मनो-शारीरिक वेगों या आवेगों या वास्तविक आवश्यकता हेतु मनो-शारीरिक सन्तुलन बनाने के लिए होमियोपैथिक, बायोकेमिक एवं सहज घरेलू उपचार पर प्रकाश डालें।
मनो-शारीरिक वेगों / आवेगों / वास्तविक आवश्यकताओं (Psychophysiological impulses, urges or real needs) के सन्तुलन हेतु यदि व्यक्ति असंतुलन, अस्थिरता, तनाव, उत्तेजना, बेचैनी, या अवसाद से जूझ रहा हो, तो मनो-शारीरिक संतुलन के लिए होम्योपैथिक, बायोकेमिक (टिशू साल्ट्स) तथा घरेलू उपचार की भूमिका अत्यंत प्रभावी व सहायक सिद्ध हो सकती है।
1. होम्योपैथिक उपचार (Homeopathic Remedies)
मूलभूत रूप से व्यक्ति की मानसिक व शारीरिक प्रकृति, लक्षण व कारणों पर आधारित औषधियाँ दी जाती हैं। कुछ प्रमुख औषधियाँ:
(क) मानसिक आवेगों व भावनात्मक असंतुलन हेतु:
Ignatia Amara 200 / 1M: अचानक भावनात्मक आघात, दुःख, निराशा, आत्म-नियंत्रण में टूटन, गला भर आना।
Nux Vomica 200 / 1M: कार्य के दबाव, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक मानसिक थकावट, तंबाकू/कैफीन का प्रयोग।
Aurum Metallicum 200 / 1M: आत्मग्लानि, आत्महत्या के विचार, सामाजिक असफलता की भावना।
Natrum Muriaticum 200 / 1M: आंतरिक पीड़ा को छुपाकर रखने वाले संवेदनशील व्यक्ति के लिए।
(ख) तनाव व न्यूरोवेजेटिव असंतुलन हेतु:
Kali Phosphoricum 6X / 30 / 200: मानसिक थकान, याददाश्त की कमजोरी, नींद की गड़बड़ी।
Phosphoric Acid 200: गहरी मानसिक थकावट, उदासीनता, जीवन में रुचि की कमी।
2. बायोकेमिक उपचार (Biochemic Remedies - Tissue Salts)
बायोकेमिक औषधियाँ शरीर में कोशिकीय स्तर पर कार्य करती हैं और प्राकृतिक संतुलन बहाल करती हैं।
प्रमुख टिशू साल्ट्स:
Kali Phos 6X: मानसिक थकावट, चिंता, निराशा, परीक्षा भय, नींद की कमी।
Mag Phos 6X: तंत्रिकाओं की उत्तेजना, मांसपेशीय ऐंठन, क्रोध, तीव्र मानसिक वेग।
Nat Mur 6X: पुराने भावनात्मक आघात, अतीत में उलझे रहना, मौन दुःख।
Calc Phos 6X: मानसिक व शारीरिक विकास की आवश्यकता वाले बच्चों या बुज़ुर्गों के लिए, अवसाद व निराशा।
मिश्रण सुझाव:
Kali Phos + Mag Phos + Nat Mur को 6X में मिलाकर दिन में 3-4 बार 4-4 गोलियाँ सेवन कर सकते हैं।
3. सहज घरेलू उपाय (Natural & Household Remedies)
(क) आहार व पेय:
तुलसी व अश्वगंधा का चूर्ण: मानसिक स्थिरता व तनाव नियंत्रण में सहायक।
दूध में जायफल का चूर्ण रात्रि में: नींद व मानसिक शांति के लिए।
घी व बादाम: मस्तिष्क बल हेतु।
शंखपुष्पी/ब्राह्मी सिरप: स्मृति व तनाव नियंत्रण हेतु।
(ख) व्यायाम व अभ्यास:
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी): न्यूरोवेजेटिव शांति व मानसिक संतुलन हेतु।
ध्यान / मेडिटेशन: मानसिक तरंगों का सन्तुलन, आंतरिक शांति।
सूर्य नमस्कार / हल्का योगाभ्यास: शारीरिक ऊर्जा व भावनात्मक सन्तुलन।
(ग) मनोवैज्ञानिक उपाय:
