मंगलवार, 14 जुलाई 2020

Kali Mure (कालीम्यूर)

मन:स्थिति (Mental symptoms/condition) :-भूखों मरने की कल्पना।

आँख (Eye) :- आँखों के पलकों पर चौड़े घाव एवं पीब। आँखों में से सफेद कफ का निकलना। कनीनिका पर चिपटे गंडमाला का घाव तथा निचले भाग में धुंध जाला।कनीनिका में छिछला घाव।श्राव सफेद। चक्षु कोण ताल में रोहा।


कान ( Ear) :- कान की झिल्ली और/या परदा सिकुड़ा हुआ। कान की झिल्ली में तरी और/या दाने। कान की दीवार सूखी और क्षीण। कान के गढ़े में घाव। कान के बगल की ग्रन्थियों में वृद्धि और/या सूजन। कान में फड़कने या चटखने की आवाज।कान में तेज दर्द के साथ जीभ सफेद। कान में भरापन की अनुभूति। किसी वस्तु को निगलने या छींकने पर कान में कड़कड़ाहट की आवाज होना। कान के आस पास सूजन।मध्य कर्ण की पुरानी सर्दी की अवस्था एवं प्रदाह। मध्य कर्ण के श्राव के कारण गला और नाक बन्द। कान की नली बन्द।कान की ग्रन्थियाँ फूली हुई। कान के ढ़ोल से तर पपड़ियाँ छूटना। कान के भीतर दाने।

मुँह (Mouth) :- बच्चे या किसी भी व्यक्ति के मुख में सफेद घाव। छाती का दूध पिलाने वाली माताओं के मुख का घाव। मुख में जलन।

गर्भावस्था एवं प्रसव (Pregnancy & Labour) :- गर्भावस्था में सफेद श्लेष्मा की कै। प्रसूतिका या सौरी का ज्वर Kali Phos के समान।

ज्वर (Fever) :- सर्दी वाला पाकाशयिक ज्वर Ferrum Phos के समान।

मूत्र सम्बन्धी रोग ( Disease of urine) :- मूत्राशय में पुराना प्रदाह। गुर्दे के प्रदाह का प्रभाव।

पुरुष जनेन्द्रिय (Male Sex Organe) :- उपदंश का मुलायम घाव एक्जिमा के साथ।आँतो में सूजाक का प्रभाव।सूजाक के साथ त्वचा के नीचे से श्राव। सूजन के साथ सूजाक।

पाकाशय या आमाशय (Stomach) के विकार :- काले, चिपचिपे या थक्केदार खून या गाढ़े सफेद बलगम की कै। पाकाशय से रक्त श्राव। पाकाशय या आमाशय में शू्ल कब्ज के साथ। पाकाशय के दाहिनी ओर के रोग या कष्ट।गरिष्ठ भोजन से अनपच या मन्दाग्नि। पित्त विकार में भूरी, लेकिन मन्दाग्नि में सफेद भूरी जबान या जिह्वा। गरम पेय के डकार।

स्नायविक लक्षण (Neuralagic Symptoms)

रक्त संचालन यन्त्र (Circulatory System) :- तन्तु मय उपादानों और धमनियों में रुकावट।धड़कन अत्यधिक।

निद्रा एवं स्वप्न (Sleeping & Dream) :- जरा सी आवाज से नींद खुलना।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue & Taste) :- भूरी कत्थई या सूजन युक्त जिह्वा।

सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :- 

नाक (Nose) :- 

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :- 

दाँतों एवं मसूड़ों (Teeth & Gums) :- 

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- तेज आवाज वाली, भौकने की तरह, काली खांसी।दूध सा सफेद या भूरा सफेद, चिमड़े प्रकृति की तथा आवाज वाली श्लेष्मा या बलगम वाली खाँसी। वायु नलियों से सर्दियों का नि:श्राव।

उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool) :-

त्वचा (Skin) :-

तन्तु (Tissues) :- 

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) :-

ह्वास-वृद्धि (Amelioration- Aggravation ) :-

वृद्धि :- गरिष्ठ या चर्वीले भोजन या खाद्य पदार्थ या समोसा कचौड़ी आदि खाने से या स्नान करने से कष्ट बढ़ता है।

ह्वास :-

Ferrum Phos ( फेरमफॉस)

मन:स्थिति :-

तिल को पहाड़ समझना। नींद के बाद आराम।पागलपन स्वभाव की परिवर्त्तनशीलता के साथ। हर चीज के सम्बन्ध में लापरवाही।

