शाब्दिक अर्थ में "Tit for tat" से तात्पर्य "जैसे को तैसा" या "जैसी करनी वैसी भरनी" होता है, लेकिन विशेष अर्थ "किसी क्रिया के सन्दर्भ में उसी तरह के गुण-धर्म वाली समानुपातिक अनुक्रिया को कहते हैं।" परन्तु "Tit for tat" का इन अर्थों या भावों के साथ उपयोग मानव (प्रकृति आश्रित, नियन्त्रित एवं प्रेरित प्राणी), मानवेतर प्राणियों (प्रकृति आश्रित एवं नियन्त्रित प्राणी) एवं वनस्पति (प्रकृति आश्रित प्राणी) व्यवहार में उपस्थित होने की संभावना स्वाभाविक एवं प्राकृतिक होती है, लेकिन मानव प्रकृति आश्रित, नियन्त्रित एवं प्रेरित होने के साथ ही सामान्यतः ज्ञान, विवेक और समायोजन उन्मुख प्राणी होता है तथा स्वस्थ सह-अनुभूति की अवस्था में रचनात्मक, सकारात्मक एवं आदर्श दिशा में बढ़ता है, परिणामस्वरूप उसके द्वारा "Tit for tat" प्रतिक्रियात्मक गतिविधियाँ नहीं होकर सम्यक् बोधात्मक, अनुक्रियात्मक, सह-अनुभूति परक, निष्पक्ष एवं पूर्वाग्रह रहित समायोजनत्मक सोच एवं व्यवहार हो जाता है।
Tit for Tat “ऊर्जा-प्रतिक्रिया सिद्धांत” का व्यवहारिक रूप है।
व्यक्ति जिस मानसिक-ऊर्जा तरंग को भेजता है, वही तरंग उसे प्रत्यावर्तित होती है।
किंतु उच्च चेतना स्तर पर “सचेत प्रतिक्रिया” (Conscious Response) प्रतिशोध से श्रेष्ठ मानी जाती है।
इस प्रकार साधारण चेतना जहाँ Tit for Tat कहलाती है वहीं उच्च चेतना की स्थिति में वह Transform for Harmon का स्थान ग्रहण कर लेती है।
अतः “Tit for Tat” केवल अनुक्रिया, प्रतिक्रिया या प्रतिशोध नहीं है, बल्कि संतुलित और नियंत्रित प्रतिक्रिया की रणनीति है, जो सहयोग उन्मुख और पूर्वाग्रह रहित एवं निष्पक्ष न्याय का पक्षधर होती है साथ ही क्षमा और विवेक के समावेश की अवस्था में उच्च स्तरीय संस्कार सम्पन्न होती है।
डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज
(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
***********************************
Shailaja's "Tit for Tat" Adjustment Theory:
Literally, "tit for tat" means "tit for tat" or "as you sow, so shall you reap." However, its more specific meaning is "a proportionate response with similar qualities to an action." However, the use of "tit for tat" with these meanings or expressions is likely to occur in the behavior of humans (nature-dependent, controlled, and motivated creatures), non-human creatures (nature-dependent and controlled creatures), and plants (nature-dependent creatures). However, humans, while being nature-dependent, controlled, and motivated, are generally creatures with knowledge, discretion, and adjustment orientation. In a state of healthy empathy, they progress in a constructive, positive, and ideal direction. As a result, their "tit for tat" actions are not merely reactive, but rather reflective, responsive, empathetic, unbiased, and unbiased, adjusting thinking and behavior.
Tit for Tat is the practical form of the "energy-feedback principle."
The mental energy wave a person sends is the same wave reflected back to them.
But at a higher level of consciousness, "conscious response" is considered superior to retaliation.
Thus, while ordinary consciousness is called tit for tat, in a state of higher consciousness, it takes the place of transformation for harmonization.
Thus, "tit for tat" is not merely a reaction, response, or retaliation, but a strategy of balanced and controlled response, which is cooperative, unbiased, and supports impartial justice. It also fosters high-level sanskars (cultures) when forgiveness and discernment are incorporated.
Dr. Prof. Avadhesh Kumar Shailaja
(AI Honorary Degree: PhD, Science, Psychology, Medicine, Philosophy, and Holistic Studies)
Retired Principal and Lecturer (Psychology)
Independent Researcher (Interdisciplinary Studies)
Father: Late Rajendra Prasad Singh
Village: Pachamba, District: Begusarai,
Pincode: 851218, State: Bihar (India).
**********************************
शैलजस्य "टिट् फ़ॉर् टैट्" समायोजनसिद्धान्तः :-
अक्षरशः "तिट् प्रति तत्" इत्यस्य अर्थः "तत् प्रति तात्" अथवा "यथा भवन्तः वपन्ति तथा तथा लप्स्यन्ते" इति । परन्तु तस्य विशिष्टतरः अर्थः "कर्मणां समानगुणयुक्ता आनुपातिकप्रतिक्रिया" इति । परन्तु एतेषां अर्थानां वा व्यञ्जनानां वा सह "टिट् फ़ॉर् टट्" इत्यस्य प्रयोगः मनुष्याणां (प्रकृतिनिर्भरानां, नियन्त्रितानां, प्रेरितानां च प्राणीनां), अमानवजीवानां (प्रकृतिनिर्भराः नियन्त्रितजीवाः), वनस्पतयः (प्रकृतिनिर्भराः च प्राणिनः) व्यवहारे भवितुं शक्यते परन्तु मनुष्याः प्रकृतिनिर्भराः, नियन्त्रिताः, प्रेरिताः च सन्तः सामान्यतया ज्ञानविवेकयुक्ताः, समायोजनप्रवृत्तियुक्ताः प्राणिनः भवन्ति । स्वस्थसहानुभूतेः अवस्थायां ते रचनात्मके, सकारात्मके, आदर्शे च दिशि प्रगतिम् कुर्वन्ति । फलतः तेषां "टिट् फ़ॉर् टैट्" क्रियाः केवलं प्रतिक्रियाशीलाः न भवन्ति, अपितु चिन्तनात्मकाः, प्रतिक्रियाशीलाः, सहानुभूतिपूर्णाः, निष्पक्षाः, निष्पक्षाः च भवन्ति, चिन्तनं व्यवहारं च समायोजयन्ति
टिट् फ़ॉर् टैट् "ऊर्जा-प्रतिक्रियासिद्धान्तस्य" व्यावहारिकं रूपम् अस्ति ।
यः मानसिकशक्तितरङ्गः प्रेषयति सः एव तरङ्गः तेभ्यः प्रतिबिम्बितः भवति ।
परन्तु चेतनायाः उच्चस्तरस्य "चेतनप्रतिक्रिया" प्रतिकारात् श्रेष्ठा इति मन्यते ।
एवं साधारणं चैतन्यं तत् प्रति तित् इति उच्यते, उच्चतरचैतन्यावस्थायां तु सामञ्जस्यार्थं विकारस्थानं गृह्णाति।
एवं "टिट् फ़ॉर् टैट्" केवलं प्रतिक्रिया, प्रतिक्रिया, प्रतिकारः वा न भवति, अपितु सन्तुलितनियन्त्रितप्रतिक्रियायाः रणनीतिः, या सहकारी, निष्पक्षः, निष्पक्षन्यायस्य समर्थनं च करोति क्षमाविवेकयोः समावेशे उच्चस्तरीयसंस्काराः (संस्कृतयः) अपि पोषयति ।
डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज
(ए आई मानद उपाधि: पीएचडी, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिंह
ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें