शैलज पंच ब्रह्माण्डीय सिद्धांत :-
"शैलज पंच ब्रह्माण्डीय सिद्धांत" सम्बन्धी मेरी संकल्पनाएँ एवं अवधारणाएँ अधोलिखित हैं:-
ब्रह्माण्डीय सिद्धांत 1. ब्रह्मांडीय परिवेश में किसी भी प्राकृतिक ग्रह या उपग्रह की परिधि पर की दूरी पर विद्यमान प्रत्येक बिंदु उसके केंद्र से समान दूरी पर रहते हैं।
🔹 निष्कर्ष: गोलीय पिंडों की परिधि की सरल रेखा उस पिंड की समरूपता को दर्शाती है।
ब्रह्माण्डीय सिद्धांत 2. त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सामान्यतः 180° होता है।
🔸 लेकिन जहाँ एक अवस्था में 180° से अधिक होता है, तो दूसरी अवस्था में उतना ही कम होता है।
ब्रह्माण्डीय सिद्धांत 3. प्रकाश के वेग से गतिमान पिंड प्रकाश ऊर्जा में बदल जाता है।
ब्रह्माण्डीय सिद्धांत 4. वास्तविक रूप में प्रकाश का वेग 3,00,000+x किलोमीटर प्रति सेकंड होता है।
🔹 परंतु परावर्तन, अपवर्तन आदि से x घटक जुड़ता है, जिससे यह वेग परिवर्तित होता है।
ज्ञातव्य है कि निर्वात में प्रकाश का वेग या में गति 299,792,458 मीटर/सेकंड होती है, जिसे इंटरफेरोमीटर द्वारा 299792.4562 किलोमीटर के साथ धन-ॠण 0.0011 किलोमीटर प्रति सेकेण्ड मापा गया, लेकिन समान्यतः प्रकाश की गति को 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड और / या 180000 मील प्रति सेकेंड माना जाता है और डेनिस खगोल शास्त्री ओले रोमर (1976) के अनुसार प्रकाश की गति 301204.8 किलोमीटर प्रति सेकेंड है।
अत: वास्तव में प्रकाश का वेग भौतिक विज्ञान के आधुनिकतम अध्ययन से प्राप्त बोध 299,792.458 किलोमीटर/सेकंड या इंटरफेरोमीटर के अनुसार 299792.4562 किलोमीटर/सेकंड से X किलोमीटर/सेकंड अधिक और/या राउंड फीगर के अनुसार लगभग 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड से भी X किलोमीटर प्रति सेकंड अधिक होगा, अतः मैंने 1980 में प्रकाश के वेग सम्बन्धी सामान्य अवधारणा के आधार पर इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया कि वास्तव में प्रकाश का वेग 3,00,000+x किलोमीटर प्रति सेकंड होता है।
🔹 परंतु परावर्तन, अपवर्तन, गुरुत्वाकर्षण आदि से x घटक जुड़ता है, जिससे यह वेग परिवर्तित होता है।
🔹 परंतु परावर्तन, अपवर्तन, माध्यम तथा फोटोन कणों के पारस्परिक आकर्षण एवं गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण प्रकाश के वास्तविक रूप में प्रकाश का वेग 3,00,000+x किलोमीटर प्रति सेकंड में क्षरण होने से
से x घटक जुड़ता है, जिससे यह वेग परिवर्तित होता है।
ब्रह्माण्डीय सिद्धांत 5. किसी धरातल के प्रत्येक बिंदु जो केंद्र या नाभि पर स्थित हो, वह अपनी स्थिति से यदि विचलित हो जाए तो उसकी गति की रेखा समय रेखा कहलाती है।
इस "शैलज पंच ब्रह्माण्डीय सिद्धांत" के बिंदु 1 और 5 में गतिकी एवं स्थूलता सिद्धांत, बिंदु 3 और 4 में प्रकाश ऊर्जा सिद्धांत, तथा बिंदु 2 में ज्यामिति सिद्धांत का वर्णन किया गया है।
सिद्धांतकार :-
डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज
(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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Shailaj's Five Cosmological Principles:
In 1980, I conceived the "Shailaj Five Cosmological Principles," which include fundamental concepts regarding cosmic structure, the speed of light, triangular angles, straight lines, and motion.