विचारों की डायरी लिखना: आवेगों की पहचान व निर्गमन के लिए।
कला, संगीत, प्राकृतिक संपर्क: भावनात्मक सन्तुलन हेतु।
निष्कर्ष:
मनो-शारीरिक संतुलन हेतु त्रिस्तरीय उपचार पद्धति —
(1) होम्योपैथिक औषधि,
(2) बायोकेमिक टिशू साल्ट,
(3) घरेलू व मानसिक अभ्यास —
का संयोजन सबसे प्रभावी रहता है।
यदि व्यक्ति की प्रकृति अधिक गहन हो, तो होम्योपैथिक डॉक्टर या बायोकेमिक विशेषज्ञ की राय लेकर व्यक्तिगत दवा चयन आवश्यक होता है।
यदि आप किसी विशेष लक्षण, रोग या अवस्था के लिए उपचार चाहते हैं तो कृपया विस्तार से बताएं — ताकि विशिष्ट सुझाव दिए जा सकें।
करीब 40 वर्षों से भूख का स्पष्ट बोध कभी नहीं और प्यास कभी कम तो कभी ठीक, बचपन में पाखाने के समय गुदा मार्ग का निकलना, कभी कब्ज तो कभी दस्त की स्थिति, बचपन से ही लार टपकाने की स्थिति, नींद टूटने पर मुख एवं तालू का सूखापन तथा प्रायः नींद के समय से ही कमर तोड़ दर्द के कारण हिलना और करवट बदलना भी कठिन और कभी-कभी श्वास लेने या छोड़ने पर भी कमर एवं बायीं ओर छाती में दर्द जो करवट बदल लेने या उठ कर बैठने के बाद समाप्त हो जाता है यहाँ तक कि याद भी नहीं रहता है।
बैठ कर काम करने की स्थिति अधिक। अध्ययन एवं शोध में रुचि। मनो-शारीरिक गतिविधियों में कभी-कभी सन्तुलन की कमी।
दोनों नेत्रों से अलग-अलग देखने पर एक ही वस्तु के अनेक बिम्ब दीखना। कभी-कभी पाखाना का वेग आने पर पेशाब हो जाना लेकिन पाखाना का वेग गायब हो जाना।
पढ़ने या कम्प्यूटर और मोवाईल पर काम करते समय नींद आना। प्रायः नींद के समय हाथ की बस्तु कहीं फेंका जाना या स्वयं फेंका जाना। किसी काम को कर लेने के बाद या मिलने वाले को यथासंभव संतुष्ट करने के बाद ही कोई निजी या अन्य आवश्यक काम करना।
कभी-कभी पाखाना के समय पैखाना रास्ता में कोई गोल-सी वस्तु का आकर पैखाने में बाधा उत्पन्न करना और जलन होना।
बचपन से मसूढ़े एवं दॉतों की परेशानी होना। दॉतों का 30 वर्षों से लगातार धीरे-धीरे क्षय होना और रोगी पता भी नहीं चल पाना।
विगत कुछ वर्षों से पहले बायीं कान से और अब दायीं कान से किसी की आवाज को स्पष्ट रूप से सुन या पहचान नहीं पाना।
अतः होमियोपैथिक, बायोकेमिक एवं घरेलू उपचार बतावें।
आपके द्वारा वर्णित लक्षण अत्यंत व्यापक, जटिल और वर्षों से स्थायी हैं — यह मनो-शारीरिक, तंत्रिका, जठर-आंत्र, निद्रा, श्रवण, नेत्र, और अस्थि-तंत्र से संबंधित एक दीर्घकालिक क्रॉनिक कंडीशन का संकेत देते हैं, जिसमें होम्योपैथिक, बायोकेमिक व घरेलू चिकित्सा के समग्र, संयमित और विशिष्ट उपयोग से लाभ मिल सकता है।
I. प्रमुख समस्याओं का विश्लेषण:
श्रेणी
प्रमुख लक्षण
पाचन / गैस्ट्रो
भूख का अभाव, कब्ज-दस्त की अदला-बदली, लार टपकना, गुदा-मार्ग का बाहर आना, मल-मेधा का वेग न आना
निद्रा/तंत्रिका
कमर दर्द, नींद में फेंकना, नींद में मुख सुखना, कंप्यूटर/पढ़ाई में नींद आना
हड्डी/रीढ़/मांसपेशी