आँख :- आँखों के भीतर मुख्यतः नेत्र गोलकों में और उन्हें घुमाने पर अत्यधिक दर्द बिना श्राव के। आँखों में और मुख्यतः नेत्र गोलकों में प्रदाह युक्त जलन। कनीनिका रोग की प्रथमावस्था। चक्षु कोण में तेज दर्द मुख्यतः गति से। आँखें सूखी एवं लाल। आँखों में तेज दर्द या प्रदाह बिना श्राव के। आँखों में बालू की अनुभूति।

कान :- रक्त हीन लोगों में कान का खुलना। कर्ण नली में प्रादाहिक शूल या दर्द। कान के भीतर गहरी लाली, खिंचाव, गर्मी, दपदपाहट, जलाने, कोचने, काटने और/या फैलने वाला तीव्र दर्द। कान के नुकीले अंश में सूजन एवं दर्द।ठंड से कर्ण प्रदाह। कान के प्रदाह से रक्त की प्रवणता और/या बहरापन। कान से पीब एवं श्लेष्मा का श्राव।

मसूड़ा :- मसूढ़ों की गर्मी एवं प्रदाह।

गर्भावस्था एवं प्रसव :- गर्भावस्था में प्रातःकालीन मिचली या अनपचे खाद्य पदार्थ की कै। प्रसवोपरांत कमजोरी Calcaria Flour से तुलनीय।

ज्वर :- ज्वर अत्यधिक शीत या ठंडक के साथ प्रतिदिन दोपहर 1 बजे दिन में। किसी भी तरह का ज्वर।

मूत्र यन्त्र :- नित्य बहुत अधिक मात्रा में अनैच्छिक मूत्र श्राव।पेशाब में प्रादाहिक लक्षण के साथ चूना तथा अण्डलाल।
मूत्र नली के गर्दन में उत्तेजना। गुर्दे में दर्द। रक्त मूत्र।

पुरुष जननांग :- सूजाक में प्रादाहिक अवस्था। शुक्र रज्जु का अर्बुद।

आमाशय या पाकाशय एवं उदर :- अम्लीय या खट्टे खाद्य पदार्थों या दूध या मछली की अनिच्छा। एल मदिरा या शराब या स्फूर्ति दायक खाद्य पदार्थों की इच्छा। उदर छूने या पाकाशय/आमाशय में दबाव से दर्द या वेदना। पाकाशय या आमाशय में शू्ल या दपदपाहट का दर्द दबाव से बढ़ता है,लेकिन ठंडक से घटता है। मन्दाग्नि (भूख की कमी) के साथ तमतमाया हुआ चेहरा। पाकाशय में वायु तथा चर्वी की डकार।अनपचे भोजन या उज्जवल लाल खून की कै।

रक्त संचालक अंग :- कौशिक तथा छोटी नाड़ियों का प्रसारण।नाड़ी भरी, गोल लेकिन रस्सी की तरह नहीं।लसिका वाहनियों का प्रदाह। शिरा प्रदाह और/या स्फीति।
हृदय का प्रदाह या हृदय के अन्तर्वेष्टी झिल्ली का प्रदाह।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue and Taste) :- गहरी लाल, थुलथुली या सूजन वाली, रोयेंदार तथा जड़ में प्रदाह युक्त जिह्वा ।

स्नायविक तन्त्र :- रक्त संचय के कारण स्नायुशूल या प्रादाहिक स्नायुशूल। प्रादाहिक स्नायुशूल या उसके साथ पक्षाघात। रात्रिकालीन स्नायविकता।

निद्रा एवं स्वप्न :- रक्त संचय से तथा कभी-कभी रात्रि में फेरमफॉस के उपयोग से अनिद्रा। दोपहर के बाद निद्रालुता।


सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :- 

नाक (Nose) :- 

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :- 

दाँतों एवं मसूड़ों (Teeth & Gums) :- 

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- फेफडों में रक्त संचय या कष्ट, टैटुओं में प्रदाह या छाती के उपसर्गों के साथ जलन। बगल में कोंचने का सा दर्द। सांस की रुकावट । स्वर यन्त्र का दर्द। बोलने या गाने पर रूखापन। बलगम रक्त रंजित। चोट लगने से रक्त श्राव। दर्द युक्त या सूखी खांसी। 

उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool) :-

त्वचा (Skin) :-

तन्तु (Tissues) :-

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) :- रज:श्राव 21 दिनों पर। ताजा लाल रक्त श्राव।

