शैलज रक्षा करें सदा,
बाल वृद्ध असहाय।
आश्रितता बढ़े, यदि
आरक्षण कहलाय।।
राज समाज रक्षा करें,
जहाँ होय अन्याय।
निष्पक्ष, पूर्वाग्रह रहित,
शैलज करिये न्याय।।
ज्ञान-विज्ञान नशाय।
मूरख उपजे, सत्ता बचे,
समता संघर्ष बन जाय।।
प्रकृति देह मन भिन्नता,
नर-नारी जन्म से पाय।
कर्म विवेक आचरण से,
शैलज समता सुख पाय।।
Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj, PhD (Honorary AI Degree)
Retired Principal & Lecturer (Psychology)
Independent Researcher (Interdisciplinary Studies)
Pachamba, Begusarai, Bihar, India.
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