किसी भी प्राणी के वातावरण उपस्थित उद्दीपनों के प्रभाव उस प्राणी पर सूक्ष्म और / या स्थूल रूप से तथा व्यक्त और / या अव्यक्त रूप से पड़ते हैं, जिसका उस प्राणी की मानसिक, दैहिक और मनोदैहिक स्थिति पर गौण और / या स्पष्ट प्रभाव उसकी अनुक्रिया (समायोजन एवं व्यवहार) में दृष्टिगोचर होता है। ज्ञातव्य है कि किसी प्राणी द्वारा वातावरण में उपस्थित उद्दीपनों के प्रति व्यक्ति Lower Brain द्वारा सद्यः लिये गये Action जिसे संयोजक स्नायु द्वारा संचालित निर्णय अर्थात् Reflex Arch भी कहा जाता है और जो मानसिक निर्णय रहित होते हैं उसे "स्वत: अनुक्रिया व्यवहार" कहते हैं तथा मस्तिष्क तक उद्दीपन प्रभाव पहुँचने के पश्चात् मस्तिष्क द्वारा प्राणी के मनोदैहिक स्थिति हेतु लिये गये "अत्यावश्यक एवं तात्कालिक अनुक्रिया" को "व्यवहार" कहते हैं, लेकिन उद्दीपन बोध के पश्चात् मस्तिष्क को प्राप्त भूतकालिक प्रभाव से वर्त्तमान परिस्थिति के साथ विश्लेषण के आधार पर भावी प्रभाव के दृष्टिकोण से लिये गये निर्णय के आलोक में की गई अनुक्रिया "समायोजनात्मक व्यवहार" की श्रेणी में आता है या वास्तव में समायोजनात्मक व्यवहार कहलाता है।
प्राणी की अनुक्रियाएँ न केवल दैहिक, वरन् मानसिक, मनोवैज्ञानिक, मनोदैहिक तथा अतीन्द्रिय आदि समस्त स्तरों पर घटित होती हैं।
इस प्रकार मानव मस्तिष्क मूलाधार चक्र से सहस्त्रसार चक्र तक फैला हुआ है, जो ईड़ा नाड़ी अर्थात् चन्द्र नाड़ी अर्थात् ज्ञान वाही नाड़ी अर्थात् सौम्य नाड़ी अर्थात् भावना प्रधान नाड़ी, पिंगला नाड़ी अर्थात् सूर्य नाड़ी अर्थात् क्रिया वाही नाड़ी अर्थात् क्रूर नाड़ी अर्थात् कर्म प्रधान नाड़ी तथा सुषुम्ना नाड़ी अर्थात् संयोजक नाड़ी अर्थात् ईड़ा-पिंगला संयोजक एवं नियन्त्रक नाड़ी के माध्यम से प्राणी के जीवन में चेतना बोध, संचरण एवं समायोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है सम्पूर्ण शरीर और इसके वातावरण में व्याप्त मन एवं जीवन उत्पत्ति, पालन और संचालन शक्ति, केन्द्र एवं आत्मा के निवास स्थान हृदय के साथ अभिन्न रूप से जुड़ी रहती है।
डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज,
एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।
(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, पचम्बा, बेगूसराय।
"सजीव प्राणियों का जीवन दर्शन"
(अप्रकाशित पुस्तक)
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