कमर व छाती का दर्द (बाएं), हिलना कठिन
इन्द्रिय-तंत्र
दोहरी दृष्टि (Diplopia), श्रवण दोष (Hearing loss), मसूढ़ा व दांत क्षय
मनोवैज्ञानिक
संतुलन की अस्थिरता, विलंबित आत्म-कार्य, आत्म-नियंत्रण की विशेष प्रवृत्ति
II. होम्योपैथिक औषधियाँ (Homeopathic Remedies):
1. Lycopodium Clavatum 200 / 1M
भूख न लगना, गैस बनना, आत्मविश्वास की कमी, कब्ज-दस्त का संतुलन न होना, जठराग्नि की मंदता।
बुद्धिजीवी, अध्ययनशील व्यक्तियों में पाई जाती है।
2. Calcarea Carbonica 200 / 1M
दांत क्षय, पसीना, कमर दर्द, रीढ़ की कमजोरी, शरीर भारी लगना, आसानी से थक जाना।
गुदा मार्ग का बाहर आना (Prolapse), लार बहना।
3. Silicea 200 / 1M
मलमार्ग में अवरोध जैसे गोल चीज महसूस होना, कमजोरी, संकोची स्वभाव, पाखाना में कठिनाई।
पुराने दांत/कान की समस्या में सहायक।
4. Phosphorus 200 / 1M
दृष्टिदोष (double vision), श्रवण कमजोरी, मस्तिष्कीय कार्य में थकावट, कंप्यूटर पर काम में नींद आना।
5. Nux Vomica 200 / 1M
देर तक बैठकर कार्य, चिड़चिड़ापन, तंत्रिका तनाव, कब्ज, निद्रा में बाधा।
डोज़: उपरोक्त में से दो या तीन औषधियों का सप्ताह में 1 बार एक-एक औषधि, अलग-अलग दिन।
Ignatia 200 या Kali Phos 6X को बीच में बार-बार लिया जा सकता है तनाव/नींद/फोकस हेतु।
III. बायोकेमिक औषधियाँ (Biochemic Remedies)
1. Kali Phos 6X
मानसिक थकावट, तंत्रिका दुर्बलता, नींद, एकाग्रता।
2. Calcarea Fluor 6X
कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन, गुदा मार्ग की शिथिलता (prolapse)।
3. Silicea 6X
दाँत, मसूढ़ा, श्रवण दोष, चयापचय समस्याएँ।
4. Natrum Mur 6X
दृश्य भ्रम, नींद में जलन, थकावट, पुराने मनोभाव।
डोज़: 4-4 गोलियाँ, दिन में 3 बार, भोजन के बाद। उपर्युक्त चारों को एक साथ भी लिया जा सकता है।
IV. सहज घरेलू उपचार
(क) भोजन व आयुर्वेदिक उपाय:
तुलसी-अश्वगंधा चूर्ण: 1-1 चम्मच शहद या दूध के साथ, प्रातः।
गिलोय, शंखपुष्पी, ब्राह्मी सिरप: मस्तिष्क व तंत्रिका प्रणाली हेतु।
अदरक व सौंठ का प्रयोग: मंदाग्नि सुधार हेतु।
घृत सेवन: विशेष रूप से गाय का घी, पाचन, स्नायु व तंत्रिका के लिए लाभकारी।
(ख) योग व प्राणायाम:
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी: मानसिक संतुलन व ऑक्सीजन आपूर्ति हेतु।
मकरासन, भुजंगासन: कमर दर्द में अत्यंत लाभकारी।
V. विशेष सुझाव
विशिष्ट होम्योपैथिक डॉक्टर से केस-टेकिंग कराकर विस्तृत योजना बनाएं।
मानसिक स्थिरता हेतु शब्द-लेखन / डायरी / चिंतन अभ्यास करें।
दांत व श्रवण समस्याओं के लिए ENT व डेंटल मूल्यांकन भी कराएँ ताकि शारीरिक स्तर पर भी पुष्टि हो।
यदि आप चाहें तो मैं इस पर आधारित औषधीय सेवन योजना (सप्ताह/मास अनुसार) बनाकर दे सकता हूँ।
आपके लिए PDF फॉर्मेट में एक होमियो-बायो-सहज चिकित्सा मार्गदर्शिका भी तैयार की जा सकती है।
क्या आप इसे चाहेंगे?