My concepts and ideas related to the "Shailaj Five Cosmological Principles" are as follows:
Cosmological Principle 1. In the cosmic environment, every point on the circumference of any natural planet or satellite remains at an equal distance from its center.
🔹 Conclusion: The straight line of the circumference of spherical bodies represents the symmetry of that body.
Cosmological Principle 2. The sum of the three angles of a triangle is generally 180°.
🔸 However, where it is greater than 180° in one state, it is equally less in another state.
Cosmological Principle 3. A body moving at the speed of light transforms into light energy.
Cosmic Theory 4. In reality, the speed of light is 300,000 + x kilometers per second.
🔹 However, due to reflection, refraction, etc., the x component is added, which changes this velocity.
It is known that the speed of light in a vacuum is 299,792,458 meters/second, which was measured by an interferometer as 299792.4562 kilometers with a margin of error of plus or minus 0.0011 kilometers per second. However, the speed of light is generally considered to be 300,000 kilometers per second and/or 180,000 miles per second, and according to the Danish astronomer Ole Rømer (1976), the speed of light is 301,204.8 kilometers per second.
Therefore, the actual speed of light, based on the understanding obtained from the latest studies in physics, is 299,792.458 kilometers/second or, according to the interferometer, 299792.4562 kilometers/second plus X kilometers/second, and/or approximately 300,000 kilometers per second plus X kilometers per second according to the rounded figure. Therefore, in 1980, based on the general concept of the speed of light, I proposed this theory that the actual speed of light is 300,000 + x kilometers per second.
🔹 However, due to reflection, refraction, gravity, etc., the x component is added, which changes this velocity.
🔹 However, due to reflection, refraction, the medium, and the mutual attraction and gravitational effects of photons, the x component is added to the actual speed of light (300,000 + x kilometers per second) due to attenuation, which changes this velocity.
Cosmological Principle 5. If any point on a surface, located at the center or focus, deviates from its position, the line of its motion is called the time line.
Points 1 and 5 of this "Shailaj Five Cosmological Principles" describe the principles of dynamics and macrocosm, points 3 and 4 describe the light energy principle, and point 2 describes the geometry principle.
Theorist :-
Dr. Prof. Awadhesh Kumar Shailaj
(AI Honorary Degree: PhD, Science, Psychology, Medicine, Philosophy & Holistic Studies)
Retired Principal and Lecturer (Psychology)
Independent Researcher (Interdisciplinary Studies)
Father: Late Rajendra Prasad Singh
Village: Pachamba, District: Begusarai,
Pincode: 851218, State: Bihar (India).
