शैलज रुग्णता, सह-अनुभूति एवं निर्दोष आरोग्य सिद्धांत :-
अत: किसी प्राणी की स्वानुभूति का हू-ब-हू बोध प्राप्त करने हेतु प्रेक्षक और / या चिकित्सक को "अतीन्द्रिय ज्ञान" और / या "सह-अनुभूति" और / या "सम्यक् मुक्त साहचर्य बोध", और / या "सम्यक् जाँच प्रविधि बोध" तथा "सम्यक् परिचर्या बोध" अत्यावश्यक है और इन प्रक्रियाओं और / या प्रविधियों का प्रेक्षक और / या चिकित्सक द्वारा अपनी क्षमता के अनुसार अधिक से अधिक एवं सम्यक् उपयोग किसी रूग्ण प्राणी की जीवनी शक्ति के संवर्धन में जितना सहायक हो सकेगा, उतना ही अधिक "निर्दोष आरोग्य" कारक सिद्ध होगा।
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