वृद्धि :- छूने से, गति की स्थिति में Kali Mure एवं Calcaria Phos के समान वृद्धि होती है।

ह्वास :- शीत या ठंडक से Calcaria Flour से कष्ट घटता है।



Calcaria Flour (कैल्कैरिया फ्लोर)

मन:स्थिति (Mental symptoms/condition) :-सम्पत्ति नष्ट होने का भय। कंजूस।


आँख (Eye) :- चक्षु कोण गोलकों में निरन्तर दर्द।आँखों में प्रकाशानुभूति मैग्नीशिया फॉस्फोरिका की तरह। आँखों का धुंधलापन कैली फॉस्फोरिकम् की तरह।


कान ( Ear) :- कान के परदे या गह्वर में चूना जम जाना।कान के नुकीले अस्थि आवरण या अंश में दर्द होना। कान की झिल्ली में कड़ी वृद्धि।

मुँह (Mouth) :- मुख या किसी भी अंग में कड़ी सूजन।जबड़े की हड्डियों पर समान्य या कड़ा सूजन।मुख के कोने में घाव और मुख्यतः ठंडापन।

गर्भावस्था एवं प्रसव (Pregnancy & Labour) :- स्तन में कड़ी गिल्टियाँ या कैंसर या कर्कट रोग या कड़े पिंड  Silicia के समान।

ज्वर (Fever) :- 

मूत्र सम्बन्धी रोग ( Disease of urine) :- मूत्राल्पता। मूत्र सड़ी महँक वाला।

पुरुष जनेन्द्रिय (Male Sex Organe) :- अंडकोश का कड़ापन। उपदंश का घाव।

पाकाशय या आमाशय (Stomach) के विकार :- अनपच से या अनपचे खाद्य पदार्थ की कै  Ferrum Phos या Calcaria Phos के समान।

स्नायविक लक्षण (Neuralagic Symptoms)

रक्त संचालन यन्त्र (Circulatory System) :- रक्त बहने वाली नाड़ी अर्थात् धमनी की वृद्धि या फैलना। रक्त बहा नाड़ी का अर्बुद। शिरा का घाव।

निद्रा एवं स्वप्न (Sleeping & Dream) :- नये दृश्य, स्थान आदि का स्वप्न। विपत्तियों के डर के साथ स्वप्न।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue & Taste) :- फटी हुई जिह्वा।

सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :-

नाक (Nose) :- 

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :- 

दाँतों एवं मसूड़ों (Teeth & Gums) :- 

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- कण्ठ में सुरसुरी के साथ ढ़ोकनेवाली खाँसी। पीला कड़ा या ढ़ीला लच्छेदार बलगम युक्त दमा। गले की नली बन्द मालूम होती है।
उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool)
त्वचा (Skin) :- 

तन्तु (Tissues) :- 

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) 

ह्वास-वृद्धि (Amelioration- Aggravation ) :-

वृद्धि :- नम ऋतु में नेट्रम सल्फ के समान वृद्धि होती है।

ह्वास :- पानी से सेंकने पर, मालिश करने तथा फेरमफॉस के समान शीत से कष्ट घटता है।

Kali Sulph (काली सल्फ)

मन:स्थिति (Mental symptoms/condition) :- गिरने का भय।

आँख (Eye) :- Kali sulph :- आँखों के अगले पटल का धुन्ध। अक्षि मुकुर  (lens) का धुन्धलापन। अस्पष्ट दृष्टि।नवजात शिशुओं का आँख आना। आँखों की पलकों पर पीली पपड़ियाँ।

कान ( Ear) :- कान के अन्दर अनेक जड़ों वाला फोड़ा जिससे कान बन्द। कान के बाहर अनेक जड़ों वाला फोड़ा। कान में काटने जैसा दर्द नीचे की तरफ। कान के भीतरी भाग में सूजन से बहरापन। बाहरी कान की सूजन से पीब। कान के नीचे काटने या खींचने जैसा दर्द। मांस वृद्धि से कान की नली बन्द। कान में पीले श्राव के साथ दर्द।

मुँह (Mouth) :- त्वचा का कर्कट रोग। मसूड़ा सफेद। निचले ओठ का सूखापन या सूजन। मुख में गर्मी। मुखक्षत मेंं मुख में और मुख्यतः तालू में गर्मी। निचले होठ से त्वचा छूटना।

