यह रूप स्तोत्र-शैली, अनुप्रास, अनुक्रम, लय, भाव, और भक्ति-रस के साथ है — ताकि यह पूजा-पाठ, जप, वाचन और स्मरण के लिए सहज हो।
(यह शास्त्रीय स्तोत्रात्मक टेक्स्ट-फॉर्म है — न सूची, न तालिका)
🌺 माँ सरस्वती – 164 नामों की काव्यात्मक वंदना (छंदबद्ध स्तोत्र-रूप) 🌺
सर्वं त्वेष त्वदीयं माँ, नमस्तुभ्यम् भारती।
वाक्शक्ति-रूपिणि, विद्याधारिणि, प्रज्ञारूपे नमोऽस्तु ते।
अक्षरा त्वं महामाया, अद्भुता ज्ञानरूपिणी।
आचार्या गुरुरूपेण, इन्द्राणी तेजधारिणी॥
ईश्वरी त्वं जगन्माता, उदात्ता बुद्धिदायिनी।
उज्ज्वला ज्ञानदीप्ता त्वं, ओजस्विनी शक्तिरूपिणी॥
कविता त्वं सरस्वीस्वर, गुणदायिनी गुणात्मिका।
गुप्तदायिनी गूढविद्या, गोस्विनी ग्रामरक्षिका॥
गान्धारस्वरा संगीतात्मा, गन्धर्वप्रिय वाग्मयी।
तारकप्रभा पथप्रदर्शी, तत्त्वदर्शिनी तत्वमयी॥
तत्त्वप्रज्ञा प्रबुद्धात्मा, तनमयी ब्रह्मरूपिणी।
तारिणी संसारसागर, तत्त्ववेदिनी ज्ञानदायिनी॥
तुष्टिप्रदा संतोषरूपा, तुष्टिकारिणि शान्तिदायिनी।
तुहिनमयी शीतलहृदया, तुरियामयी ब्रह्मलायिनी॥
तपत्रय तपसाधना, तालव्य लयधारिणी।
तालिका नादरूपा त्वं, दृष्टिदायिनी ज्योतिरूपिणी॥
दुर्गामयी संकटहारिणी, दीनबन्धु करुणामयी।
दीक्षा-गुरु ज्ञानमार्गा, दुःखनाशिनी शरणमयी॥
धैर्यदायिनी धीररूपा, ध्यानमयी समाधिरूपिणी।
धरणीदायिनी आधारत्वं, दयामयी करुणारूपिणी॥
नवगुणा नवकला त्वं, नित्यप्रज्ञा नित्यमयी।
निरंजना निर्वाणरूपा, नवोदयप्रभा ज्योतिर्मयी॥
पारिजातिका दिव्यसुगन्धा, पारमेष्ठिनी श्रेष्ठमयी।
फुल्लमयी सौन्दर्यरूपा, फलदायिनी कर्मफलदा॥
बोधिनी बोधरूपा त्वं, भव्यभावा विभूषिता।
भाषावती वाक्शक्तिरूपा, भक्ति प्रदायिनी भक्तिदा॥
मंगलप्रदा मोक्षमार्गा, माधुर्यदायिनी मधुरिमा।
मुक्ताकलिता रत्नरूपा, मनोहरमयी सौन्दर्यमा॥
यशस्विनी कीर्तिदायिनी, योगिनी योगरूपिणी।
रश्मिमयी तेजरूपा त्वं, रूपमयी सौन्दर्यधारिणी॥
ललिता लावण्यरूपा, लक्ष्मीवती समृद्धिदा।
वाग्देवी वाणीमाता त्वं, वेदमयी वेदात्मिका॥
शारदामयी शुद्धविद्या, शान्तिप्रदा शान्तिरूपिणी।
शक्तिप्रदा शक्तिरूपा, शब्दमयी शब्दात्मिका॥
सर्वज्ञा सर्वविद्यारूपा, संगीतात्मा स्वरात्मिका।
स्मृतिवर्धिनी स्मृतिरूपा, सौम्यवती सौम्यभावना॥
हंसमयी विवेकरूपा, हर्षप्रदा हर्षात्मिका।
क्षमा दया करुणा रूपा, ज्ञानमयी ज्ञानमातृका॥
अलौकिक दिव्यतेजस्वी, अचिन्त्य चिन्तनात्परा।
ईशानी ईश्वरशक्तिः, कला-काव्य-स्वरूपिणी॥
जगदम्बा जगदाधारा, प्रभामयी प्रकाशिका।
विद्यामयी शास्त्ररूपा, सर्वकल्याणकारिणी॥
अहिंसामयी शान्तिरूपा, आराध्या आराध्यमयी।
अविनाशी नित्यरूपा, अतुल्यमयी अनुपमा॥
उपास्या उपास्यरूपा, उल्लासमयी आनन्दिनी।
ऋद्धि समृद्धि वैभवरूपा, एन्द्राणी शक्तिरूपिणी॥
कौशल्या कौशलरूपा, कल्याणी कल्याणदा।
घनाक्षरी गहनरूपा, गुप्तरत्न ज्ञानरूपिणी॥
प्रज्ञाचक्षु प्रज्ञादृष्टि, गोस्वामिनी धरणीमयी।
गति-मति बुद्धिरूपा, जिगीषा ज्ञानपिपासिनी॥
जुगुप्सा अज्ञाननाशा, अज्ञानविनाशिनी।
तदाकार ब्रह्मरूपा, तदगुण गुणमालिनी॥
तद्धित मह महावाक्यरूपा, महामाया महामयी।
🌸 समापन मंत्र 🌸
सर्वं त्वेष त्वदीयं माँ, नमस्तुभ्यम् भारती।
विद्यां देहि, बुद्धिं देहि, प्रज्ञां देहि सरस्वति।
🙏
यह अब आपकी वंदना का शास्त्रीय स्तोत्रात्मक काव्य-रूप है —
✔ छंदात्मक
✔ लयात्मक
✔ अलंकारयुक्त
✔ भक्ति-रसयुक्त
✔ पाठन योग्य
✔ जप योग्य
✔ पूजा योग्य
✔ स्मरण योग्य
यह अब केवल “सूची” नहीं, बल्कि एक जीवित स्तोत्र-रचना बन चुकी है।
यदि आप चाहें, अगला चरण यह हो सकता है कि मैं इसे:
✅ देवनागरी शुद्ध संस्कृत-रूप
✅ श्लोकात्मक छंद-रचना
✅ अनुष्टुप् / उपजाति छंद
✅ स्तोत्र-पाठ शैली
✅ मंत्रात्मक जप-रूप
✅ संगीतात्मक आरती-रूप
✅ पूजा-पुस्तक शैली
में भी रूपांतरित कर दूँ — सब कुछ टेक्स्ट में ही।
आप आदेश दें — यह रचना अब आपके साथ शास्त्रीय ग्रंथ-रूप में विकसित की जा सकती है
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