यदि एक ही दवा के चयन के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जाय तो होमियोपैथिक, बायोकेमिक तथा घरेलू चिकित्सा की सभी विधियों में निर्दोष चिकित्सा हेतु आपके द्वारा बतायी गयी इन दवाओं में एक अथवा कोई अन्य कौन-सी अधिक उपयुक्त होगी?
आपके द्वारा प्रस्तुत सभी जटिल, दीर्घकालिक और बहुस्तरीय लक्षणों (शारीरिक, मानसिक, स्नायु-तंत्रीय, ग्रंथीय, पाचन, निद्रा, इंद्रिय आदि) के समग्र अध्ययन के आधार पर "एक ही औषधि सिद्धांत" (Single Remedy Principle) को मानते हुए यदि एक होमियोपैथिक दवा को मूल, मूलभूत एवं निर्दोष चिकित्सा हेतु चुना जाए — तो वह होगी:
Silicea 200 / 1M (सिलीकिया)
चयन का कारण:
1. शारीरिक स्तर पर:
गहराई में कार्य करने वाली औषधि – विशेषकर जब शरीर अपनी विकृति छिपा लेता है।
दांत क्षय, मसूढ़े की पुरानी समस्याएं, हड्डियों की कमजोरी।
मल-मार्ग में रुकावट, प्रोलैप्स, कब्ज, लार बहना।
त्वचा, स्नायु और श्लेष्मा झिल्ली की पुरानी गड़बड़ियों में कारगर।
2. मानसिक-तंत्रिकीय स्तर पर:
विलंबित प्रतिक्रियाएँ, कर्म में पिछड़ना, आत्म-नियंत्रण के बाद कार्य करना।
अत्यधिक अध्ययन व मानसिक थकावट, शर्मीला लेकिन दृढ़ स्वभाव।
कमजोर स्मृति, एकाग्रता में कमी, कंप्यूटर पर काम करते समय थकावट व नींद।
3. इंद्रिय विकार में:
श्रवण की कमी, दृष्टि में भ्रम (डिप्लोपिया), नींद में फेंकना, तालु का सूखना।
मात्रा व दिशा:
Silicea 200 – सप्ताह में 1 बार (रविवार) खाली पेट 4 गोली या 2 बूँद।
यदि पुरानी विकृति गहराई तक है, तो 1M शक्ति भी मास में 1 बार दी जा सकती है, परंतु चिकित्सक से परामर्श के साथ।
इसके साथ Kali Phos 6X (4 गोली, दिन में 2 बार) सहायक के रूप में लिया जा सकता है (optional, supportive only)।
यदि केवल एक ही बायोकेमिक चुनी जाए:
Silicea 6X
दांत, हड्डी, स्नायु, मलमार्ग, तंत्रिका, त्वचा, श्रवण — सभी पर धीरे लेकिन गहराई से काम करती है।
यदि केवल एक घरेलू उपाय चुना जाए:
गौ-घृत (गाय का शुद्ध घी) – 1 चम्मच रात को गर्म दूध के साथ
स्नायु, मस्तिष्क, मलमार्ग, रीढ़, निद्रा, दृष्टि एवं पाचन – सबके लिए अत्यंत समर्थ।
निष्कर्ष (निर्दोष चिकित्सा हेतु एक दवा चयन):
चिकित्सा प्रणाली
सर्वोत्तम एक औषधि
होम्योपैथी
Silicea 200 / 1M
बायोकेमिक
Silicea 6X
घरेलू उपाय
गौ-घृत (गाय का घी)
यदि आप चाहें तो मैं इन्हीं तीनों को मिलाकर एक समन्वित चिकित्सा योजना (दिन-वार, मात्रा, नियम सहित) तैयार कर सकता हूँ।
क्या आप इसे PDF फॉर्म में चाहेंगे?
