मंगलवार, 6 जनवरी 2026

चिकित्सा सूक्त- 12:- किसी भी चिकित्सा पद्धति में रोगी को केवल तात्कालिक लाभ या राहत या आराम पहुँचाना आपका (चिकित्सक का) ध्येय या उद्देश्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसके बाद में हानि भी संभव है।

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