गर्भावस्था एवं प्रसव (Pregnancy & Labour) :- ठंडक के साथ ज्वर 7 बजे खाने के बाद। रक्त की विषाक्तता से पाकाशयिक ज्वर। पाकाशयिक ज्वर में जीभ पर लसलसापन तथा सायंकाल में वृद्धि।

ज्वर (Fever) :- ठंडक के साथ ज्वर 7 बजे खाने के बाद। रक्त की विषाक्तता से पाकाशयिक ज्वर। पाकाशयिक ज्वर में जीभ पर लसलसापन तथा सायंकाल में वृद्धि।

मूत्र सम्बन्धी रोग ( Disease of urine) :- मूत्राशय की रक्त संचार हीन अवस्था kali Phos के समान।

पुरुष जनेन्द्रिय (Male Sex Organe) :- उपदंश में सायंकाल में वृद्धि। सूजाक में पीला श्राव।

पाकाशय या आमाशय (Stomach) के विकार :- गरम पेय पदार्थों से डर या अनिच्छा। जलन की तरह प्यास या प्यास का अभाव। आमाशय या पाकाशय में पुरानी सर्दी, भरापन या मूर्च्छा का भाव। पाकाशय के भीतर दर्द या पुराना प्रदाह। बच्चों के पाकाशय या आमाशय में भरापन की अनुभूति। शू्ल का दर्द।

स्नायविक लक्षण (Neuralagic Symptoms):- कठिनता से जानने योग्य नाड़ी अर्थात् जब रोगी की नाड़ी का पता नहीं चल रहा हो।

रक्त संचालन यन्त्र (Circulatory System) :-  नाड़ी कठिनता से जानने योग्य या कठिनता से जानी जा सकती है।

निद्रा एवं स्वप्न (Sleeping & Dream) :- स्पष्ट स्वप्न।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue & Taste) :- सफेद किनारों तथा पीसी हुई दाल के स्वाद वाली जिह्वा।

सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :- 

नाक (Nose) :-

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :-

दाँतों एवं मसूड़ों (Teeth & Gums) :- 

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- शाम को बढ़ने वाली रात्रि कालीन दम अटकाने वाली गला अवरोधक खाँसी।दमा गर्मी से या गरम ऋतु में बढ़ता है।नीचे की ओर जाने वाला चमकीला लसलसा बलगम।बोलने से थकावट पैदा होता है।

उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool) :- 

त्वचा (Skin) :- 

तन्तु (Tissues) :- 

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) :-

ह्वास-वृद्धि (Amelioration- Aggravation) :-

वृद्धि :- गरम कमरे में कष्ट बढ़ता है।

ह्वास :- शीतल या ठंडी खुली वायु में कष्ट घटता है।


Silicia (साइलीशिया)

मन:स्थिति (Mental symptoms/condition) :-

सूईयों एवं पिनों से खेलना परन्तु हृदय रोग में भय होना। जीवन से थका, निराशा एवं घृणा। सोचना कठिन।बेखबर। मन:संयोग नहीं कर सकना।


आँख (Eye) :- Silicia :- अश्रु कोष या अश्रु श्रावी संस्थान के रोग। आँखों की पलकों में विलनियाँ और /या चारों तरफ फोड़े और/ या छोटी छोटी फुन्सियाँँ। आँखों के घेरे में सूजन। आँखों के गढ़ों में दबाव और जलन। आँखों के कोनो के रोग। पैरों का पसीना दबने से मोतियाबिंद और / या धुन्ध दृष्टि। चक्षु कोष पटल का अर्बुद। दाहिनी आँख की पलकों का स्नायु शूल। पलकों के चारों ओर गिल्टियाँ।

कान ( Ear) :- बाहरी कान में छिद्र। बाहरी कान के प्रदाह पीब एवं बहरापन। कान का खुलना तीव्र आवाज से। स्नान के बाद कान में प्रदाह। 

मुँह (Mouth) :-  मुख के कोने में राख के रंग का घाव। मुख या तालू का छेद करनेवाला घाव।मुख क्षत में पानी जैसा पीब।लार बहने वाली तथा पीब वाली ग्रन्थि।

गर्भावस्था एवं प्रसव (Pregnancy & Labour) :- गर्भावस्था में पैर के तलवों में दर्द । प्रसव वेदना के बाद पैर के तलवों में जलन, लेकिन प्रसूतावस्था में घटती है। स्तनों में कर्कट रोग, नासूर कड़े पिंड  Calcaria Flour के समान।