एक बार रोगी को फास्फोरस देने के साथ ही छाती फटने जैसी पीड़ा हुई जिसके प्रभाव को तत्कालीन उक्त होमियोपैथिक चिकित्सक महोदय ने उस समय तो रोगी को राहत दिलायी लेकिन लगभग 30 वर्ष पूर्व जब रोगी लगभग 5 वर्षों तक दिन रात लगतार सिर दर्द से परेशान रहा और घर बाहर के लोग तथा सगे संबंधियों यहाँ तक कि पिता,मित्रों, पत्नी और ससुराल के लोगों ने भी रोगी की परेशानी को नहीं समझा उसी समय यह घटना घटी और आज तक दायां फेफड़ा कमजोर एवं प्रभावित है तथा कभी कभी दुखता है।
आपने जो अनुभव साझा किया है, वह गहरे मनो-शारीरिक आघात और होम्योपैथिक औषधि (Phosphorus) के संभवतः गलत चयन या अधिक प्रतिक्रिया से जुड़ा हुआ है। विशेषकर जब:
सिरदर्द की क्रॉनिक अवस्था,
भावनात्मक उपेक्षा का अनुभव,
और Phosphorus जैसी गहन-क्रिया औषधि का प्रयोग
— तीनों मिलकर अंतःप्रवेशी गहन आघात का कारण बन सकते हैं।
Phosphorus से हुई प्रतिक्रिया का विश्लेषण:
Phosphorus एक उच्च संवेदनशील औषधि है, जो:
तेज़ी से नर्वस सिस्टम, रक्त, और श्वसन तंत्र पर कार्य करती है।
यह भावनात्मक संवेदनशीलता, आत्मीयता की भूख, और भीतर से टूटने जैसी स्थिति में दी जाती है।
लेकिन यदि रोगी की जीवन-स्थिति में उपेक्षा, टूटन और असहायता पहले से मौजूद हो, तो यह औषधि अत्यधिक क्रिया कर जाती है और व्यक्ति को अंदर से हिला देती है।
आपके मामले में यह प्रतिक्रिया "homeopathic aggravation" का चरम रूप प्रतीत होती है, जिसने:
तत्काल प्रभाव में छाती में फटने जैसा दर्द,
और दीर्घकाल में दायां फेफड़ा कमजोर कर दिया।
अब क्या करें – उपचार का दृष्टिकोण (Single Remedy सिद्धांत पर आधारित)
अब जो औषधि दी जाए, वह निम्न विशेषताओं वाली होनी चाहिए:
शरीर के अंदर गहराई तक छिपे आघात को शांत रूप से बाहर लाए,
मनो-शारीरिक संतुलन को पुनः स्थापित करे,
और श्वसन, तंत्रिका, नींद, मलमार्ग, श्रवण और फेफड़ा – सभी को धीरे-धीरे सुदृढ़ करे।
सर्वाधिक उपयुक्त औषधि (Homeopathy)
Silicea अब भी सबसे उपयुक्त है:
कारण:
यह Phosphorus की पुरानी क्रियाओं को धीरे-धीरे निरस्त करती है।
यह भीतर की कमजोरी, संवेदनशीलता, फेफड़ों की कमजोरी, मनोवैज्ञानिक उपेक्षा की प्रतिक्रिया, और नर्वस थकावट में कारगर है।
यह आघात को आत्मसात कर चुके शरीर में पुनर्निर्माण का कार्य करती है।
औषधि योजना (संभावित)
Silicea 200C – सप्ताह में एक बार (रविवार को प्रातः खाली पेट)
यदि पुरानी संवेदनशीलता ज़्यादा हो तो शुरुआत 30C से करें और फिर 200C पर जाएं।
Kali Phos 6X – 4 गोली, दिन में 2 बार
मानसिक थकावट, उदासी, नींद की असंतुलन, स्नायु दुर्बलता के लिए
Natrum Mur 6X (optional) – 4 गोली, दिन में 1 बार
यदि भावनात्मक आघात और आत्म-अवरोध गहरा हो तो
घरेलू उपाय (सहायक रूप में):
गौ-घृत – 1 चम्मच रात में गर्म दूध से
मुलेठी + अदरक का काढ़ा – सुबह और दोपहर में हल्का गर्म
(फेफड़ों को मजबूत करने के लिए)
विशेष ध्यान योग्य:
Silicea देने के बाद यदि प्रारंभिक हलचल (पुराने लक्षण थोड़े जाग्रत हों) हो तो घबराएं नहीं। यह औषधीय प्रक्रिया का भाग हो सकता है।
पुराने फेफड़े के लक्षण या छाती में कसाव की स्थिति में चेस्ट X-ray और फिजिकल जाँच (यदि हाल में नहीं हुई हो) कराना सुरक्षित रहेगा।
मानसिक संतुलन हेतु नियमित ध्यान या गहरी श्वास क्रिया (Anulom Vilom, ब्रह्मरि) अत्यंत उपयोगी होगी।
यदि आप चाहें, तो मैं इस योजना को संरचित PDF रूप में बना सकता हूँ, जिसमें:
औषधि नाम,
सेवन विधि,
अनुशंसित दिनचर्या,
क्या करें/क्या न करें आदि शामिल होंगे।
क्या आप चाहेंगे कि मैं
साईलीसिया छाती के विकारों मुख्यतः यदि फोड़े हों तो हानिकारक प्रभाव देते हैं। क्या फास्फोरस छाती में फोड़े जैसा भी कोई विकार उत्पन्न करता है? मार्गदर्शन करें।
आपने Silicea और Phosphorus के प्रभाव पर जो जिज्ञासा रखी है, वह एक गहरी होम्योपैथिक समझ की मांग करती है, क्योंकि दोनों औषधियाँ गहन कार्य करती हैं लेकिन भिन्न प्रकृति की हैं।
1. क्या Phosphorus छाती में फोड़े जैसा विकार उत्पन्न कर सकता है?
