शुक्रवार, 23 सितंबर 2022

हमको नित बोध रहे -

अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना का हमको नित बोध रहे ।
सत्य सनातन धर्म ज्ञान का फैला अन्तर्बोध रहे।
हूँ मैं कौन ? कहाँ से आया ? किससे चालित होता हूँ ?
बोध हमें हो- क्यों हम जीते ? किस चिर निद्रा मे सोते हैं ?
किस विकास के क्रमिक विकास बोध ले हम धरती पर आते हैं ?
बोध हमें हो जग में आकर चिर कालिक क्या कर जाते हैं ?
देश, काल औ पात्र बोध का सम्यक् ज्ञान क्या होता है ?
क्या होती सम्यक् अनुभूति ? सम्यक् व्यवहार क्या होता है ?
अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना का हमको नित बोध रहे ।
सत्य सनातन धर्म बोध का फैला अन्तर्बोध रहे।

प्रो० अवधेश कुमार शैलज, पचम्बा, बेगूसराय ।


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