ज्वर (Fever) :- ज्वर में अत्यधिक ठंडी हवा सहन नहीं होती मुख्यतः सिर पर।

मूत्र सम्बन्धी रोग ( Disease of urine) :- गुर्दे में पीब होना। मूत्र श्लेष्मा युक्त।

पुरुष जनेन्द्रिय (Male Sex Organe) :- अंडकोषों पर पसीना। उपदंश की सड़न या पेशियों में गाँठ। गुटिका उपदंश की तृतीयावस्था। मूत्राशय मुखशायी ग्रन्थि में जलन। मूत्रग्रन्थि में प्रदाह और पीब।उपदंश के कारण सूजाक में सड़न।लगातार कामविषयक चिन्ता।

पाकाशय या आमाशय (Stomach) के विकार :- आमाशय या पाकाशय में कड़ापन मुख्यतः दक्षिणांश में। छाती का दूध पीने के बाद कै। बच्चे दूध पीकर कै कर देते हैं। कै सुबह में। मन्दाग्नि एवं गले में जलन। मिठाई की विशेष इच्छा। स्फूर्ति दायक चीजें सहन नहीं होता है।

स्नायविक लक्षण (Neuralagic Symptoms) :- साधारण कारणों से भी आक्षेप। आक्षेप पेट से शुरू होना। नर्तन (Choria) कृमि के कारण। पक्षाघात क्षयरोग के कारण। शीतल वायु बर्दास्त नहीं। प्रादाहिक। हठी। मृगी का आक्रमण रात में Kali Phos के समान।

रक्त संचालन यन्त्र (Circulatory System) :- हृदय की पुरानी बीमारी।

निद्रा एवं स्वप्न (Sleeping & Dream) :- काम की उत्तेजनाओं से अनिद्रा।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue & Taste) :- जिह्वा में घाव।

सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :-

नाक (Nose) :-

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :-

दाँतों एवं मसूड़ों (Teeth & Gums) :-

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- उत्तेजक खाँसी। ढ़ीला दानेदार बलगम या श्लेष्मा। पसीने की तरह रात्रि कालीन खाँसी। रात्रि कालीन खाँसी में शीतल पेय से वृद्धि। रात्रि कालीन खाँसी में वक्षास्थि के ऊपर गढ़े।खाँसी में वक्षास्थि के ऊपर सुरसुरी। छाती की गहराई में दर्द।

उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool) :-

त्वचा (Skin) :-

तन्तु (Tissues) :-

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) 

ह्वास-वृद्धि (Amelioration- Aggravation) :-

वृद्धि :- पूर्णिमा के समय, रात्रि में मुख्यतः 2 बजे रात्रि के बाद, पैर का पसीना दबने या ठंड लगने या खुली हवा से कष्ट में वृद्धि।

ह्वास :- गरम कमरे में या गरमी से या सिर को गरम कपड़े बाँधने या सेंकने से मैग फॉस के समान कष्ट घटता है।

Calcaria Sulph ( कैल्कैरिया सल्फ)

मन:स्थिति :-

एकाएक होश गायब होना (Sudden Faintness)।परिवर्तनशील स्वभाव।

मन:स्थिति (Mental symptoms/condition)

आँख (Eye) :- श्वेत पटल पर छाले।आँखों में अर्द्ध दृष्टि। आँखों में चोट के बाद के उपसर्ग। आँखों में खपाची जैसा दर्द।आँखों से पीला गाढ़ा श्राव। मोतियाबिंद के भीतरी भाग में धुमैला पीब। कनीनिका का धुमैलापन।

कान ( Ear) :-

मुँह (Mouth) :- दातौन करते समय मसूड़ों से रक्त श्राव। होठों के भीतर जलन एवं दर्द।

गर्भावस्था एवं प्रसव (Pregnancy & Labour) :- स्तनों के प्रदाह में Silicia, Kali Mure, Ferrum Phos तथा Calcaria Flour के साथ तुलना करें।


ज्वर (Fever)

मूत्र सम्बन्धी रोग ( Disease of urine) :- मूत्र में लार। मूत्राशय में पकने वाली अवस्था।

पुरुष जनेन्द्रिय (Male Sex Organe) :- उपदंश में पकने वाली अवस्था।मूत्रग्रन्थि में प्रदाह एवं फोड़ा। सूजाक में पीब सा खून मिला हुआ श्राव।

पाकाशय या आमाशय (Stomach) के विकार :- लाल मदिरा पीने, फल एवं हरी सब्जी खाने की इच्छा। मन्दाग्नि के साथ चक्कर।

