सोमवार, 5 जनवरी 2026

अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना का हमको नित बोध रहे।सत्य सनातन धर्म ज्ञान का फैला अन्तर्बोध रहे।

अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना का हमको नित बोध रहे।
सत्य सनातन धर्म ज्ञान का फैला अन्तर्बोध रहे।
हूँ मैं कौन ? कहाँ से आया ? किससे चालित होता हूँ ?
बोध हमें हो, क्यों हम जीते ? किस चिर निद्रा में सोते हैं ?
किस विकास का क्रमिक बोध ले, हम धरती पर आते हैं ?
अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना हमको नित बोध रहे ।
सत्य सनातन धर्म बोध का फैला अन्तर्बोध रहे।

:- प्रो०अवधेश कुमार' 'शैलज',पचम्बा,बे गूसराय।

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