शनिवार, 31 जनवरी 2026

शैलज दोहावली भाग-1 के कुछ दोहे :-

हृदय हीन, विवेक बिन; 
नर पशु से भी नीच।
शैलज पाते दुसह दु:ख, 
सुजन मूर्ख के बीच।।१६।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
१८/०८/२०२०, १०/२१ पूर्वाह्न।

सत्यानुसंधान उद्घाटन, 
जग मिथ्या नित्य प्रयोग।
शैलज व्यवहार व्यतिक्रम, 
प्रकृति विरुद्ध संयोग।।२४।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
२३/०८/२०२०, १७/२२ अपराह्न। 

शैलज शील, स्वभाव, गुण; 
नित्य जगत् व्यवहार।
विकसत पाय परिस्थिति; 
प्रकृति, वंश अनुसार।।२७।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
२५/०८/२०२०, ०७/२० पूर्वाह्न।

शैलज निज व्यवहार से, 
दु:ख औरन को देत।
जानत जगत् असार है, 
अपजस केवल लेत।।२८।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज,
पचम्बा, बेगूसराय।
२७/०८/२०२०, 

मनो-शारीरिक, धर्म हित,
करें शैलज व्यवहार।
देश, काल और पात्र के
सामञ्जस्य अनुसार।।३०।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज,
पचम्बा, बेगूसराय।
२०/०८/२०२०, १३/२१ अपराह्न।

स्वयं करने से सरल है, 
सहज सरल आदेश।
शैलज लिखना, बोलना, 
दर्शन, आदर्श, उपदेश।।३१।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज,
पचम्बा, बेगूसराय।
१८/०८/२०२०, १६/१३ अपराह्न।

हित अनहित को समझ कर, 
शैलज करिये काज।
पर दु:ख को निज मानकर, 
चलते सुजन समाज।।३३।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
१४/०८/२०२०, १२/१८ अपराह्न।

शैलज तन मन धन निज
बुद्धि सहाय विवेक।
स्वार्थ पूर्ण इस जगत् में 
प्रभु सहाय हैं एक।।३५।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज,
पचम्बा, बेगूसराय।
१३/०८/२०२०, ४/२३ पूर्वाह्न।

शैलज उनसे मत कहो, 
अपने दिल की बात। 
जग प्रपंच में लीन जो, 
कहाँ उन्हें अवकाश।।३७।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
१२/०८/२०२०, ११/०७ पूर्वाह्न।

शैलज निज सुख के लिए, 
समुचित करिये काम।
परहित बाधित हो नहीं,  
हर संभव रखिये ध्यान।।३९।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
०९/०८/२०२०, १८/१९ अपराह्न।

शैलज हृदय विचार कर, नित करिये व्यवहार।
देश काल औ पात्र का, निशि दिन करें विचार।।४१।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
०९/०८/२०२०, ०९/०८पूर्वाह्न।

सत्य सनातन रामरस, 
लवण विश्व विख्यात।
त्रिविध ताप हर प्रेम रस,
त्यों शैलज को भात।।४३।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, 
पचम्बा, बेगूसराय।
२८/०८/२०२०, ०८/४३ पूर्वाह्न।

शैलज रूप स्वरूप या 
जगत् कार्य व्यवहार।
निर्भर करता चयापचय 
या क्षति-पूर्ति आधार।।४४।।

काजल करिये ठौर से,
नयन पलक के द्वार।
शैलज राज श्री सुखद, 
शुभ पावन व्यवहार।।४७।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज,
पचम्बा, बेगूसराय।

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