स्नायविक लक्षण (Neuralagic Symptoms)

रक्त संचालन यन्त्र (Circulatory System)

निद्रा एवं स्वप्न (Sleeping & Dream) :- डर जाने का स्वप्न Kali Phos की तरह।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue & Taste) :- मिट्टी के रंग की, पीलापन लिए हुए, जड़ों एवं किनारे में सफेद रंग वाली ,थुलथुली जिह्वा। जिह्वा का स्वाद साबुन जैसा या करूवा या तीक्ष्ण। पीब वाली जिह्वा।

सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :- 

नाक (Nose) :- 

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :- 

दाँतों एवं मसूड़ों (Teeth & Gums) :- 

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- छाती के उपसर्गों के साथ आर-पार दर्द।दमा के साथ क्षय ज्वर।

उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool) :- 

त्वचा (Skin) :- 

तन्तु (Tissues) :- 

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) :- 

ह्वास-वृद्धि (Amelioration- Aggravation ) :-

वृद्धि :- कपड़ा धोने में Sepia तथा पानी में काम करने में Natrum Sulphur के समान कष्ट बढ़ता है।

ह्वास :-

Nat Mure (नेट्रम म्यूर)

मन:स्थिति (Mental symptoms/condition):-

उदासी के साथ दिल (हृदय) की धड़कन। कठिन रोगों में बेहोशी। गुस्सा। खिलाड़ीपन। नाचने गाने की प्रवृत्ति। प्रलाप (Delirium) में विषय बदलते रहना। भोकारपारकर रोना (Bitterly Weeping)। विषयासक्ति का दु:ख इग्नेशिया के समान और उसका पुराना रूप। यौवनावस्था में शोकाकुलता या शोकाछन्नता। सहज में भड़क उठना। सान्त्वना देने पर कष्ट बढ़ना।


आँख (Eye)Natrum Mure :- अश्रु कोष की नली में सिकुड़न एवं रुकावट।आँखों की पलकों में दाने।आँखों की कनीनिका पर सफेद दाग, दानों वाली जलन, फफोले या घाव। आँखों के सामने जाला या पर्दा। जलाने वाले आँसू के साथ स्नायुशूल और/या छोटे छोटे छाले। नाइट्रेट ऑफ सिल्वर के बाद आँसू। पढ़ते में अक्षर सट जाते हैं या मिलकर दौड़ते हैं।आँखों से मुख्यतः श्वेत पटल से सफेद कफ का श्राव।आँसू के साथ या समय-समय पर पलकों का गिरना। आँखों में ग्लूकोमा रोग।


कान ( Ear) :- कानों में चबाते समय कड़कड़ाहट की आवाज। 

मुँह (Mouth) :- उपजिह्वा (Uvula) का मानो लटकी हुई ।उपजिह्वा का बढ़ जाना। उपजिह्वा का प्रदाह। मुख के किनारों और / या कोनों पर छाले और/ या घाव मुख्यतः तर घाव। ओठों का फट जाना और / या मुख्यतः निचले ओठ का बीच में फट जाना। मुख क्षत से पानी जैसा श्राव बहना। होठों पर सूजन। होठों पर जलन और/ या दर्द युक्त दरारें। लार टपकना। मुख क्षत के साथ अधिक मात्रा में और/ या लगातार लार बहना। मुख के किनारे में मोती जैसे छाले। जिह्वा या जीभ (Tongue) के नीचे गिल्टी। 

गर्भावस्था एवं प्रसव (Pregnancy & Labour) :- गर्भावस्था में झागदार पानी की तरह कै। प्रसूतावस्था में तथा स्तनपान या छाती का दूध पिलाते समय केश झरना।

ज्वर (Fever) : - ज्वर आन्तरिक कम्पन के साथ।  ज्वर ठंढ़क के साथ सुबह से दोपहर तक। ज्वर में होठों पर छाले। 
सावधानी : - सिर दर्द एवं ज्वर की अवस्था में नेट्रम म्यूर का प्रयोग, उपयोग या सेवन न करें। 

मूत्र सम्बन्धी रोग ( Disease of urine) :- मुँह में लार या पानी आने के साथ ही अत्यधिक मूत्र।पेशाब के बाद काटने का सा दर्द और जलन।शीताद से रक्त मूत्र। पेशाब के बाद कमर दर्द होना (लाईकोपोडियम में पेशाब के बाद कमर दर्द घट जाता है)।

