सोमवार, 19 जनवरी 2026

पदार्थ-धर्म एवं तत्व-विचार :-

पदार्थ-धर्म एवं तत्व-विचार :-

किसी भी पदार्थ की गुणवाचकता एवं वस्तुवाचकता का अपने स्वरूप में स्थिति एवं क्रियाशीलन ही उस पदार्थ का धर्म होता है। 

अतः पदार्थ-धर्म से तात्पर्य किसी पदार्थ की गुणवाचकता एवं वस्तुवाचकता की अपने स्वरूप में स्थिति एवं क्रियाशीलन की अवस्था से है। 

प्रकृति के पाँच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश जो अधोलिखित आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी क्रम में उत्पन्न हुए वे सभी पदार्थ-धर्म का पालन करते है। अतः पदार्थ-धर्म एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है। 

निरंजन एवं निराकार एक देव महेश्वर से क्रमशः आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी की उत्पत्ति हुई जिनका कालगत प्रभाव क्रमशः 30, 24, 18, 12 एवं 6 मिनट का होता है।

 ज्योतिर्गणितीय काल गणना में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। 

आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी इन सभी तत्वों में से प्रत्येक तत्व क्रमशः 5 : 4 :‌ 3 : 2: 1 के आनुपातिक क्रम में व्याप्त रहते है, जिनका ज्योतिर्गणितीय अध्ययन में‌ महत्वपूर्ण स्थान है। 
डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि-छात्र, ज्योतिष-प्रेमी, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, बायोकेमिक एवं समग्र चिकित्सा विद्।

(AI मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)

पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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Substance-Properties and Elemental Theory:

The inherent nature and functionality of any substance, in its form and activity, constitute its properties.

Therefore, substance-properties refer to the state and activity of a substance's inherent nature and functionality.

The five elements of nature—earth, water, fire, air, and ether—which originated in the following order: ether, air, fire, water, and earth, all adhere to the principles of substance-properties. Therefore, substance-properties are a natural process.

From the formless and attributeless one God, Maheshwara, originated ether, air, fire, water, and earth, whose temporal influence is 30, 24, 18, 12, and 6 minutes respectively.

They hold a significant place in astrological time calculations.

Each of these elements—ether, air, fire, water, and earth—is present in a proportional ratio of 5:4:3:2:1 respectively, which is of significant importance in astrological studies.

Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj

M.A.: Psychology, Law Student, Astrology Enthusiast, Creative Thinker, Homeopathic, Biochemic & Holistic Medicine Practitioner.

(AI Honorary Degree: Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)

Father: Late Rajendra Prasad Singh

Village: Pachamba, District: Begusarai,

Pincode: 851218, State: Bihar (India).

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द्रव्य-धर्म एवं तत्वविचार : १.

स्वरूपेण यस्य कस्यचित् द्रव्यस्य गुणात्मकस्य गुणात्मकस्य च स्थितिः क्रिया च तस्य द्रव्यस्य स्वभावः एव ।

अतः द्रव्यस्वभावः स्वरूपेण यस्य कस्यचित् पदार्थस्य गुणात्मकस्य भौतिकस्य च गुणस्य स्थितिं क्रियाकलापं च निर्दिशति ।

पृथिवी, जलं, अग्निः, वायुः, अन्तरिक्षः इति पञ्च तत्त्वानि, ये क्रमेण निर्मिताः- आकाशवायुः, अग्निः, जलं, पृथिवी च, ते सर्वे द्रव्यस्वभावम् अनुसरन्ति। अतः द्रव्यस्वभावः स्वाभाविकः प्रक्रिया एव ।

एकस्मात् शुद्धात् निराकारदेवात् महेश्वरात् अन्तरिक्षं वायुः अग्निः जलं पृथिवी च निर्मिताः येषां कालप्रभावाः क्रमशः ३०, २४, १८, १२, ६ निमेषाः सन्ति ।

खगोलशास्त्रे तेषां महत्त्वपूर्णं स्थानम् अस्ति ।

अन्तरिक्ष-वायु-अग्नि-जल-पृथिवी इत्येतयोः प्रत्येकं तत्त्वं ५:४:३:२:१ इति अनुपातेन वितरितम् अस्ति, यत् खगोलशास्त्रे महत्त्वपूर्णं स्थानं धारयति ।

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज

एम.ए.: मनोविज्ञान, विधि छात्र, ज्योतिष उत्साही, रचनात्मक विचारक, होम्योपैथिक, जैव रासायनिक, तथा समग्र चिकित्सा विद्वान।

(ए आई मानद उपाधि: विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)

पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह

ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय, 

पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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