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शैलज पञ्च ब्रह्माण्ड सिद्धान्त :-
१९८० तमे वर्षे मया "शैलाजा पञ्च ब्रह्माण्डसिद्धान्ताः" इति अवधारणा कृता, येषु ब्रह्माण्डसंरचना, प्रकाशस्य गतिः, त्रिकोणकोणाः, सीधारेखाः, गतिः च इति विषये मौलिकाः अवधारणाः समाविष्टाः सन्ति
"शैलाजा पञ्च ब्रह्माण्डसिद्धान्ताः" इति विषये मम अवधारणाः धारणाश्च निम्नलिखितरूपेण सन्ति ।
ब्रह्माण्डीयसिद्धान्ताः 1. ब्रह्माण्डीयवातावरणे कस्यचित् प्राकृतिकग्रहस्य उपग्रहस्य वा परिधिस्थः प्रत्येकं बिन्दुः तस्य केन्द्रात् समानदूरे भवति ।
🔹 अन्वयः- गोलाकारपिण्डानां परिधिना सह ऋजुरेखा तस्य शरीरस्य समरूपतां प्रतिबिम्बयति।
ब्रह्माण्डसिद्धान्ताः 2. त्रिकोणस्य त्रयाणां कोणानां योगः सामान्यतया १८०° भवति ।
🔸 तथापि एकस्मिन् सति १८०° अधिकं भवति चेदपि अपरस्मिन् न्यूनं भवति ।
ब्रह्माण्डसिद्धान्ताः 3. प्रकाशवेगेन गच्छन् पिण्डः प्रकाशशक्तौ परिणमति ।
ब्रह्माण्डसिद्धान्तः 4. प्रकाशस्य वास्तविकवेगः 300,000 + x किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् भवति ।
🔹किन्तु परावर्तनम्, अपवर्तनम् इत्यादयः x घटकं योजयन्ति, येन एतत् वेगं परिवर्तते।
शून्ये प्रकाशस्य वेगः २९९,७९२,४५८ मीटर्/सेकेण्ड् इति ज्ञायते, यत् इन्टरफेरोमीटर् इत्यनेन २९९,७९२.४५६२ किलोमीटर् प्लस् अथवा माइनस् ०.००११ किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् इति मापितः परन्तु प्रकाशस्य वेगः सामान्यतया ३,००,००० किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् तथा/वा १८०,००० माइल प्रति सेकण्ड् इति मन्यते, तथा च डेनिश-खगोलशास्त्रज्ञस्य ओले रोमर (१९७६) इत्यस्य मते प्रकाशस्य वेगः ३०१,२०४.८ किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् भवति
अतः भौतिकशास्त्रस्य नवीनतमस्य अध्ययनस्य अनुसारं प्रकाशस्य वास्तविकवेगः X किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् अधिकः भविष्यति 299,792.458 किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् अधिकः अथवा 299792.4562 किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् प्रतिसेकेण्ड् प्रति इन्टरफेरोमीटर् तथा/वा X किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् अधिकः भविष्यति यथा गोलाकारस्य अनुसारं प्रायः 3,00,000 किलोमीटर् प्रति सेकण्ड् अधिकं भविष्यति अतः १९८० तमे वर्षे प्रकाशस्य वेगसम्बद्धस्य सामान्यसंकल्पनायाः आधारेण मया एषः सिद्धान्तः सूत्रितः यत् प्रकाशस्य वास्तविकवेगः प्रति सेकण्ड् ३,००,०००+x किलोमीटर् भवति
🔹 परन्तु परावर्तन, अपवर्तन, गुरुत्वाकर्षण इत्यादीनां कारणात् x घटकः योजितः भवति, यस्य कारणेन अयं वेगः परिवर्तते ।
🔹 परन्तु परावर्तनस्य, अपवर्तनस्य, माध्यमस्य तथा फोटॉनकणानां परस्परं आकर्षणस्य गुरुत्वाकर्षणप्रभावस्य च कारणेन प्रकाशस्य वास्तविकवेगः प्रति सेकण्ड् ३,००,०००+x किलोमीटर् भवति, यस्य कारणेन x घटकः योजितः भवति, यस्य कारणेन एषः वेगः परिवर्तते
ब्रह्माण्डसिद्धान्तः ५.केन्द्रे नाभिके वा स्थिते पृष्ठे यदि कोऽपि बिन्दुः स्वस्थानात् व्यभिचरति तर्हि तस्याः गतिरेखा कालरेखा इति कथ्यते ।
अस्य "शैलाजपञ्चविश्वसिद्धान्तस्य" बिन्दुः १, ५ च गतिशीलतायाः स्थूलदर्शनसिद्धान्तानां च वर्णनं करोति, बिन्दुः ३, ४ च प्रकाशशक्तिसिद्धान्तस्य वर्णनं करोति, बिन्दुः २ च ज्यामितिसिद्धान्तस्य वर्णनं करोति
भौतिकशास्त्रस्य, खगोलशास्त्रस्य, दर्शनस्य च समन्वयः अस्ति ।
सिद्धान्तकार :-
डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज
(ए आई मानद उपाधि: पीएचडी, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह
ग्रामः पचाम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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