गुरुवार, 8 जनवरी 2026
जैव रासायनिक असन्तुलन विश्लेषण
"किसी प्राणी का जैव रासायनिक सन्तुलन जब कभी भी वातावरण में उपस्थित किसी उद्दीपन परिस्थिति और / या प्राणी के किसी शारीरिक, मानसिक या मनोदैहिक आवेग के कारण कम या अधिक समय और / या मात्रा में बिगड़ता है, तो वैसी स्थिति में उसका शारीरिक, मानसिक एवं मनोदैहिक प्रभाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दृष्टिगोचर होता है और वैसी स्थिति में शरीर के जिस अंग पर अधिक प्रभाव पड़ता है, जिससे उक्त अंग विशेष से सम्बन्धित असामान्य व्यवहार एवं अनुभूतियों का बोध स्वयं प्राणी या प्रेक्षक को होता है और / या प्रामाणिक वैज्ञानिक संसाधनों द्वारा प्राप्त होता है। ज्ञातव्य है कि ऐसी किसी भी स्थिति में यदि कोई प्राणी अपने आप को असहज महसूस करता है और /या असहजता की बाध्यता और / या निरन्तरता महसूस करता है तो वह रूग्ण कहा जाता है।"
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