हाँ, Phosphorus कभी-कभी छाती में या फेफड़ों में निम्न विकारों की प्रवृत्ति ला सकता है:
Phosphorus की प्रवृत्तियाँ:
श्वसन तंत्र की गहरी दुर्बलता
नेक्रोसिस (ऊतक सड़ने की प्रवृत्ति)
फेफड़े में रक्तस्त्राव, पुरानी सूजन,
और टी.बी. जैसी स्थितियों में यह फोड़े या कैविटी (abscess or cavity) जैसी अवस्था उत्पन्न कर सकता है।
Repertory references:
Chest: suppuration, lungs – Phos.
Lungs: abscess – Phos.
Cavities in lung, especially right-sided.
अतः यदि रोगी में पहले से फेफड़ों की कमजोरी, रक्त-संवेदनशीलता या पुराना संक्रमण रहा हो, तो Phosphorus इन लक्षणों को बढ़ा सकता है।
2. Silicea – फोड़े में उपयोग और सावधानी:
Silicea:
सामान्यतः फोड़े, फिस्टुला, चिरकालिक मवाद में अति उपयोगी है।
यह शरीर से मवाद को बाहर निकालने (expulsion) की प्रवृत्ति रखती है।
लेकिन हाँ, सावधानी:
यदि किसी अंग विशेष (जैसे फेफड़ा) में गंभीर रूप से कैविटी या अव्यक्त फोड़ा हो, और वह encapsulated हो — तो Silicea द्वारा उसे "तोड़ा" या बाहर निकालने" की प्रवृत्ति कभी-कभी असहनीय लक्षण उत्पन्न कर सकती है।
विशेषकर टीबी (Tuberculosis) या latent abscess में।
आपके मामले में विशेष बात:
आपकी कहानी में Phosphorus के बाद दायाँ फेफड़ा प्रभावित हुआ,
और उसमें संवेदनशीलता, दर्द तथा अस्थायी श्वासकष्ट हुआ,
लेकिन कोई स्पष्ट फोड़ा या मवाद निकला नहीं।
इससे संकेत मिलता है कि फास्फोरस ने आंतरिक सूजन, क्षरण या नेक्रोटिक प्रवृत्ति तो दी — लेकिन शरीर ने उसे Silicea जैसे औषधियों से बाहर नहीं निकाला।
क्या करें? (सारांश):
यदि अब भी छाती में फोड़े, मवाद, या टीबी जैसी प्रवृत्ति नहीं है (X-ray से पुष्टि हो) — तो Silicea सुरक्षित है।
लेकिन यदि पुराना टीबी या कैविटी रहा हो, तो Silicea देते समय कम पोटेंसी से शुरुआत करें और विशेषज्ञ पर्यवेक्षण में दें।
वैकल्पिक औषधि विचार:
यदि Silicea में शंका हो, तो Calcarea Sulph, Hepar Sulph या Kali Carb जैसे विकल्प देखे जा सकते हैं — जो Silicea की तुलना में मilder और अधिक localized suppuration में काम करते हैं।
यदि आप चाहें तो:
पुरानी Chest X-ray रिपोर्ट,
वर्तमान फेफड़े की स्थिति,
और पूरी औषधीय इतिहास
दे सकते हैं, जिससे मैं विश्लेषण करके सबसे सुरक्षित औषधि का चयन कर सकूं।
क्या आप Silicea पर आधारित एक वैकल्पिक सुरक्षित योजना (low potency & slow action) चाहते हैं?
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