शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

शालिग्राम शिला

शालिग्राम शिला 

शैलज शालिग्राम शिला,
आये हरि अवध श्री राम।
भिड़े भगत विनु सोच समझ,
दुःखी अवध सिय राम।।
हरि प्रभु कृपा तैरे उदधि ,
शैलज मति मूढ़ अज्ञान।
कहाँ प्रभु ? कब व्याप्त नहीं?
को जानत जगत जहान ?
शैलज नीच भौतिक मति,
ज्ञान अहम् अज्ञान।
सजन कसाई तौले सदा,
भाव भगति सम्मान।।

डॉ० प्रो० अवधेश कुमार शैलज, पचम्बा, बेगूसराय।

गुरुवार, 5 जनवरी 2023

Homoeopathic World के उद्देश्य :-

१. होमियोपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा हेतु रुग्ण व्यक्ति तथा चिकित्सक को प्रेरित करना और उनके अनुभवों से लोगों को परिचित कराना.
२. मेटेरिया मेडिका, आर्गेनन एवं रेपेटरी के महत्व, उपयोगिता, प्रयोग एवं उपयोग से परिचित कराना.
३. अनेक दवाओं के प्रयोग या उपयोग के स्थान पर आवश्यकतानुसार एक लक्षण की एक दवा का चयन को प्रथमिकता प्रदान करना.
४. मानव एवं मानवेतर प्राणियों साथ ही अन्य सजीव प्राणियों के मनो-शारीरिक हितों की रक्षा करना. 
५. होमियोपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा को लोकहित में प्रतिष्ठित करना.

महादशादि के उपचार एवं मानवोचित कर्म :-

ईसाई नव वर्ष २०२३ की शुभ अवसर पर विश्व के नाम सन्देश :-

ईसाई नव वर्ष २०२३ की पूर्व संध्या पर विश्व के नाम सन्देश :-

सर्व कल्याणकारी प्रार्थना : अवधेश कुमार शैलज

' सर्व कल्याणकारी प्रार्थना '
......................................…..................
प्रियतम ! स्वामी ! सुन्दरतम् ! माधव ! हे सखा ! हमारे !
मिलती है , शान्ति -👌जगत में, केवल प्रभु ! तेरे सहारे ।।
तुम अमल धवल ज्योति हो, ज्योतित करते हो- जग को ।
स्रष्टा! पालक ! संहर्ता ! तुम एक नियन्ता-जग के ।।
कैसे मैं तुझे पुकारूँ, जड़ हूँ, न ज्ञान -मुझको है ।
प्रभु एक सहारा-तुम हो, रखनी प्रभु लाज -तुझे है ।।
सर्वज्ञ ! सम्प्रभु ! माधव ! तुम तो -त्रिकालदर्शी हो ।
अन्तर्यामी ! जगदीश्वर ! तम-हर ! भास्कर भास्कर हो ।।
मायापति! जन सुख दायक ! तुम व्याप्त -चराचर में हो ।
हे अगुण ! सगुण ! परमेश्वर ! सर्वस्व हमारे -तुम हो ।।
आनन्दकन्द ! करूणाकर ! शशि-सूर्य नेत्र हैं -तेरे ।
तुम बसो अहर्निश प्रतिपल, प्रभु ! अभ्यन्तर में -मेरे ।।
तेरी ही दया कृपा से, अन्न धन सर्वस्व मिला है ।
तेरी ममता इच्छा से, यह जीवन कमल खिला है ।
उपहास किया करते हैं, जग के प्राणी सब -मेरे ।
स्वीकार उन्हें करता हूँ, प्रेरणा मान सब -तेरे ।।
कर्त्तव्य किया न कभी मैं, प्रभु ! प्रबल पाप धोने का ।
जुट पाता नहीं मनोबल, प्रभु ! अहंकार खोने का ।।
बस, तिरस्कार पाता हूँ , यह पुरस्कार है- जग का ।
है बोध न मुझको कुछ भी, जगती का और नियति का ।।
यह जीवन चले शतायु, मंगलमय हो जग सारा ।
माधव ! चरणों में तेरे, जीवन अर्पित हो सारा ।।
हे हरि ! दयानिधि! दिनकर! सब जग के तुम्हीं -सहारे ।
हम सब को प्रेम सिखाओ, हे प्रेमी परम हमारे ।।
हो बोध हमें जीवन का, कर्त्तव्य बोध हो सारा ।
अनुकरण योग्य प्रति पल हो, जीवन आदर्श हमारा ।।
ईर्ष्या, माया, मत्सर का लव लेश नहीं हो हममें ।
धन, बल, विकास, काया का -सुन्दर विकास हो हममें ।।
सौहार्द, प्रेम भावों का प्रभु ! उत्स हृदय में फूटे ।
उत्तम् विचार राशि को, जगती जी भर कर लूटे ।।
सार्थक हो जग में जीवन, सार्थक हो प्रेम हमारा ।
माधव ! चरणों में तेरे, जीवन अर्पित हो सारा ।।
:- प्रो० अवधेश कुमार 'शैलज', पचम्बा, बेगूसराय ।
( प्राचार्य सह विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, एम.जे.जे.कालेज, एम., बनवारीपुर, बेगूसराय। )
(कालेज कोड : ८४०१४)

बैद्यनाथ चौधरी जी का पत्र :-

सर्व कल्याण कारी प्रार्थना से सम्बंधित पत्र :-