शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

आदरणीय डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज जी 🙏
अब प्रस्तुत है —
📘 M.A. in Political Communication & Democratic Leadership
सेमेस्टर II
कोर्स: PCDL-201
मीडिया मनोविज्ञान एवं फ्रेम सिद्धांत
(4 क्रेडिट | 60 शिक्षण घंटे | 10–15 पृष्ठ समकक्ष विस्तृत यूनिट कंटेंट)
🟦 Course Objectives
मीडिया और मानव मनोविज्ञान के पारस्परिक संबंध को समझना
फ्रेम सिद्धांत (Framing Theory) की अवधारणा का विश्लेषण
जनमत निर्माण की मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन
मीडिया प्रभाव के लोकतांत्रिक निहितार्थों का मूल्यांकन
🟦 Course Learning Outcomes (CLO)
छात्र सक्षम होंगे:
CLO1: मीडिया प्रभाव के मनोवैज्ञानिक मॉडल की व्याख्या
CLO2: समाचार फ्रेम की पहचान और विश्लेषण
CLO3: नैरेटिव और धारणा-निर्माण के संबंध को समझना
CLO4: मीडिया साक्षरता आधारित नीति दृष्टिकोण विकसित करना
🟦 UNIT 1
मीडिया मनोविज्ञान की आधारभूत अवधारणा (15 घंटे)
1.1 मीडिया और संज्ञान (Cognition)
मीडिया सूचना को केवल प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि उसे संरचित करता है।
मानव मस्तिष्क:
चयनात्मक ध्यान (Selective Attention)
चयनात्मक स्मृति (Selective Memory)
पुष्टि पूर्वाग्रह (Confirmation Bias)
के आधार पर सूचना ग्रहण करता है।
1.2 Agenda-Setting सिद्धांत
मीडिया यह तय नहीं करता कि लोग क्या सोचें,
बल्कि यह प्रभावित करता है कि लोग किस विषय पर सोचें।
1.3 Priming प्रभाव
किसी मुद्दे को लगातार प्रस्तुत करना जनता की मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
1.4 भावनात्मक सक्रियण (Emotional Activation)
भय, आशा, क्रोध जैसे भाव मीडिया प्रस्तुति से प्रभावित होते हैं।
🟦 UNIT 2
फ्रेम सिद्धांत (Framing Theory) (15 घंटे)
2.1 फ्रेम क्या है?
फ्रेम वह दृष्टिकोण है जिसके माध्यम से किसी घटना को प्रस्तुत किया जाता है।
उदाहरण:
“आर्थिक सुधार”
“मूल्य वृद्धि संकट”
दोनों एक ही घटना के अलग फ्रेम हो सकते हैं।
2.2 फ्रेम के प्रकार
प्रकार
विशेषता
समस्या फ्रेम
मुद्दे को संकट के रूप में प्रस्तुत करना
समाधान फ्रेम
सुधारात्मक दृष्टि
नैतिक फ्रेम
मूल्य-आधारित प्रस्तुति
संघर्ष फ्रेम
टकराव को उभारना
2.3 फ्रेम विश्लेषण मॉडल
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घटना
   ↓
चयनित शब्द
   ↓
दृश्य/चित्र
   ↓
भावनात्मक संकेत
   ↓
जनधारणा
2.4 फ्रेम और लोकतांत्रिक गुणवत्ता
फ्रेमिंग यदि संतुलित हो तो जनचेतना बढ़ती है;
यदि पक्षपातपूर्ण हो तो ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
🟦 UNIT 3
मीडिया प्रभाव और जनमत निर्माण (15 घंटे)
3.1 Spiral of Silence सिद्धांत
लोग अल्पसंख्यक मत व्यक्त करने से बचते हैं।
3.2 Social Identity और मीडिया
मीडिया समूह-आधारित पहचान को मजबूत या कमजोर कर सकता है।
3.3 भारतीय संदर्भ और संवैधानिक नैतिकता
भारतीय लोकतांत्रिक विमर्श में संवैधानिक संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
B. R. Ambedkar ने सामाजिक समरसता को लोकतंत्र का आधार माना।
मीडिया प्रस्तुति इस समरसता को सुदृढ़ या कमजोर कर सकती है।
3.4 डिजिटल एल्गोरिथ्म और Echo Chamber
सोशल मीडिया एल्गोरिथ्म समान विचारों को बार-बार प्रस्तुत कर सकता है, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ता है।
🟦 UNIT 4
मीडिया साक्षरता एवं नैतिकता (15 घंटे)
4.1 मीडिया साक्षरता (Media Literacy)
स्रोत पहचान
तथ्य-जाँच
संदर्भ समझ
4.2 जिम्मेदार फ्रेम निर्माण
लोकतांत्रिक संवाद में फ्रेम:
तथ्य-आधारित
संतुलित
संवैधानिक मर्यादा-सम्मत
होना चाहिए।
4.3 मीडिया विश्लेषण अभ्यास
छात्रों को:
समाचार शीर्षक
दृश्य प्रस्तुति
शब्द चयन
का विश्लेषण करना होगा।
4.4 लोकतांत्रिक गुणवत्ता मॉडल
Copy code

संतुलित फ्रेम
      +
तथ्यात्मक प्रस्तुति
      +
भावनात्मक संयम
      +
संवैधानिक निष्ठा
      =
जिम्मेदार मीडिया प्रभाव
🟦 Teaching Methodology
समाचार क्लिप विश्लेषण
मीडिया फ्रेम मैपिंग
केस स्टडी
समूह चर्चा
🟦 Practical Component
5 समाचारों का फ्रेम विश्लेषण
1000 शब्द मीडिया आलोचना रिपोर्ट
डिजिटल एल्गोरिथ्म अध्ययन
🟦 Evaluation Pattern
घटक
अंक
आंतरिक मूल्यांकन
30
सेमेस्टर परीक्षा
40
प्रस्तुति
20
असाइनमेंट
10
🟦 समेकित सूत्र
Copy code

मीडिया प्रस्तुति
      +
मनोवैज्ञानिक प्रभाव
      +
फ्रेम विश्लेषण
      +
संवैधानिक संतुलन
      =
सुदृढ़ लोकतांत्रिक विमर्श
अब अगला कोर्स:
📘 PCDL-202 : टीवी बहस विज्ञान एवं मंचीय प्रस्तुति
क्या हम आगे बढ़ें? 🎓

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