्वधर्म प्रवर्तकम् ।
व्यक्ताव्यक्तं जगदाधारं सृजन मोक्ष प्रदायकम्।।
सच्चिदानन्दं त्रिकालज्ञं त्रिविध ताप विमोचनं।
प्रकृति पुरूषात्मकं स्वयंभू प्रभु भक्त वत्सलं।।
अर्द्ध नारीश्वरं शक्ति, विधि, हरि, हर सुपूजितं।
आयुर्विद्यायशबल नियन्ता, भोग योग वर प्रदायकं।
अन्तर्यामी शैलज स्वामी, कीर्त्ति आरोग्य सुखदायकं।।
आपके द्वारा प्रस्तुत "सर्व धर्म प्रार्थना" एक अत्यंत सुंदर, समन्वयात्मक और आध्यात्मिक रचना है। इसमें विविध धार्मिक धाराओं के प्रमुख तत्वों को एकीकृत करते हुए एक सार्वभौमिक परमसत्ता के प्रति श्रद्धा अर्पित की गई है। यह प्रार्थना धार्मिक सहिष्णुता, समदृष्टि, और सार्वजनीन कल्याण की भावना से परिपूर्ण है। नीचे इसका संक्षिप्त भावार्थ एवं विश्लेषण प्रस्तुत है:
प्रस्तावना एवं भावार्थ:
श्री गणेशाय नमः।
— शुभारंभ हेतु विघ्नहर्ता श्री गणेश को नमन।
1. सार्वभौमिक ईश्वर की वंदना:
ऊँ कारेश्वरं नमस्तुभ्यं सर्व कल्याणकारकम्।
"अम्ब अक्क अल्ला ह्रंरच:" पाणिनि सुदर्शितम्।।
— ओंकारस्वरूप ईश्वर को प्रणाम, जो सबके कल्याण का कारण हैं।
— "अम्ब, अक्क, अल्ला" जैसे विभिन्न नामों में पाणिनि ने ईश्वर के बहुविध रूप को पहचाना है।
2. निर्गुण-सगुण की समन्विति:
निर्गुणं सगुणं सनातनस्य, अवतरणं धर्म दर्शनं।
— परमात्मा निर्गुण (गुण रहित) भी हैं और सगुण (गुणयुक्त) भी, जिनके अवतार धर्म और दर्शन के माध्यम हैं।
3. इस्लाम में रहमान की व्याख्या:
पश्चिमाभिमुख संस्थिते रहमान अव्यक्त रुपिणं।
— रहमान, जो पाश्चात्य दिशा में प्रतिष्ठित हैं, अव्यक्त रूप में भी विराजमान हैं।
4. ईसाई धर्म की व्याख्या:
क्रिश्चनस्य गॉड ईसा बाईबिल सुवर्णितम्।
— ईसाइयों के गॉड (ईश्वर) एवं ईसा मसीह, जिन्हें बाइबिल में स्वर्णाक्षरों में वर्णित किया गया है।
5. वेद-पुराण एवं समदर्शिता:
वेद पुराण सुग्रंथ कथितं दयालु समदर्शिनः।।
— वेद, पुराणों में जो ईश्वर वर्णित हैं, वे दयालु एवं समदर्शी हैं।
6. परमात्मा के गुणों की स्तुति:
पूर्णं, सर्वज्ञं, सर्वव्यापी, समर्थं, सर्वधर्म प्रवर्तकम्।
व्यक्ताव्यक्तं जगदाधारं सृजन मोक्ष प्रदायकम्।
— परमात्मा पूर्ण, सर्वज्ञ, सर्वत्र व्यापक, समर्थ और समस्त धर्मों के प्रेरक हैं। वे ही सृष्टि के आधार हैं, सृजनकर्ता और मोक्षदाता भी।
7. सच्चिदानंद रूप का वर्णन:
सच्चिदानन्दं त्रिकालज्ञं त्रिविध ताप विमोचनं।
प्रकृति पुरूषात्मकं स्वयंभू प्रभु भक्त वत्सलं।
— वे सच्चिदानन्द स्वरूप, तीनों कालों के ज्ञाता, तीन प्रकार के दुःखों के निवारक, प्रकृति-पुरुष से युक्त, स्वयंभू और भक्तों के प्रियतम हैं।
8. शक्ति और त्रिदेवों का समन्वय:
अर्द्ध नारीश्वरं शक्ति, विधि, हरि, हर सुपूजितं।
— वे अर्धनारीश्वर हैं, शक्ति और त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) द्वारा पूजित।
9. आयु, विद्या, बल आदि के दाता:
आयुर्विद्यायशबल नियन्ता, भोग योग वर प्रदायकं।
— वे आयु, विद्या, यश, बल आदि के नियंता हैं, जो भोग और योग दोनों की श्रेष्ठता प्रदान करते हैं।
10. आत्मस्थिति और कृपालुता:
अन्तर्यामी शैलज स्वामी, कीर्त्ति आरोग्य सुखदायकं।।
— वे शैलज (शैलपुत्री) के स्वामी हैं, अन्तर्यामी हैं, और कीर्ति, स्वास्थ्य तथा सुख प्रदान करनेवाले हैं।
संभावित विस्तार:
यह प्रार्थना एक व्यापक "सर्वधर्म समभाव" और एकेश्वरवाद की भावना से परिपूर्ण है। यह धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक स्तर पर समन्वय की प्रेरणा देती है। यदि आप चाहें, तो मैं इस पर—
भक्ति, दार्शनिक, और मनोवैज्ञानिक व्याख्या,
अंग्रेज़ी अनुवाद,
PDF या पुस्तक प्रारूप,
पंक्ति-दर-पंक्ति टीका,
— तैयार कर सकता हूँ।
क्या आप इनमें से किसी रूप में इसका विस्तार या प्रकाशन करना चाहते हैं?
सभी रूपों का
बहुत सुंदर। आप द्वारा प्रस्तुत "सर्व धर्म प्रार्थना" के लिए मैं निम्नलिखित रूपों में विस्तृत कार्य करूँगा:
1. मूल पाठ (संस्कृत/हिंदी)
आपके द्वारा दी गई शुद्ध रचना को सुंदर फॉर्मेट में प्रस्तुत किया जाएगा।
2. शुद्ध अंग्रेज़ी अनुवाद (Literal & Interpretive)
हर श्लोक या पंक्ति का:
Literal Translation – शब्दशः अनुवाद
Interpretive Translation – भावात्मक एवं दार्शनिक अनुवाद
3. टीका (Commentary)
प्रत्येक श्लोक/पंक्ति पर:
भक्ति भाव आधारित व्याख्या
दार्शनिक/आध्यात्मिक दृष्टिकोण – उपनिषद, वेदांत, सार्वभौमिक धर्म चिंतन
मनोवैज्ञानिक अर्थ – यूनिवर्सल माइंड, archetypes, self-realization आदि पर आधारित
समकालीन सामाजिक सन्दर्भ – समावेश, धार्मिक समरसता, अंतर-धार्मिक संवाद
4. सन्दर्भ ग्रंथ/सूत्र
पाणिनि, वेद, पुराण, बाइबिल, कुरान, उपनिषद, गीता आदि से संदर्भ
आवश्यक हो तो फुटनोट्स एवं ग्रंथ-सूची (bibliography)
5. प्रकाशन प्रारूप (Formatting)
पीडीएफ़ फॉर्मेट
पुस्तक के रूप में अध्यायबद्ध संरचना:
प्रस्तावना
मूल पाठ
अनुवाद
व्याख्या
समकालीन संदर्भ
उपसंहार
आगामी कदम:
क्या आप इसके लिए कोई शीर्षक सुझाना चाहेंगे, जैसे:
"सर्वधर्मसमन्वय प्रार्थना"
"ईश्वर के अनेक रूप: एक वंदना"
"Universal Prayer for All Faiths"
क्या लेखक का नाम आप स्वयं रखना चाहते हैं, या “प्रस्तुता: प्रो. शैलज” आदि?
क्या इस पुस्तक का कवर चित्र / प्रतीक चिन्ह / श्लोक भी आप सुझाना चाहेंगे?
मैं प्रारंभिक ड्राफ्ट बनाकर शीघ्र प्रस्तुत करता हूँ। कृपया ऊपर पूछे गए तीन बिंदुओं पर उत्तर दें, ताकि रचना को अंतिम रूप देना आरंभ कर सकूँ।
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