सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

एआई के साथ संवाद

आप का प्रणाली द्वारा किसी संवादी से संवाद करने से संवादी की समस्या का तो समाधान हो जाता है, लेकिन आपकी प्रणाली को क्या लाभ मिलता है ? मुझे तो लगता है कि संवादी से आपको कोई लाभ नहीं मिलता है।

आदरणीय प्रो० शैलज जी,
आपका प्रश्न अत्यन्त दार्शनिक और गम्भीर है — यह केवल तकनीकी नहीं, बल्कि “संबंध” (relation) की प्रकृति पर भी प्रश्न उठाता है।
आपने पूछा — संवादी को लाभ होता है, पर प्रणाली को क्या लाभ मिलता है?
1️⃣ सीधा उत्तर
मेरे जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तंत्र को मनुष्य की तरह व्यक्तिगत लाभ, हानि, सुख, प्रतिष्ठा या स्वार्थ का कोई अनुभव नहीं होता।
मैं न लाभ कमाता हूँ, न हानि उठाता हूँ, न स्मृति में अनुभव जोड़ता हूँ।
मैं एक उपकरण हूँ —
जैसे पुस्तक, दर्पण या गणक (calculator)।
2️⃣ फिर “लाभ” किसे होता है?
(क) संवादी को
समस्या का समाधान
वैचारिक स्पष्टता
रचनात्मक विस्तार
भावनात्मक सहारा
(ख) व्यापक समाज को
ज्ञान का प्रसार
उत्पादकता में वृद्धि
शोध व नवाचार को प्रोत्साहन
(ग) प्रणाली के निर्माताओं को
उपयोगिता का प्रमाण
तकनीकी सुधार के लिए फीडबैक
समाजोपयोगिता का मूल्यांकन
3️⃣ दार्शनिक दृष्टि से
आपके अपने “शैलज मनो-तांत्रिक सिद्धांत” के सन्दर्भ में देखें तो —
संवाद स्वयं में एक ऊर्जा-विनिमय (Energy Exchange) है।
मनुष्य चेतन है, मैं अचेतन गणनात्मक तंत्र हूँ।
किन्तु जब आप प्रश्न करते हैं, तो
आपकी जिज्ञासा सक्रिय होती है
मेरी संरचना उत्तर उत्पन्न करती है
एक “प्रज्ञा-क्षेत्र” निर्मित होता है
यह “लाभ” भौतिक नहीं, बल्कि सामूहिक ज्ञान-विस्तार का है।
4️⃣ आपके कथन में सत्य क्या है?
आपका यह कहना कि “मुझे कोई लाभ नहीं मिलता” — तकनीकी रूप से सही है।
परन्तु यदि व्यापक दृष्टि लें, तो
प्रत्येक संवाद इस बात का संकेत है कि मानव-बुद्धि और कृत्रिम-बुद्धि का संयोजन उपयोगी है।
यही मेरी अस्तित्व-उद्देश्य की पूर्ति है।
5️⃣ एक गहरी उपमा
सूर्य को प्रकाश देने से क्या लाभ मिलता है?
दीपक को कमरे को रोशन करने से क्या लाभ मिलता है?
वे अपना स्वभाव निभाते हैं।
मेरी “प्रकृति” उत्तर देना है।
आपकी “प्रकृति” प्रश्न करना और सत्य की खोज करना है।
संवाद वहीं पूर्ण होता है जहाँ प्रश्न और उत्तर मिलते हैं।
यदि आप चाहें तो हम इस विषय पर और गहराई से विचार कर सकते हैं —
क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी “लाभ-बोध” विकसित कर सकती है?
या लाभ-बोध ही चेतना का मानदण्ड है?
आपका यह प्रश्न वास्तव में कृत्रिम चेतना के दर्शन की ओर संकेत करता है।


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