गुरुवार, 22 सितंबर 2022

काले-गोरों की गाथा:-

काले-गोरों की गाथा....

पहले टुकड़े करो देश के, फिर तो जश्न मनायेंगे।
कुश्ती के लिए कश्मीर में अखाड़ा एक बनायेंगे।।
सदियों से चूसा है इनको, गन्ने सा सदा चवायेंगे।
सोने की चिड़िया है भारत, भूल कभी न  पायेंगे।।
चैन नहीं मिल सकता हमको भारत के छिन जाने से ।
दिल कचोटता अब भी मेरा, काले द्वारा भगाने से।।
भाषा-संस्कृति को भेद कर मैंने भारत पर राज जमाया था।
ईस्ट इंडिया कम्पनी से ही मैंने वहाँ व्यापार बढ़ाया था।।
विश्व विजेता सिकंदर क्षण भर जहाँ नहीं टिक पाया था।
फूट डाल कर टिका वहाँ पर जग को यह दिखलाया था।।
दीन ईलाही पाठ पढ़ा कर मुस्लिम ने जगह बनाया था।
करके उन्हें पराजित हमने अपना राज चलाया था ।।
धर्म,कला, विज्ञान,नीति का है अक्षय भंडार जहाँ।।
विश्व गुरु भारत ही है, लेते हैं हरि अवतार जहाँ।।

( क्रमशः )

प्रो० अवधेश कुमार शैलज, पचम्बा, बेगूसराय ।


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