पुरुष जनेन्द्रिय (Male Sex Organe) :- अंडकोषों में दर्द। मूत्रग्रन्थि या मूत्रमार्ग में दबाव का दर्द तथा पेशाब के बाद काटने जैसा दर्द। मूत्रशायी ग्रन्थि एवं मूत्राशय से पीब सा श्राव। सूजाक के साथ जलन और/या पानी सा पतला स्वच्छ श्राव। वीर्य श्राव शीत के साथ। शुक्र रज्जू दर्द युक्त।

पाकाशय या आमाशय (Stomach) के विकार :- कँवल या कमला या जोण्डिस रोग के साथ निद्रालुता। कफ या बलगम या श्लेष्मा या अम्ल की कै।कै सूत या कॉफी के चूर्ण की तरह।धूम्रपान या नमकीन भोजन की इच्छा। कड़ुआ पदार्थ, मिर्च या नमक की विशेष इच्छा। पाकाशय में शू्ल या दर्द और लार या मुँह से पानी आना और मन्दाग्नि की स्थिति में भी।आमाशय या पाकाशय के बीच में लाल दाग।

स्नायविक लक्षण (Neuralagic Symptoms) :- सूनेपन की अनुभूति। मृगी जनित कमजोरी।

रक्त संचालन यन्त्र (Circulatory System) :- हाथ ठंडा। हाथ-पैर सुन्न। हृदय की अति वृद्धि। हृदय के आसपास संकोचन।

निद्रा एवं स्वप्न (Sleeping & Dream) :- अत्यधिक लेकिन अस्फूर्तिदायक निद्रा और सुबह जगने पर थकावट, लगातार सोने की इच्छा परन्तु उत्तेजना से अनिद्रा।

जिह्वा एवं स्वाद (Tongue & Taste)Natrum Mure :- झागदार या लार से भरी जिह्वा। जिह्वा पर छाले । जिह्वा दोष से बोलना देर से सीखे।

सिर, मष्तिष्क एवं खोपड़ी (Head, Brain & Skull) :-  अर्धकपाली। मानो सिर खुल जयेगा। खोपड़ी या गर्दन पर बालों के किनारों पर खुजलाने वाले उद्भेद। सिरदर्द समय के नियम पर। मुँह में लार अधिक और लार श्राव भी। सिर दर्द लार श्राव के साथ।सिर का स्वतः हिलना। आँखों में आँसू की अधिकता से सिर दर्द।ऋतु से पहले या बाद में सिर दर्द।कब्ज से सिर दर्द। सिर दर्द में चलने से आराम। सिर दर्द तन्द्रालुता के साथ। सिर दर्द लू लगने से या सर्दी से।मन्द सिर दर्द।सिर दर्द जलीय श्लेष्मा सहित।सिर दर्द दोपहर तक।

नाक (Nose) :- नकसीर खांसने या झुकने पर। नाक लाल। साफ पानी का सा जुकाम। नाक का पिछला भाग सूखा। नाक का श्राव खारा (Allium Cipa 30 की तरह)। नाक की एक ओर सुन्न का सा अनुभव। नाक में महक नहीं आना। नाक के घाव में सूजन और पपड़ी।  नाक पर फुन्सिया। नाक का श्लेष्मा खारा या नमकीन। 

गले एवं चेहरे (Throat & Face) :- उपजिह्वा शिथिल। उपजिह्वा में प्रदाह। कर्ण मूल प्रदाह के साथ लार का बहना। कर्णमूल प्रदाह के साथ खारा बलगम। गंडमाला या गलझिल्ली प्रदाह के साथ पानी सा नि:श्राव। गलझिल्ली प्रदाह के साथ तन्द्रालुता।गले में वृद्धि, सूखापन और/या स्वच्छ कफ या बलगम का आवरण। गले में सूई चुभने का-सा दर्द। चेहरे के दर्द के साथ कब्ज तथा वाल का झड़ना। 

दाँतों एवं मसूड़ों ( Teeth & Gums) :- जिह्वा का अर्बुद या घाव।  मसूढ़ों का घाव।  दातों के उपसर्ग या दर्द के साथ लार टपकना या बहना। लार बहने वाली ग्रन्थियों में प्रदाह। दात निकलते समय लार बहना। 

श्वसन यन्त्र (Respiratory System) :- निश्चित समय पर आने वाली, फैलने वाली खाँसी। श्वास कष्ट एवं सिर दर्द दर्द पैदा करने वाली रात्रिकालीन खाँसी।स्वच्छ, पानी जैसा, पारदर्शक बलगम और/या दमा के साथ आक्षेपिक खाँसी।

