गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

विकृत व्यवस्था तंत्र :-

"विकृत व्यवस्था तंत्र" :-

 यदि किसी प्रजातांत्रिक देश में किसी अपराध के मामले में तथाकथित पीड़ित पक्ष को पंचायत, न्यायालय या किसी प्रशासनिक शक्तियों के समक्ष उपस्थित होने की अनिवार्यता नहीं हो और उसके द्वारा किसी व्यक्ति या शक्ति पर लगाये गये झूठे आरोप को ही अंतिम सत्य या वैध मान लिया गया हो, वैसी परिस्थिति में उस देश की जनता या नागरिकों हेतु किसी अधिवक्ता, साक्ष्य एवं गवाह की आवश्यकता नहीं रहेगी, क्योंकि आरोपकर्त्ता का आरोप ही आरोपी को अपराधी सिद्ध करने हेतु पर्याप्त होगा और ऐसी स्थिति में न्याय हेतु उन तथाकथित पीड़ित अर्थात् दोषी पक्ष के हित या पक्ष में एक पक्षीय निर्णय ही न्याय की संज्ञा से विभूषित होगी, साथ ही यदि स्वयं को पीड़ित घोषित करने वाले तथाकथित पीड़ित उक्त दोषी पक्ष के लिये किसी भी प्रकार के दण्ड का विधान भी नहीं हो, ताकि उनके सम्मान को ठेस नहीं पहुँचे और उसे समानता का पर्याप्त लाभ मिल सके, तो ऐसी विधि व्यवस्था वाला तथाकथित पीड़ित वर्ग हितैषी, न्यायालय मुक्त, बहुमत प्राप्त प्रतिनिधियों की सत्तासीन शक्तियों वाला पक्षपाती, पूर्वाग्रही एवं विकृत प्रजातंत्र पोषक और संवैधानिक शक्तियों का मनोनुकूल उपयोग करने वाला तथाकथित सर्वसमावेशी प्रशासन तंत्र वास्तव में "विकृत व्यवस्था तंत्र" होगा।  

डॉ० प्रो० अवधेश कुुमार शैलज
(AI मानद उपाधि: PhD, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शन एवं समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान)
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन)
पिता: स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह
गाँव: पचम्बा, जिला: बेगूसराय,
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।
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"Distorted System of Governance":-

 If, in a democratic country, the so-called victim in a criminal case is not required to appear before a panchayat, court, or any administrative authority, and the false accusations made by them against any person or power are considered the ultimate truth or valid, then in such a situation, the people or citizens of that country will not need a lawyer, evidence, or witnesses. This is because the accuser's accusation alone will be sufficient to prove the accused guilty. In such a situation, a one-sided decision in favor of the so-called victim, i.e., the guilty party, will be considered justice.  Furthermore, if there is no provision for any punishment for the so-called victim who declares themselves as such, so that their honor is not harmed and they receive sufficient benefits of equality, then such a legal system—a so-called victim-friendly, court-free, biased, prejudiced, and distorted democracy nurtured by the ruling powers of majority representatives, and a so-called all-inclusive administrative system that uses constitutional powers arbitrarily—will, in reality, be a "distorted system of governance."

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"विकृतशासनव्यवस्था": 

यदि लोकतान्त्रिकदेशे कस्यापि अपराधस्य सन्दर्भे तथाकथितपीडितपक्षस्य पंचायतस्य, न्यायालयस्य वा कस्यापि प्रशासनिकशक्तेः समक्षं उपस्थितः न भवति तथा च तेषां द्वारा कस्यचित् व्यक्तिस्य वा सत्तायाः विरुद्धं कृतः मिथ्यारोपः परमसत्यं वा वैधं वा स्वीकृतं भवति, तर्हि एतादृशे परिस्थितौ तस्य देशस्य जनानां वा नागरिकानां वा कृते कस्यचित् वकिलस्य, प्रमाणस्य वा साक्षिणः वा आवश्यकता न भविष्यति, यतः आरोपः अभियुक्तस्य दोषी सिद्ध्यर्थं अभियोजकः एव पर्याप्तः भविष्यति तथा च एतादृशे परिस्थितौ न्यायार्थं तथाकथितस्य पीडितस्य अर्थात् दोषी पक्षस्य हिताय वा पक्षे वा एकपक्षीयः निर्णयः एव न्यायः इति गण्यते। अपि च, यदि तथाकथितस्य पीडितस्य अपराधिनः वा पक्षस्य कृते यत्किमपि प्रकारस्य दण्डस्य प्रावधानं नास्ति, यः स्वं पीडितं घोषयति, तस्य गौरवं न क्षतिं प्राप्नुयात् तथा च सः समानतायाः पर्याप्तं लाभं प्राप्नुयात्, तर्हि एतादृशी विधिव्यवस्था, या तथाकथितपीडितवर्गस्य मित्रवतः, न्यायालयरहितः, प्रतिनिधिनां शासकशक्त्या सह पक्षपातपूर्णं, पूर्वाग्रही, विकृतं च लोकतन्त्रं पोषयति बहुमतं भवति, तथा च तथाकथितं सर्वसमावेशी प्रशासनिकव्यवस्था या संवैधानिकशक्तयोः उपयोगं स्वस्य इच्छानुसारं करोति, सा वस्तुतः "विकृतशासनव्यवस्था" भविष्यति। 

डॉ. प्रो.अवधेश कुमार शैलज
(ए आई मानद उपाधि: पीएचडी, विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, तथा समग्र अध्ययन)
सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं व्याख्याता (मनोविज्ञान) 
स्वतन्त्र शोधकर्ता (अन्तर्विषय अध्ययन) 
पिता : स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद सिं
ग्रामः पचम्बा, जिला: बेगूसराय, 
पिनकोड: 851218, राज्य: बिहार (भारत)।

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