उदर या तलपेट तथा मल (Abdomen & Stool) :- अतिसार एवं कब्ज बारी बारी से। अतिसार चमड़ा छिल जाने वाला या झागदार। अतिसार स्वत: और अधिक मात्रा में। कब्ज आंतों में अशक्तता या कमजोरी या नमी की कमी के कारण। लम्बा और टूट टूट कर होने वाला मल। मलान्त्र में कोंचने, डसने या दपदपाहट जैसा दर्द। दर्द उदर के घेरे में। प्लीहा में कष्ट। रक्तार्ष। मलद्वार में दाद। बिखरता हुआ मल। सरलान्त्र में जलन। कमर पर कसा हुआ वस्त्र असहनीय। 

त्वचा (Skin) :- आतशक या उपदंश के दाने।  घमौरियाँ।  उद्भेद संकोची पेशी पर। एक्जिमा या दाद दिनाय गोलाकार घेरे वाला और / या पानी भरे फफोले वाला और मुख्यतः जोड़ों पर एवं अधिक नमक खाने के कारण। चमड़े से जलीय नि:श्राव  (नेट्रम सल्फ की तरह) । खुजली बहुत तेज और/या भयंकर परिश्रम करने के कारण। चमड़ा गन्दा और / या कड़ा और / या शिथिल और / या दरार युक्त और / या दर्द युक्त। चमड़े पर खारिश (काली म्यूर से तुलना करें)। चमड़े पर जलन युक्त खारिश या चकत्ते (काली सल्फ की तरह)। पेड़ू या योनि या छिपे हुए स्थानों का और / या सर्वांग शरीर के बाल झड़ना और / या गंजापन और / या जल्दी पकना या भूरा हो जाना। केश का झड़ना (काली सल्फ से तुलना करें)। त्वचा पर काले-काले दाग (नेट्रम फास, काली फास एवं कैल्केरिया फास से तुलना करें)। रूसी छूटना (काली सल्फ एवं काली म्यूर से तुलना करें)। पैरों की अंगुलियों में दरारें। दाद एवं नाखून के नीचे के चमड़े का लटकना। काछ लगना या काछ का दिनाय (रस टाक्स एवं हीपर सल्फर से तुलना करें)। 

तन्तु (Tissues) :- अच्छी तरह खाते पीते रहने पर भी दुबला होते जाना।  पहले शरीर का ऊपरी अंग यथा गला तथा बाद में अन्य अंगों में कृशता आना। ज्वर में धातु विकार। रक्ताम्बु वाला श्रावण। 

स्त्री जनेन्द्रिय (Female Sex Organ) :- ऋतु के साथ या बाद में सिर दर्द। ऋतु के साथ उदासी। ऋतु पतली (काली फास से तुलना करें)। ऋतु देर से या अनियमित या अत्यधिक। ऋतु के साथ उदर में फड़कन (कैल्केरिया सल्फ से तुलनीय)। जरायु का निकलना, बैठने से आराम। खांसने और/या छींकने से जरायु का बाहर निकलना और/या पेशाब हो जाना। खारिश पैदा करने वाला या खुजलीदार प्रदर (साईलीसिया से तुलना करें)। प्रसव वेदना (कैल्केरिया फास एवं फेरम फास से तुलना करें)। योनि में पेशाब के बाद जलन। योनि का सूखापन (फेरम फास से तुलना करें)। रजोरोध रक्तहीनता से (कैल्केरिया फास से तुलना करें)। हृत्पाण्डु रोग (कैल्केरिया फास एवं फेरम फास से तुलना करें)। विपरीत लिंगियों में विवाहित का अविवाहित तथा अविवाहित का विवाहित के प्रति आकर्षण। ऋतु या रज: श्राव या मेन्स चालू कर गर्भावस्था को दूर करना। 

ह्वास-वृद्धि (Amelioration- Aggravation) :-

वृद्धि :- समुद्र के किनारे, कीटों के काटने या डंक, क्विनाइन सेवन, सिल्वर नाइट्रेट, शीत ऋतु में, 9 बजे प्रातः से अपराह्न 3 बजे दिन तक, दोपहर बाद मुख्यतः ऋतु श्राव में नेट्रम फॉस के समान, प्रातःकाल में नेट्रम सल्फ के समान, धूप में कष्ट की वृद्धि होती है।

ह्वास :- किसी कड़ी चीज पर लेटने से।